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प्रोस्टेट कैंसर सर्वे: 69% पुरुष जोखिम से अनजान, जानें लक्षण और PSA टेस्ट

Rajeshwari Nishad
17 Oct 2026 9:54 AM IST
प्रोस्टेट कैंसर सर्वे 69% पुरुष जोखिम से अनजान, जानें लक्षण और PSA टेस्ट
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Men's Health Tips : पुरुषों की सेहत से जुड़ी गंभीर बीमारियों में प्रोस्टेट कैंसर एक महत्वपूर्ण समस्या है। हाल के एक सर्वे में पुरुषों के बीच इस बीमारी की जांच को लेकर जागरूकता की कमी सामने आई है। सर्वे के अनुसार, बड़ी संख्या में पुरुषों को यह तक पता नहीं है कि प्रोस्टेट कैंसर की जांच कब और कैसे करानी चाहिए। चिंता की बात यह है कि बीमारी शुरुआती अवस्था में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित हो सकती है। ऐसे में समय पर चिकित्सकीय सलाह और सही जानकारी बेहद जरूरी है।

हालांकि, शीर्षक में बताए गए 69 प्रतिशत के सटीक आंकड़े की मूल सर्वे रिपोर्ट की पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए इसे सभी पुरुषों पर लागू निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

प्रोस्टेट कैंसर क्या होता है?

प्रोस्टेट पुरुषों के शरीर में मूत्राशय के नीचे स्थित अखरोट के आकार की एक ग्रंथि है। इसका मुख्य कार्य वीर्य में शामिल होने वाले तरल पदार्थ का उत्पादन करना है। जब प्रोस्टेट की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और कैंसर का रूप ले लेती हैं, तो इस स्थिति को प्रोस्टेट कैंसर कहा जाता है। कुछ प्रकार के प्रोस्टेट कैंसर धीरे-धीरे विकसित होते हैं, जबकि कुछ तेजी से बढ़कर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल सकते हैं।

किन कारणों से बढ़ता है प्रोस्टेट कैंसर का खतरा?

प्रोस्टेट कैंसर होने का कोई एक निश्चित कारण नहीं है। हालांकि, उम्र बढ़ना इसका प्रमुख जोखिम कारक है। खासकर 50 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में इसका खतरा बढ़ सकता है। यदि पिता या भाई को प्रोस्टेट कैंसर हो चुका है, तो परिवार के अन्य पुरुषों में भी जोखिम अधिक हो सकता है। इसके अलावा BRCA1 और BRCA2 जैसे कुछ आनुवंशिक बदलाव भी बीमारी की आशंका बढ़ा सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, हर जोखिम कारक वाले व्यक्ति को कैंसर हो, यह जरूरी नहीं है।

शरीर में दिखें ये संकेत तो न करें नजरअंदाज

प्रोस्टेट कैंसर शुरुआती चरण में अक्सर कोई लक्षण पैदा नहीं करता। लेकिन बीमारी बढ़ने पर कुछ परेशानियां सामने आ सकती हैं।

- बार-बार पेशाब आना, खासकर रात में।

- पेशाब शुरू करने में कठिनाई या कमजोर धार आना।

- पेशाब या वीर्य में खून दिखाई देना।

- पेशाब करते समय दर्द या जलन महसूस होना।

- पीठ, कूल्हों या हड्डियों में लगातार दर्द रहना।

ये सभी समस्याएं केवल कैंसर के कारण नहीं होतीं। प्रोस्टेट बढ़ने, संक्रमण और अन्य सामान्य बीमारियों में भी ऐसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसलिए लक्षण बने रहने पर यूरोलॉजिस्ट से जांच कराना उचित है।

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सर्वे में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

15 अक्टूबर 2026 को सामने आए हील फाउंडेशन के सर्वे में दिल्ली-एनसीआर सहित पांच राज्यों और क्षेत्रों के 45 वर्ष या उससे अधिक आयु के 1,036 पुरुषों को शामिल किया गया।

68.9% किसी एक जोखिम कारक का नाम नहीं बता सके 60.8% अपनी जांच की स्थिति से अनजान 31% PSA ब्लड टेस्ट के बारे में सुना था 14% स्वयं PSA टेस्ट कराने का अनुरोध किया।

प्रोस्टेट कैंसर की पहचान के लिए कौन सी जांच जरूरी?

प्रोस्टेट कैंसर की शुरुआती जांच में पीएसए (PSA) ब्लड टेस्ट का इस्तेमाल किया जाता है। यह खून में प्रोस्टेट से बनने वाले एक विशेष प्रोटीन की मात्रा मापता है। हालांकि, पीएसए का स्तर बढ़ने का अर्थ हमेशा कैंसर नहीं होता। प्रोस्टेट बढ़ने या सूजन के कारण भी इसका स्तर अधिक हो सकता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर डिजिटल रेक्टल एग्जामिनेशन, एमआरआई और बायोप्सी कराने की सलाह दे सकते हैं। कैंसर की पुष्टि के लिए बायोप्सी महत्वपूर्ण होती है।

किस उम्र में कराएं जांच?

अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार, सामान्य जोखिम वाले पुरुषों को 50 वर्ष की उम्र में डॉक्टर से स्क्रीनिंग के फायदे और नुकसान पर चर्चा करनी चाहिए। अधिक जोखिम वाले पुरुषों के लिए यह चर्चा 45 वर्ष या कुछ परिस्थितियों में 40 वर्ष से शुरू हो सकती है। हर पुरुष के लिए पीएसए जांच अनिवार्य नहीं है। अनावश्यक जांच से गलत सकारात्मक परिणाम और गैरजरूरी उपचार का जोखिम भी हो सकता है।

जागरूकता ही सबसे महत्वपूर्ण कदम

प्रोस्टेट कैंसर को लेकर झिझक और जानकारी की कमी समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने में बाधा बन सकती है। नियमित व्यायाम, संतुलित खानपान और स्वस्थ वजन बनाए रखना संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, लेकिन इनसे प्रोस्टेट कैंसर की रोकथाम की गारंटी नहीं मिलती।

विशेषज्ञों का संदेश है कि पेशाब से जुड़ी लगातार परेशानियों को केवल उम्र का असर मानकर नजरअंदाज न करें। सही समय पर जांच और चिकित्सकीय परामर्श से बीमारी की पहचान तथा उपचार की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।

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