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Tourismका नया ट्रेंड: अब बीच और पहाड़ नहीं, तीर्थस्थल बन रहे हैं लोगों की पहली पसंद
Harrison
6 Oct 2025 9:01 PM IST

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Lifestyle,लाइफस्टाइल : कोविड-19 के बाद से दुनियाभर में यात्रा के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव आया है। जहां पहले लोग समंदर के किनारे रिलैक्स करना या पहाड़ों की वादियों में घूमना पसंद करते थे, वहीं अब एक नया ट्रेंड तेजी से उभरकर सामने आया है — धार्मिक पर्यटन। जी हां, अब लोग अपने वीकेंड या छुट्टियों में गोवा और मनाली की बजाय काशी, उज्जैन, अयोध्या, रामेश्वरम जैसे तीर्थस्थलों का रुख कर रहे हैं। यह बदलाव केवल यात्रियों की सोच में नहीं, बल्कि पर्यटन उद्योग की रणनीति में भी नजर आ रहा है। सरकारें भी इसे बढ़ावा देने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश कर रही हैं और धार्मिक स्थलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट किया जा रहा है।
क्यों बढ़ा धार्मिक पर्यटन का आकर्षण?
धार्मिक स्थलों की ओर लोगों का झुकाव अचानक नहीं बढ़ा, इसके पीछे कई वजहें हैं:
1. आध्यात्मिक शांति की तलाश:
कोविड और लॉकडाउन के बाद लोगों ने महसूस किया कि जीवन सिर्फ भौतिक सुख-सुविधाओं तक सीमित नहीं है। मन की शांति और मानसिक संतुलन के लिए लोग अब आध्यात्मिक स्थलों का रुख कर रहे हैं।
2. बदलता कंटेंट और सोशल मीडिया:
सोशल मीडिया पर बनारस की गंगा आरती, महाकाल लोक की दिव्यता या अयोध्या में बनते राम मंदिर की भव्यता के वीडियो वायरल होते हैं, जो युवाओं को भी आकर्षित कर रहे हैं।
3. सुधरता इन्फ्रास्ट्रक्चर:
सरकारों ने काशी कॉरिडोर, उज्जैन महाकाल लोक, केदारनाथ पुनर्निर्माण और अयोध्या विकास परियोजना जैसी योजनाओं से धार्मिक पर्यटन को आधुनिक और सुविधाजनक बनाया है। एयरपोर्ट, सड़कें, होटल और गाइड सेवाएं पहले से कहीं बेहतर हो चुकी हैं।
4. सुरक्षा और संस्कृति का मेल:
धार्मिक पर्यटन स्थलों पर लोगों को न सिर्फ सुरक्षा का भरोसा होता है, बल्कि वे वहां की संस्कृति, भोजन और परंपराओं को भी करीब से जान पाते हैं।
कौन-कौन से तीर्थस्थल बन रहे हैं हॉट डेस्टिनेशन?
■ काशी (वाराणसी):
गंगा आरती, विश्वनाथ धाम कॉरिडोर और ऐतिहासिक घाटों ने वाराणसी को एक ग्लोबल डेस्टिनेशन बना दिया है।
■ उज्जैन:
महाकाल लोक के उद्घाटन के बाद यहां पर्यटकों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है।
■ अयोध्या:
राम मंदिर निर्माण के बाद से अयोध्या देश और विदेश के पर्यटकों की लिस्ट में तेजी से ऊपर चढ़ा है।
■ त्र्यंबकेश्वर, रामेश्वरम, द्वारका, बद्रीनाथ, केदारनाथ जैसे पारंपरिक तीर्थ भी अब पहले से बेहतर सुविधाओं के साथ आकर्षण का केंद्र बने हैं।
टूर पैकेज में बदलाव
पहले जहां टूर ऑपरेटर गोवा, शिमला, लेह-लद्दाख के पैकेज ऑफर करते थे, अब वे "धार्मिक सर्किट टूर", "चार धाम यात्रा", "साउथ इंडिया टेम्पल टूर", "शक्ति पीठ यात्रा" जैसे ऑफर्स लेकर आ रहे हैं।
रेलवे और प्राइवेट ट्रैवल कंपनियां अब IRCTC भारत गौरव ट्रेन जैसे विशेष ट्रेन टूर पैकेज चला रही हैं, जो धार्मिक स्थलों को जोड़ते हैं।
युवाओं में भी बढ़ा रुझान
धार्मिक पर्यटन को लेकर यह धारणा थी कि यह सिर्फ बुजुर्गों की पसंद है, लेकिन अब युवा भी सोशल मीडिया पर 'काशी यात्रा', 'केदारनाथ ट्रेक', 'महाकाल दर्शन' जैसे कंटेंट शेयर कर रहे हैं।
इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर आध्यात्मिक व्लॉग्स और शॉर्ट्स लाखों व्यूज़ बटोर रहे हैं।
भारत में पर्यटन अब केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभव और संस्कृति की खोज बनता जा रहा है। बदलते वक्त के साथ बीच और पहाड़ों की जगह अब धार्मिक स्थल ले रहे हैं, जहां लोग आत्मिक संतुलन, परंपरा और आधुनिक सुविधाओं का एक साथ आनंद उठा रहे हैं।
सरकारों और टूरिज्म सेक्टर के लिए यह एक नई संभावना है, जिसे सही दिशा दी जाए तो यह भारत को ग्लोबल धार्मिक टूरिज्म का केंद्र बना सकता है।
अब घूमने का मतलब है – मन की शांति, संस्कृति से जुड़ाव और आत्मिक अनुभव।
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