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Lifestyle लाइफस्टाइल : भारत के हृदय स्थल कहे जाने वाले मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। राज्य की तीन अनोखी परंपराओं और कल्चरल ट्रेडिशन को हाल ही में ‘इंटैंगिबल कल्चरल हेरिटेज ऑफ इंडिया’ की नेशनल इन्वेंटरी में शामिल किया गया है। इनमें मैहर बैंड और नाल तरंग, अगरिया जनजाति की पारंपरिक लोहे की तकनीक और निमाड़ का पारंपरिक भोजन शामिल है।
मध्य प्रदेश अपनी समृद्ध संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर और परंपराओं के लिए पहले से ही प्रसिद्ध है। खजुराहो के मंदिर और भीमबेटका की गुफाओं जैसे यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज स्थलों के बीच अब इन नई परंपराओं को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है, जिससे राज्य की सांस्कृतिक विरासत और मजबूत हुई है।
मैहर बैंड और नाल तरंग की खासियत
मैहर बैंड की स्थापना वर्ष 1918 में बाबा अलाउद्दीन खान ने की थी। यह बैंड भारतीय शास्त्रीय संगीत और पश्चिमी संगीत के अनोखे फ्यूजन के लिए जाना जाता है। इसमें परंपरा और आधुनिकता का सुंदर मेल देखने को मिलता है, जिसने इसे अलग पहचान दी है।
वहीं नाल तरंग एक अनोखा संगीत वाद्य यंत्र है, जिसे पुरानी और उपयोग में न आने वाली राइफल की नाल (बैरल) से तैयार किया जाता है। इस वाद्य की ध्वनि और निर्माण तकनीक इसे बेहद खास बनाती है, और यह मध्य प्रदेश की लोक कला का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अगरिया जनजाति की लोहे की तकनीक
अगरिया जनजाति लंबे समय से पारंपरिक तरीके से लोहे को गलाने और औजार बनाने की कला के लिए जानी जाती है। यह तकनीक पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी अपनी मौलिकता को बनाए हुए है। यह न केवल एक शिल्प है बल्कि जनजातीय जीवन और संस्कृति का अहम हिस्सा भी है।
निमाड़ की पारंपरिक रसोई
निमाड़ क्षेत्र का पारंपरिक भोजन भी इस सूची में शामिल किया गया है। यहां के खानपान में स्थानीय सामग्री और पारंपरिक तरीके से बनाए जाने वाले व्यंजनों की खास पहचान है, जो क्षेत्रीय संस्कृति को दर्शाते हैं।
इन तीनों परंपराओं के नेशनल इन्वेंटरी में शामिल होने से मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूती मिली है। इससे न केवल स्थानीय कलाकारों और समुदायों को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि देश की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को भी वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
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