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लाइफ स्टाइल
गोवर्धन यात्रा में जरूर घूमें ये 5 खास स्थान, जानें इनकी महिमा
Ratna Netam
8 Nov 2026 5:22 PM IST

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मथुरा। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ी ब्रजभूमि में गोवर्धन पर्वत का विशेष धार्मिक महत्व है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु मथुरा के गोवर्धन पहुंचकर गिरिराज महाराज की परिक्रमा करते हैं। विशेष रूप से गोवर्धन पूजा, पूर्णिमा और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां भक्तों की भीड़ देखने को मिलती है। मान्यता है कि गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यदि आप भी गोवर्धन परिक्रमा करने की योजना बना रहे हैं, तो परिक्रमा मार्ग से जुड़े पांच प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन अपनी यात्रा को और यादगार बना सकते हैं।गोवर्धन परिक्रमा लगभग 21 किलोमीटर लंबी मानी जाती है। श्रद्धालु अपनी आस्था और शारीरिक क्षमता के अनुसार पैदल परिक्रमा करते हैं। कुछ भक्त दंडवत परिक्रमा भी करते हैं। यात्रा के दौरान रास्ते में अनेक मंदिर, कुंड और धार्मिक स्थल आते हैं, जिनका संबंध भगवान श्रीकृष्ण और ब्रज की धार्मिक परंपराओं से है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाया था। इसी घटना की स्मृति में गोवर्धन पूजा और गिरिराज पर्वत की आराधना की जाती है।
1. दानघाटी मंदिर
गोवर्धन यात्रा के दौरान दानघाटी मंदिर प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण की दान लीला से जुड़ा हुआ माना जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण अपने सखाओं के साथ गोपियों से दान मांगने की लीला किया करते थे।मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां गिरिराज महाराज के प्रति विशेष श्रद्धा देखने को मिलती है। कई भक्त अपनी परिक्रमा की शुरुआत इस क्षेत्र से करते हैं।दानघाटी मंदिर के आसपास धार्मिक सामग्री और पूजा की वस्तुओं की दुकानें भी मिलती हैं। श्रद्धालु यहां दर्शन कर अपनी यात्रा को आगे बढ़ाते हैं।
2. मानसी गंगा
मानसी गंगा गोवर्धन के प्रमुख पवित्र जलाशयों में से एक है। यह स्थान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मन से गंगा का प्राकट्य किया था, इसलिए इसे मानसी गंगा कहा जाता है।मानसी गंगा के आसपास कई धार्मिक स्थल और घाट स्थित हैं। श्रद्धालु यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और जलाशय के दर्शन करते हैं।मानसी गंगा का धार्मिक महत्व ब्रज की प्राचीन परंपराओं से जुड़ा है। गोवर्धन यात्रा पर आने वाले भक्त इस स्थान को विशेष श्रद्धा के साथ देखते हैं।
3. राधाकुंड और श्यामकुंड
राधाकुंड और श्यामकुंड गोवर्धन क्षेत्र के अत्यंत पवित्र धार्मिक स्थलों में शामिल हैं। इन दोनों कुंडों का संबंध भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की लीलाओं से माना जाता है।वैष्णव परंपरा में राधाकुंड का विशेष महत्व है। यहां आने वाले श्रद्धालु राधारानी और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इन कुंडों के दर्शन से भक्तों को आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।राधाकुंड क्षेत्र में अनेक मंदिर और आश्रम स्थित हैं। गोवर्धन परिक्रमा के दौरान यहां रुककर दर्शन करना भक्तों के लिए विशेष अनुभव होता है। धार्मिक परंपराओं में राधाकुंड और श्यामकुंड को प्रेम और भक्ति के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
4. कुसुम सरोवर
कुसुम सरोवर गोवर्धन के सबसे सुंदर और प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। यह स्थान अपनी ऐतिहासिक वास्तुकला, शांत वातावरण और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है।कुसुम सरोवर के किनारे बनी भव्य छतरियां और पत्थरों की नक्काशी पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। इस स्थान का संबंध राधा-कृष्ण की लीलाओं से भी माना जाता है।धार्मिक कथाओं के अनुसार, राधारानी और उनकी सखियां इस क्षेत्र में पुष्प एकत्र करने आती थीं। इसी कारण इसका नाम कुसुम सरोवर पड़ा, ऐसी मान्यता है।गोवर्धन परिक्रमा के दौरान श्रद्धालु यहां कुछ समय रुककर प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक वातावरण का अनुभव कर सकते हैं। यह स्थान फोटोग्राफी और ऐतिहासिक स्थापत्य में रुचि रखने वाले यात्रियों के बीच भी लोकप्रिय है।
5. पूंछरी का लौठा
पूंछरी का लौठा गोवर्धन परिक्रमा मार्ग का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह स्थान गिरिराज पर्वत के अंतिम छोर के निकट स्थित है और ब्रज की धार्मिक मान्यताओं में विशेष स्थान रखता है।इस स्थान का संबंध भगवान श्रीकृष्ण के भक्त से जुड़ी लोककथाओं से बताया जाता है। श्रद्धालु यहां दर्शन कर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।पूंछरी का लौठा क्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़े अन्य धार्मिक स्थल भी मौजूद हैं। परिक्रमा करने वाले भक्तों के लिए यह एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है।
गोवर्धन परिक्रमा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
गोवर्धन परिक्रमा के लिए निकलते समय श्रद्धालुओं को अपनी शारीरिक क्षमता और मौसम का विशेष ध्यान रखना चाहिए। लगभग 21 किलोमीटर की यात्रा पूरी करने में कई घंटे लग सकते हैं। इसलिए आरामदायक कपड़े पहनें और पर्याप्त पानी साथ रखें।बुजुर्गों, बच्चों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों वाले लोगों को यात्रा से पहले अपनी स्थिति के अनुसार योजना बनानी चाहिए। भीड़भाड़ वाले दिनों में प्रशासन द्वारा जारी यातायात और सुरक्षा निर्देशों का पालन करना भी जरूरी है।परिक्रमा मार्ग पर धार्मिक स्थलों की स्वच्छता बनाए रखें और कुंडों में स्नान करते समय स्थानीय नियमों तथा सुरक्षा संबंधी निर्देशों का ध्यान रखें।
इन पांच स्थानों से खास बनेगी यात्रा
गोवर्धन परिक्रमा केवल पैदल यात्रा नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और ब्रज की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर भी है। दानघाटी मंदिर, मानसी गंगा, राधाकुंड-श्यामकुंड, कुसुम सरोवर और पूंछरी का लौठा जैसे पवित्र स्थल इस यात्रा को धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से विशेष बनाते हैं।
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