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लाइफ स्टाइल
प्रसव के बाद मां-बच्चे की सही देखभाल है जरूरी, न करें ये लापरवाही
jantaserishta.com
6 Feb 2026 1:17 PM IST

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नई दिल्ली: प्रसव के बाद का समय मां और बच्चे दोनों के लिए बेहद नाज़ुक और महत्वपूर्ण होता है। डिलीवरी के बाद अक्सर ध्यान सिर्फ बच्चे पर चला जाता है, लेकिन यह समझना जरूरी है कि अगर मां स्वस्थ रहेगी तभी शिशु की सही देखभाल संभव है। इस समय थोड़ी-सी लापरवाही आगे चलकर मां और बच्चे दोनों की सेहत पर भारी पड़ सकती है, इसलिए प्रसवोत्तर देखभाल को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
डिलीवरी के बाद मां का शरीर बहुत कमजोर हो जाता है। गर्भावस्था और प्रसव के दौरान शरीर की ताकत, खून और पोषक तत्व काफी हद तक कम हो जाते हैं। ऐसे में मां को पूरा आराम, सुकून भरा माहौल और परिवार का सहयोग मिलना बहुत जरूरी है। अत्यधिक काम करना, नींद पूरी न होने देना या मानसिक तनाव देना मां की रिकवरी को धीमा कर देता है। आयुर्वेद के अनुसार, इस समय मां को चिंता, डर और तनाव से दूर रखना चाहिए क्योंकि इसका सीधा असर दूध बनने की प्रक्रिया पर पड़ता है।
खान-पान की बात करें तो प्रसव के बाद हल्का, सुपाच्य और पौष्टिक भोजन बहुत जरूरी होता है। हरी सब्जियां, दालें, दूध और दूध से बनी चीजें, थोड़ी मात्रा में घी, दलिया, खिचड़ी जैसे भोजन शरीर को ताकत देते हैं और पाचन भी ठीक रखते हैं। आयुर्वेद में मेथी, जीरा, सौंफ, अदरक और शतावरी को बहुत लाभकारी माना गया है। ये न सिर्फ शरीर की कमजोरी दूर करते हैं बल्कि मां के दूध की मात्रा बढ़ाने में भी मदद करते हैं। बहुत ठंडा, बासी या तला-भुना खाना इस समय नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए इससे बचना चाहिए।
शारीरिक देखभाल भी उतनी ही जरूरी है। डिलीवरी के बाद हल्की मालिश, गुनगुने पानी से स्नान और धीरे-धीरे किए गए हल्के व्यायाम शरीर को फिर से संतुलन में लाने में मदद करते हैं। पेट और कमर की मांसपेशियां धीरे-धीरे मजबूत होती हैं और दर्द में भी राहत मिलती है। लेकिन किसी भी तरह की जल्दबाजी या तेज एक्सरसाइज से बचना चाहिए।
अक्सर लोग इस समय मां की भावनाओं को नजरअंदाज कर देते हैं, जो गलत है। हार्मोनल बदलाव के कारण मां को उदासी, चिड़चिड़ापन या थकान महसूस हो सकती है। ऐसे में परिवार का प्यार, समझदारी और सहयोग बहुत मायने रखता है। अगर समय रहते सही देखभाल की जाए तो यह दौर मां और बच्चे दोनों के लिए सुरक्षित और सुखद बन सकता है।
अब बात करें बच्चे की, तो जन्म के तुरंत बाद मां का पहला दूध (कोलोस्ट्रम) बच्चे के लिए अमृत के समान होता है। इसे किसी भी बच्चे को पिलाना चाहिए। पहले छह महीने तक बच्चे को सिर्फ मां का दूध देना सबसे अच्छा माना जाता है। इससे बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और वह स्वस्थ रहता है। बच्चे की साफ-सफाई, गर्माहट और समय-समय पर स्तनपान का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है।
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