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Mohinder Singh Randhawa : विज्ञान और हरित सोच के पथप्रदर्शक

Harrison
2 Feb 2026 7:32 PM IST
Mohinder Singh Randhawa : विज्ञान और हरित सोच के पथप्रदर्शक
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Lifestyle, लाइस्टाइल : 2 फरवरी 1909 को जन्मे मोहिंदर सिंह रंधावा का नाम भारतीय प्रशासन और कृषि सुधार के क्षेत्र में हमेशा याद रखा जाएगा। उन्हें सिर्फ एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में ही नहीं बल्कि प्रकृति प्रेमी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले समाज सुधारक के रूप में भी जाना जाता है। रंधावा ने अपने कार्यकाल में न केवल प्रशासनिक सुधार किए बल्कि भारत के कृषि और पर्यावरणीय दृष्टिकोण को भी नई दिशा दी।
मोहिंदर सिंह रंधावा का मानना था कि शहर केवल इमारतों और सड़कें बनाने से नहीं बनता, बल्कि पेड़-पौधों और फूलों की हरियाली से भी जीवन्त और सुंदर बनता है। यही विचार उन्होंने अपने कार्यों में अपनाया। उनके प्रशासनिक कार्यों में हरियाली को बढ़ावा देना और सार्वजनिक स्थलों को सजाना एक प्रमुख लक्ष्य था। पंजाब में उन्होंने कई ऐसे पार्क, बाग और औद्योगिक क्षेत्रों में हरित पट्टियाँ विकसित कीं, जिससे शहरों में रहने वालों का जीवन स्तर सुधरा।
रंधावा का योगदान केवल शहरी हरितकरण तक सीमित नहीं था। वे कृषि सुधारों के अग्रदूत भी थे। हरित क्रांति के आने से पहले ही उन्होंने पंजाब में नई कृषि तकनीकों और फसलों के प्रयोग को बढ़ावा दिया। उनके प्रयासों के कारण पंजाब की कृषि उत्पादन क्षमता में सुधार हुआ और किसानों को नई तकनीकों से परिचित कराया गया। यही कारण है कि उन्हें “पंजाब की छठी नदी” के रूप में भी सम्मानित किया गया।
उनकी वैज्ञानिक सोच ने उन्हें यह समझने में मदद की कि विकास केवल औद्योगिकीकरण या प्रशासनिक नीतियों तक सीमित नहीं होना चाहिए। पर्यावरण और कृषि में सुधार भी राष्ट्र की प्रगति के लिए आवश्यक हैं। रंधावा ने कई रिपोर्टों और अध्ययन के माध्यम से प्रशासन को यह सुझाव दिया कि शहरों और गाँवों में वृक्षारोपण और फसल विज्ञान पर ध्यान देना जरूरी है।
उनके जीवन की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे हमेशा आधुनिक सोच और प्रकृति प्रेम को संतुलित रखते थे। उन्होंने शहरी विकास और औद्योगिकीकरण के दौर में भी प्रकृति की अहमियत को कभी नहीं भूला। उनके प्रयासों का प्रत्यक्ष प्रमाण आज भी पंजाब और अन्य राज्यों में देखा जा सकता है, जहाँ सार्वजनिक बाग-बगिचों, हरित क्षेत्रों और आधुनिक कृषि तकनीकों की विरासत आज भी मौजूद है।
रंधावा ने यह भी समझाया कि शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से लोग अपने आस-पास की प्रकृति और कृषि की देखभाल करना सीख सकते हैं। उन्होंने कई युवा कार्यक्रमों और प्रशिक्षण सत्रों की भी शुरुआत की, जिनमें बच्चों और युवाओं को पौधारोपण, जल संरक्षण और सतत कृषि तकनीकों से परिचित कराया गया।
आज, 2 फरवरी के दिन उनके जन्मदिन पर, हम न केवल एक महान प्रशासनिक अधिकारी और कृषि वैज्ञानिक को याद कर रहे हैं, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व को भी याद कर रहे हैं जिन्होंने यह साबित किया कि विज्ञान, प्रकृति और प्रशासन का सही मिश्रण समाज और राष्ट्र को समृद्ध बना सकता है। मोहिंदर सिंह रंधावा की जीवनदृष्टि आज भी प्रेरणा देती है, यह संदेश देती है कि विकास केवल भवनों और सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि हरियाली, कृषि और पर्यावरण के संरक्षण में भी निहित है।
उनकी उपलब्धियों और विचारों को युवा पीढ़ी के बीच फैलाने की आवश्यकता है ताकि आने वाले समय में भी उनके जैसे विचारशील और हरित सोच वाले नेतृत्व को सम्मान मिल सके। मोहिंदर सिंह रंधावा ने यह सिद्ध कर दिया कि हरित शहर और समृद्ध कृषि प्रणाली केवल सपना नहीं, बल्कि सही प्रयास और नीतियों से वास्तविकता बन सकती है।
उनकी याद में आज कई पर्यावरण और कृषि संगठनों द्वारा विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस अवसर पर विशेषज्ञों और युवाओं को उनके योगदान के बारे में बताया जाता है और उनके कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाता है।
मोहिंदर सिंह रंधावा का जीवन यह संदेश देता है कि प्रशासन, विज्ञान और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित करके समाज और राष्ट्र को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है। उनका योगदान आज भी भारतीय समाज के लिए प्रेरणा स्रोत है।
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