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पार्टी मिस करने का डर नहीं अब Gen Z ले रही JOMO का मजा

Ratna Netam
11 Sept 2026 3:59 PM IST
पार्टी मिस करने का डर नहीं अब Gen Z ले रही JOMO का मजा
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नई दिल्ली। शुक्रवार की रात हो, दोस्तों की पार्टी का बुलावा हो और सोशल मीडिया पर हर तरफ घूमने-फिरने की तस्वीरें दिखाई दे रही हों। कुछ समय पहले तक ऐसे मौके पर घर बैठे व्यक्ति को लगता था कि वह जिंदगी का कोई महत्वपूर्ण हिस्सा मिस कर रहा है। इसी बेचैनी को **FOMO यानी Fear of Missing Out** कहा गया। लेकिन अब खासकर Gen Z के बीच इसका उल्टा ट्रेंड चर्चा में है—**JOMO यानी Joy of Missing Out**। मतलब किसी पार्टी, ट्रेंड या सोशल मीडिया की हलचल से दूर रहकर भी खुश और संतुष्ट रहना। हाल में यह ट्रेंड फिर तेजी से चर्चा में आया है।
JOMO का मतलब यह नहीं है कि युवा दोस्त बनाना या बाहर जाना छोड़ रहे हैं। इसका मतलब है हर निमंत्रण स्वीकार करने, हर वीकेंड बाहर जाने और हर ऑनलाइन ट्रेंड का हिस्सा बनने के दबाव से खुद को मुक्त करना। कई युवा अब घर पर आराम करने, किताब पढ़ने, पसंदीदा फिल्म या सीरीज देखने, परिवार के साथ रहने या किसी हॉबी को समय देने को भी उतना ही महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
आखिर JOMO क्या है?
JOMO की फुल फॉर्म **Joy of Missing Out** है। आसान भाषा में कहें तो किसी चीज को मिस करने पर परेशान होने के बजाय अपनी पसंद की दूसरी गतिविधि का आनंद लेना JOMO है।
मान लीजिए आपके दोस्त शनिवार रात पार्टी में जा रहे हैं। आपने पार्टी में जाने के बजाय घर पर रहने का फैसला किया। बाद में इंस्टाग्राम पर उनकी तस्वीरें देखकर आपको यह नहीं लगता कि आपने कुछ खो दिया। इसके बजाय आप खुश हैं कि आपको आराम करने, अपनी पसंद का खाना खाने या फिल्म देखने का समय मिला।
यही JOMO है।
शोध में JOMO को सोशल मीडिया इस्तेमाल, आत्म-धारणा और मानसिक स्वास्थ्य के संदर्भ में भी अध्ययन किया गया है। 2023 के एक अध्ययन में इसके जीवन संतुष्टि, माइंडफुलनेस, सोशल मीडिया इस्तेमाल और अन्य मनोवैज्ञानिक पहलुओं से जटिल संबंध पाए गए। यानी JOMO को हर व्यक्ति के लिए अपने आप मानसिक स्वास्थ्य का समाधान मानना सही नहीं होगा।
FOMO और JOMO में क्या अंतर है?
दोनों को एक उदाहरण से आसानी से समझा जा सकता है।
दोस्त पार्टी कर रहे हैं और आप घर पर हैं। अगर आप बार-बार उनका इंस्टाग्राम चेक कर रहे हैं और सोच रहे हैं कि 'काश मैं भी वहां होता', तो यह **FOMO** है।
लेकिन अगर आपने अपनी इच्छा से घर पर रहने का फैसला किया, फोन किनारे रखा और इस बात से खुश हैं कि आज आपको अपने लिए समय मिला, तो यह **JOMO** है।
FOMO में व्यक्ति का ध्यान अक्सर इस बात पर होता है कि दूसरे क्या कर रहे हैं और कहीं वह उनसे पीछे तो नहीं रह गया। JOMO में फोकस अपनी पसंद और वर्तमान समय पर होता है।
Gen Z को क्यों पसंद आ रहा JOMO?
Gen Z ऐसी पीढ़ी है जिसकी जिंदगी का बड़ा हिस्सा इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के बीच बीता है। इंस्टाग्राम, शॉर्ट वीडियो, मैसेजिंग ऐप और लगातार आने वाले नोटिफिकेशन ने कनेक्टेड रहना बेहद आसान बना दिया।
लेकिन लगातार ऑनलाइन रहने का दूसरा पहलू भी है। हर वक्त दूसरे लोगों की छुट्टियां, पार्टियां, उपलब्धियां, नए कपड़े, रिश्ते और लाइफस्टाइल देखने से तुलना का दबाव पैदा हो सकता है।
इसी के जवाब में डिजिटल डिटॉक्स, स्लो लिविंग और JOMO जैसी अवधारणाएं लोकप्रिय हो रही हैं। 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों में Gen Z के बीच शांत वीकेंड, घर पर समय बिताने और लगातार सोशल गतिविधियों से ब्रेक लेने की पसंद को JOMO से जोड़ा गया है।
हर वीकेंड पार्टी जरूरी नहीं
JOMO का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि खाली कैलेंडर को असफल सामाजिक जीवन के रूप में नहीं देखा जाता।
शुक्रवार रात पार्टी नहीं है? कोई समस्या नहीं।
वीकेंड पर घूमने नहीं गए? कोई समस्या नहीं।
किसी वायरल ट्रेंड का हिस्सा नहीं बने? तब भी कोई समस्या नहीं।
यही सोच JOMO को FOMO से अलग करती है। व्यक्ति दूसरों की गतिविधियों के हिसाब से अपनी खुशी तय करने के बजाय खुद तय करता है कि उसे अपना समय कहां लगाना है।
हाल की भारतीय लाइफस्टाइल रिपोर्टों में भी Gen Z के बीच 'quiet nights in' यानी बाहर जाने की जगह घर पर शांत शाम बिताने की पसंद को इस बदलाव का हिस्सा बताया गया है।
सोशल मीडिया से ब्रेक भी JOMO
JOMO केवल पार्टी मिस करने तक सीमित नहीं है। इसका बड़ा हिस्सा डिजिटल दुनिया से भी जुड़ा है।
कुछ समय के लिए इंस्टाग्राम बंद करना, नोटिफिकेशन म्यूट करना, फोन दूसरे कमरे में रख देना या बिना फोटो पोस्ट किए यात्रा का आनंद लेना भी JOMO की भावना का हिस्सा हो सकता है।
2026 में प्रकाशित एक अध्ययन ने JOMO को डिजिटल डिसएंगेजमेंट के प्रति सकारात्मक और स्वेच्छा से अपनाई गई मानसिकता के रूप में देखा। चार अध्ययनों में शोधकर्ताओं ने पाया कि JOMO वाला दृष्टिकोण अधिक डिजिटल वेल-बीइंग, कम सोशल मीडिया इस्तेमाल और अपनी पसंद के अनुरूप व्यवहार करने की भावना से जुड़ा था।
क्या JOMO का मतलब एंटी-सोशल होना है?
नहीं। JOMO का मतलब लोगों से रिश्ते तोड़ना या हमेशा अकेले रहना नहीं है।
अगर कोई व्यक्ति दोस्तों से मिलना चाहता है तो वह मिल सकता है। पार्टी पसंद है तो पार्टी कर सकता है। अंतर केवल इतना है कि वह सामाजिक दबाव के कारण हर गतिविधि में शामिल होने को मजबूर महसूस नहीं करता।
JOMO में व्यक्ति चयन करता है—कहां जाना है, किससे मिलना है और कब अपने लिए समय निकालना है।
मनोवैज्ञानिक व्याख्याओं में भी इसे सामाजिक जीवन समाप्त करने के बजाय अपनी प्राथमिकताओं को चुनने और दूसरों की गतिविधियों को लेकर लगातार चिंतित न रहने से जोड़ा गया है।
'ना' कहना भी बन रहा सेल्फ-केयर
आज के समय में हर जगह मौजूद रहने का दबाव केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है। ऑफिस पार्टी, दोस्तों की मीटिंग, फैमिली फंक्शन, ऑनलाइन ग्रुप, वीडियो कॉल और लगातार मैसेज—इन सबके बीच अपने लिए समय निकालना मुश्किल हो सकता है।
JOMO की सोच कहती है कि हर निमंत्रण पर 'हां' कहना जरूरी नहीं।
अगर कोई व्यक्ति थका हुआ है और बाहर जाने के बजाय आराम करना चाहता है तो बिना अपराधबोध के ऐसा करना भी ठीक है।
इसी वजह से JOMO को सेल्फ-केयर और सीमाएं तय करने की संस्कृति से भी जोड़ा जा रहा है।
पैसा बचाने से भी जुड़ सकता है JOMO
हर वीकेंड बाहर जाने का मतलब केवल समय खर्च करना नहीं है। रेस्टोरेंट, क्लब, कैब, शॉपिंग और ट्रैवल पर पैसा भी खर्च होता है।
ऐसे में घर पर शांत वीकेंड बिताने का फैसला कुछ लोगों के लिए आर्थिक रूप से भी फायदेमंद हो सकता है।
हालांकि JOMO का मूल विचार पैसे बचाना नहीं बल्कि अपनी इच्छा के अनुसार समय बिताना है। अगर कोई केवल खर्च के डर से हर सामाजिक गतिविधि छोड़ रहा है और इससे दुखी है तो उसे JOMO कहना सही नहीं होगा।
JOMO में मुख्य चीज 'Joy' यानी अपने चुनाव से मिलने वाली खुशी और संतुष्टि है।
JOMO को कैसे अपनाया जा सकता है?
इस ट्रेंड को अपनाने के लिए सोशल मीडिया छोड़ना जरूरी नहीं है। शुरुआत छोटी हो सकती है।
रात में कुछ समय फोन से दूर रहना, गैर-जरूरी नोटिफिकेशन बंद करना, हर सोशल प्लान स्वीकार न करना और खाली समय को पहले से किसी पसंदीदा गतिविधि के लिए रखना मददगार हो सकता है।
किताब पढ़ना, खाना बनाना, संगीत सुनना, वॉक करना, परिवार के साथ समय बिताना या बस आराम करना—इनमें से कुछ भी JOMO का हिस्सा बन सकता है।
महत्वपूर्ण यह है कि व्यक्ति अपना समय दूसरों को देखकर नहीं बल्कि अपनी जरूरत और पसंद के आधार पर तय करे।
लेकिन JOMO हर समस्या का इलाज नहीं
JOMO को लेकर एक सावधानी भी जरूरी है। घर पर रहना और सोशल गतिविधियों से दूर होना तभी सकारात्मक है जब यह व्यक्ति की अपनी पसंद हो और उसे संतुष्टि दे।
अगर कोई व्यक्ति सामाजिक चिंता, अकेलेपन या लोगों से मिलने के डर की वजह से लगातार खुद को अलग कर रहा है तो उसे केवल JOMO का नाम देना समस्या को छिपा सकता है।
2023 के शोध में भी JOMO और मानसिक स्वास्थ्य के संबंध पूरी तरह सीधे नहीं पाए गए। उच्च JOMO वाले कुछ प्रतिभागियों में जीवन संतुष्टि ज्यादा थी, लेकिन कुछ आंतरिक मनोवैज्ञानिक कठिनाइयां भी दर्ज हुईं। शोधकर्ताओं ने इसे और अध्ययन की जरूरत वाला विषय बताया।
इसलिए असली JOMO का अर्थ है **चुनकर मिस करना**, न कि डर या मजबूरी में दुनिया से कट जाना।
Gen Z का नया मंत्र—हर चीज में शामिल होना जरूरी नहीं
JOMO का बढ़ता चलन आधुनिक डिजिटल जिंदगी के एक दिलचस्प बदलाव की ओर इशारा करता है। लंबे समय तक सोशल मीडिया ने लोगों के सामने यह भावना पैदा की कि हर समय कुछ न कुछ हो रहा है और अगर वे उसका हिस्सा नहीं हैं तो पीछे रह जाएंगे।
अब इसके उलट सोच लोकप्रिय हो रही है—हर पार्टी में जाना जरूरी नहीं, हर वायरल ट्रेंड पकड़ना जरूरी नहीं और हर समय ऑनलाइन रहना भी जरूरी नहीं।
कभी-कभी फोन को किनारे रखकर घर पर पसंदीदा सीरीज देखना, संगीत सुनना या कुछ न करना भी अच्छा वीकेंड हो सकता है।
यही JOMO की पूरी कहानी है। FOMO पूछता है—**'मैं क्या मिस कर रहा हूं?'** जबकि JOMO कहता है—**'मैंने जो चुना है, उसका आनंद ले रहा हूं।'**
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