लाइफ स्टाइल

पेरेंट्स ध्यान दें: बच्चों के लिए खाली समय क्यों है बेहद जरूरी

Kanchan Paikara
15 Jun 2026 7:01 PM IST
पेरेंट्स ध्यान दें: बच्चों के लिए खाली समय क्यों है बेहद जरूरी
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बच्चों के जीवन में हर समय व्यस्त रहना ही सफलता की गारंटी नहीं है

Lifestyle लाइफ स्टाइल :आजकल आधुनिक जीवनशैली में पेरेंट्स अपने बच्चों को हर समय किसी न किसी गतिविधि में व्यस्त रखने की कोशिश करते हैं। उनका मानना होता है कि बच्चा जितना ज्यादा सीखता रहेगा और व्यस्त रहेगा, उसका विकास उतना ही बेहतर होगा। इसी सोच के चलते बच्चों का दिन कोचिंग क्लास, स्कूल होमवर्क, स्पोर्ट्स, एक्स्ट्रा एक्टिविटी और स्क्रीन टाइम में पूरी तरह से बंट जाता है।

बच्चों के इस व्यस्त शेड्यूल के बीच उनके पास खुद के लिए समय लगभग नहीं बचता। लगातार पढ़ाई और गतिविधियों के दबाव में कई बार बच्चे मानसिक थकान महसूस करने लगते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए केवल पढ़ाई और एक्टिविटी ही नहीं, बल्कि खाली समय और बोरियत भी उतनी ही जरूरी है।

बाल मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, जब बच्चा बिना किसी निर्देश या दबाव के कुछ समय अकेले बिताता है, तो उसकी कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता विकसित होती है। खाली समय में बच्चा अपने आसपास की चीजों को समझने, नए विचार सोचने और अपनी रुचियों को पहचानने का अवसर पाता है। लेकिन जब हर समय उसका शेड्यूल भरा रहता है, तो यह प्राकृतिक विकास बाधित हो सकता है।

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि हर समय बच्चों को व्यस्त रखने से उनमें तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। लगातार प्रदर्शन करने का दबाव उनके मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। इसके विपरीत, जब बच्चे को कुछ समय बिना किसी गतिविधि के दिया जाता है, तो वह खुद को बेहतर तरीके से समझ पाता है और मानसिक रूप से भी मजबूत बनता है।

आजकल कई पेरेंट्स स्क्रीन टाइम को भी एक सुरक्षित विकल्प मानते हैं, लेकिन अधिक मोबाइल या टीवी का उपयोग बच्चों की सोचने की क्षमता को सीमित कर सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है और बच्चों को वास्तविक दुनिया में खेलने और सोचने का मौका देना चाहिए।

खेलकूद और आउटडोर एक्टिविटी के साथ-साथ बच्चों के लिए अनस्ट्रक्चर्ड टाइम यानी बिना किसी योजना का समय भी जरूरी माना जाता है। इसी समय में बच्चे अपनी रुचियों को खुद खोजते हैं, जैसे ड्रॉइंग, कहानी बनाना या कल्पनाशील खेल खेलना।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के विकास के लिए संतुलन बहुत जरूरी है। न तो उन्हें पूरी तरह खाली छोड़ा जाना चाहिए और न ही हर समय व्यस्त रखा जाना चाहिए। सही विकास तभी संभव है जब पढ़ाई, खेल, आराम और खाली समय के बीच संतुलन बना रहे।

इस प्रकार यह समझना जरूरी है कि बच्चों के जीवन में हर समय व्यस्त रहना ही सफलता की गारंटी नहीं है। बल्कि खाली समय और बोरियत भी उनके मानसिक, भावनात्मक और रचनात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पेरेंट्स को चाहिए कि वे अपने बच्चों को थोड़ी स्वतंत्रता दें ताकि वे खुद को बेहतर तरीके से समझ सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।

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