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गर्भनाल को फेंकते नहीं हैं लोग, जानें क्या है परंपरा

Ratna Netam
17 July 2026 3:39 PM IST
गर्भनाल को फेंकते नहीं हैं लोग, जानें क्या है परंपरा
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Lifestyle लाइफ स्टाइल : जब एक बच्चा मां के गर्भ में होता है तो वह गर्भनाल यानी एम्बिलिकल कॉर्ड के जरिए मां से जुड़ा रहता है। यही गर्भनाल बच्चे तक पोषण और ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करती है। बच्चे के जन्म के बाद डॉक्टर इस नाल को काटकर अलग कर देते हैं, लेकिन सावधानी के तौर पर इसका कुछ हिस्सा बच्चे की नाभि से जुड़ा रहने दिया जाता है। कुछ सेंटीमीटर दूरी से नाल को काटा जाता है, ताकि संक्रमण का खतरा कम हो सके और बच्चे के शरीर को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।

आमतौर पर जन्म के बाद एक से तीन सप्ताह के अंदर बच्चे की गर्भनाल का बचा हुआ हिस्सा धीरे-धीरे सूखकर अपने आप गिर जाता है। इस दौरान नवजात शिशु की नाभि की विशेष देखभाल की जरूरत होती है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि नाभि वाला हिस्सा हमेशा साफ, सूखा और संक्रमण से सुरक्षित रखा जाए। नाल के सूखने तक माता-पिता को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

जब बच्चे की गर्भनाल पूरी तरह सूखकर अलग हो जाती है तो कई माता-पिता के मन में सवाल आता है कि इसका क्या किया जाए। भारत में इसे लेकर कई तरह की परंपराएं और मान्यताएं देखने को मिलती हैं। कई परिवार इसे सामान्य कचरे की तरह फेंकने के बजाय संभालकर रखते हैं।

पुराने समय से ही कई समुदायों में बच्चे की गर्भनाल को सुरक्षित रखने की परंपरा रही है। कुछ लोग इसे जमीन में दबा देते हैं। इसके पीछे मान्यता है कि मनुष्य का शरीर पंच तत्वों से बना है और प्रकृति से उसका गहरा संबंध होता है। इसलिए बच्चे की गर्भनाल को मिट्टी में दबाने से उसे जीवन में मजबूती, स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा मिलने की मान्यता जुड़ी हुई है।

वहीं कुछ परिवार बच्चे की गर्भनाल को साफ कपड़े में लपेटकर किसी सुरक्षित डिब्बे में घर में रख लेते हैं। उनका मानना होता है कि यह बच्चे के जन्म से जुड़ी एक खास निशानी है, जिसे भविष्य के लिए संभालकर रखा जा सकता है।

कुछ जगहों पर गर्भनाल को ताबीज की तरह बनवाकर रखने की भी परंपरा है। कई लोग इसे सोने, चांदी या तांबे के छोटे लॉकेट में रखकर बच्चे को पहनाते हैं। हालांकि यह पूरी तरह से धार्मिक और पारंपरिक मान्यता पर आधारित होता है।

गर्भनाल को लेकर कई ज्योतिषीय और सांस्कृतिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे बच्चे के भाग्य और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखते हैं। उनका विश्वास है कि गर्भनाल बच्चे के जीवन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है, इसलिए इसे सम्मान के साथ रखा जाना चाहिए।

हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से गर्भनाल जन्म के बाद शरीर का एक जैविक हिस्सा होती है, जो बच्चे के विकास के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसे सुरक्षित रखने या नष्ट करने से बच्चे के स्वास्थ्य पर किसी सीधा प्रभाव का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। लेकिन जन्म के बाद नाभि की सही देखभाल करना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि उस समय संक्रमण का खतरा हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार गर्भनाल के हिस्से को छूने से पहले हाथ साफ करना चाहिए और नाभि को सूखा रखना चाहिए। अगर नाभि से ज्यादा खून आना, बदबू, सूजन या पस जैसी समस्या दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

कुल मिलाकर बच्चे की गर्भनाल को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग परंपराएं और विश्वास मौजूद हैं। कुछ लोग इसे भावनात्मक जुड़ाव और संस्कार के रूप में संभालकर रखते हैं, जबकि चिकित्सा विज्ञान इसे नवजात की देखभाल से जुड़े एक प्राकृतिक हिस्से के रूप में देखता है। सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चे की सुरक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखा जाए।

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