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पैरेंट्स रहें सावधान: कम उम्र में स्क्रीन एक्सपोजर के खतरे

Kanchan Paikara
27 Jun 2026 5:30 PM IST
पैरेंट्स रहें सावधान: कम उम्र में स्क्रीन एक्सपोजर के खतरे
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Lifestyleलाइफ स्टाइल :आज के डिजिटल दौर में मोबाइल, टैबलेट और टीवी बच्चों की जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं। कई माता-पिता बच्चों को शांत रखने, खाना खिलाने या उन्हें व्यस्त रखने के लिए स्क्रीन का सहारा लेते हैं। थोड़े समय के लिए यह तरीका आसान लग सकता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार कम उम्र के बच्चों के लिए ज्यादा स्क्रीन टाइम उनके विकास पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

एक लैंडमार्क स्टडी में दावा किया गया है कि दो साल से कम उम्र के शिशुओं और छोटे बच्चों के लिए स्क्रीन एक्सपोजर चिंता का विषय हो सकता है। रिसर्च के मुताबिक, इस उम्र में ज्यादा समय तक मोबाइल, टीवी या अन्य स्क्रीन देखने से बच्चों की शारीरिक और मानसिक विकास प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जीवन के शुरुआती साल बच्चों के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान बच्चे अपने आसपास के लोगों से बातचीत करके, खेलकर और चीजों को अनुभव करके ज्यादा सीखते हैं। लेकिन लगातार स्क्रीन देखने की आदत उनके इन प्राकृतिक अनुभवों को कम कर सकती है।
स्टडी के अनुसार, ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों की भाषा सीखने की क्षमता, ध्यान केंद्रित करने की आदत और सामाजिक व्यवहार पर असर डाल सकता है। छोटे बच्चे स्क्रीन पर तेजी से बदलते कंटेंट के आदी हो सकते हैं, जिससे वास्तविक दुनिया की गतिविधियों में उनकी रुचि कम हो सकती है।
डॉक्टर्स और चाइल्ड एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से दूर रखना बेहतर होता है। उनका कहना है कि इस उम्र में माता-पिता के साथ बातचीत, कहानी सुनाना, खेलना और शारीरिक गतिविधियां बच्चों के दिमागी विकास के लिए ज्यादा फायदेमंद होती हैं।
आजकल कई घरों में बच्चों को खाना खिलाने के दौरान मोबाइल दिखाना आम हो गया है। हालांकि, विशेषज्ञ इसे लंबे समय में अच्छी आदत नहीं मानते। उनका कहना है कि बच्चों को खाने, खेलने और सीखने की प्रक्रिया को बिना स्क्रीन के अनुभव करने देना चाहिए।
स्क्रीन टाइम का असर सिर्फ बच्चों के व्यवहार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उनकी नींद और दिनचर्या पर भी प्रभाव डाल सकता है। देर तक स्क्रीन देखने से बच्चों के सोने के पैटर्न में बदलाव आ सकता है, जिससे उनकी सेहत प्रभावित हो सकती है।
पेरेंट्स के लिए जरूरी है कि वे बच्चों के लिए स्क्रीन का इस्तेमाल सोच-समझकर करें। छोटे बच्चों को व्यस्त रखने के लिए मोबाइल देने के बजाय उनके साथ समय बिताना, खेल गतिविधियों में शामिल करना और नई चीजें सिखाना ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है।
बढ़ती टेक्नोलॉजी के बीच बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखना हर परिवार के लिए आसान नहीं है, लेकिन कम उम्र में स्क्रीन की आदत को नियंत्रित करना उनके बेहतर विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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