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प्यूरीफायर और बिजली दोनों फेल पानी साफ करने के 5 आसान उपाय

Ratna Netam
9 Aug 2026 7:51 PM IST
प्यूरीफायर और बिजली दोनों फेल पानी साफ करने के 5 आसान उपाय
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नई दिल्ली : साफ और सुरक्षित पीने का पानी हर व्यक्ति की बुनियादी जरूरत है। घरों में आमतौर पर पानी को साफ करने के लिए वाटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन बिजली जाने पर इलेक्ट्रिक प्यूरीफायर काम करना बंद कर सकता है। ऐसी स्थिति में पानी को सुरक्षित बनाने के लिए कुछ सरल उपाय अपनाए जा सकते हैं। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि हर घरेलू तरीका पानी में मौजूद हर तरह के प्रदूषक को खत्म नहीं करता। खासतौर पर अगर पानी में भारी धातु, आर्सेनिक, फ्लोराइड या रासायनिक प्रदूषण की आशंका हो तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
नल के पानी में कई बार मिट्टी, धूल, जंग के कण और अन्य दिखाई देने वाली अशुद्धियां मिल सकती हैं। वहीं दूषित स्रोत से आने वाले पानी में बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी भी मौजूद हो सकते हैं। ऐसे पानी के सेवन से डायरिया, हैजा, टायफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए पानी की गुणवत्ता संदिग्ध होने पर उसे बिना उपचार किए पीना उचित नहीं माना जाता।
पानी उबालना सबसे आसान तरीका
बिजली उपलब्ध न होने की स्थिति में पानी को अच्छी तरह उबालना सबसे उपयोगी घरेलू उपायों में से एक है। पानी को उबालने से उसमें मौजूद कई तरह के हानिकारक सूक्ष्मजीवों को निष्क्रिय करने में मदद मिलती है। पानी को उबालने के बाद उसे साफ और ढके हुए बर्तन में ठंडा करना चाहिए। यदि पानी में मिट्टी या अन्य कण दिखाई दे रहे हों तो ठंडा करने के बाद साफ कपड़े या उपयुक्त फिल्टर से छाना जा सकता है।
ध्यान रहे कि उबालने से पानी में मौजूद भारी धातु, कई रासायनिक प्रदूषक या घुले हुए लवण जरूरी नहीं कि खत्म हो जाएं। इसलिए ऐसे क्षेत्र में जहां भूजल में आर्सेनिक, फ्लोराइड या अन्य रसायनों की समस्या हो, पानी की जांच और उपयुक्त फिल्ट्रेशन जरूरी है।
फिटकरी से दिखाई देने वाली गंदगी बैठाई जा सकती है
फिटकरी का इस्तेमाल लंबे समय से पानी में मौजूद मिट्टी और कुछ बड़े कणों को नीचे बैठाने के लिए किया जाता रहा है। इसे पानी को साफ करने की प्रक्रिया में कोएगुलेंट के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इससे पानी में मौजूद कुछ कण आपस में चिपककर नीचे बैठ सकते हैं।
हालांकि, फिटकरी को पानी कीटाणुरहित करने का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। फिटकरी से पानी में मौजूद सभी बैक्टीरिया और वायरस खत्म नहीं होते। इसलिए फिटकरी से कण नीचे बैठाने के बाद पानी को सुरक्षित तरीके से उबालना या प्रमाणित जल-शोधन प्रणाली का इस्तेमाल करना अधिक बेहतर है।
मिट्टी के बर्तन में रखने से पानी ठंडा रहता है
मिट्टी के घड़े में पानी रखने से पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है। हालांकि, केवल मिट्टी के बर्तन में रखने को पानी की पूर्ण शुद्धि का तरीका नहीं माना जाना चाहिए। अगर पानी पहले से दूषित है तो उसे केवल घड़े में रखने से सभी रोगजनक समाप्त नहीं होते। इसलिए घड़े में रखने से पहले पानी को सुरक्षित तरीके से उपचारित करना जरूरी है। साथ ही घड़े की नियमित सफाई और ढककर रखना भी महत्वपूर्ण है।
चारकोल और एक्टिवेटेड कार्बन में अंतर समझना जरूरी
चारकोल या एक्टिवेटेड कार्बन कुछ परिस्थितियों में पानी की गंध, स्वाद और कुछ कार्बनिक पदार्थों को कम करने में मदद कर सकता है। लेकिन सामान्य चारकोल को सीधे पानी में डाल देना सुरक्षित जल-शोधन का भरोसेमंद तरीका नहीं है। प्रमाणित एक्टिवेटेड कार्बन फिल्टर का इस्तेमाल उसके निर्धारित तरीके से ही करना चाहिए।
अमरूद की पत्तियों वाला घरेलू टेस्ट भरोसेमंद नहीं
पानी में अमरूद की पत्तियां डालकर रंग बदलने के आधार पर आयरन, आर्सेनिक या भारी धातुओं की मौजूदगी पता करने का दावा सोशल मीडिया और घरेलू नुस्खों में देखने को मिलता है। लेकिन इसे वैज्ञानिक या प्रमाणित जल गुणवत्ता जांच का विकल्प नहीं माना जा सकता। पानी में आर्सेनिक, फ्लोराइड, आयरन या अन्य रसायनों की मौजूदगी जानने के लिए प्रमाणित टेस्ट किट या प्रयोगशाला जांच की जरूरत होती है।
इसलिए बिजली न होने पर अगर पानी की सुरक्षा को लेकर संदेह है तो सबसे व्यावहारिक घरेलू कदम पानी को उचित तरीके से उबालना और साफ, ढके हुए बर्तन में रखना है। वहीं लंबे समय से संदिग्ध स्रोत का पानी इस्तेमाल करने वाले लोगों को पानी की गुणवत्ता की जांच जरूर करानी चाहिए। केवल पानी का साफ दिखाई देना यह साबित नहीं करता कि वह पीने के लिए सुरक्षित है।
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