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रक्तदान को लेकर लोगों की गलतफहमियां और सच्चाई

Nousheen
13 Jun 2026 4:17 PM IST
रक्तदान को लेकर लोगों की गलतफहमियां और सच्चाई
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यह एक छोटा-सा स्टेप हर साल अनगिनत लोगों की जिंदगी बचाता है।

Lifestyle लाइफ स्टाइल : रक्तदान को लेकर समाज में आज भी कई तरह की गलतफहमियां देखने को मिलती हैं। हालांकि डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि रक्तदान एक सुरक्षित प्रक्रिया है और इसे “महादान” इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह हर साल लाखों लोगों की जान बचाने में मदद करता है। वर्ल्ड ब्लड डोनर डे के मौके पर विशेषज्ञों ने लोगों को रक्तदान से जुड़े सवालों और भ्रांतियों के बारे में सही जानकारी दी है।

डॉक्टरों के अनुसार सबसे आम गलतफहमी यह है कि रक्तदान करने से शरीर में कमजोरी आ जाती है। इस धारणा को पूरी तरह गलत बताया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक स्वस्थ व्यक्ति जब रक्तदान करता है, तो शरीर कुछ ही दिनों में नई रक्त कोशिकाएं बना लेता है और सामान्य स्थिति में लौट आता है। इसलिए रक्तदान से लंबे समय तक कमजोरी होने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि रक्तदान करने से पहले व्यक्ति की स्वास्थ्य जांच की जाती है। यदि किसी व्यक्ति का हीमोग्लोबिन स्तर, ब्लड प्रेशर या अन्य स्वास्थ्य मानक सही नहीं होते, तो उसे रक्तदान करने की अनुमति नहीं दी जाती। इसका उद्देश्य दाता की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।

एक अन्य मिथक यह भी है कि रक्तदान करने से शरीर में खून की कमी स्थायी रूप से हो जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि शरीर में रक्त का निर्माण एक निरंतर प्रक्रिया है और सामान्य स्थिति में 24 से 48 घंटे के भीतर तरल भाग (प्लाज्मा) की भरपाई हो जाती है, जबकि लाल रक्त कोशिकाओं को पूरी तरह ठीक होने में कुछ दिन लगते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार रक्तदान केवल प्राप्तकर्ता के लिए ही नहीं बल्कि दाता के लिए भी कुछ मामलों में लाभकारी हो सकता है। नियमित अंतराल पर रक्तदान करने से शरीर में आयरन का संतुलन बना रहता है और नए रक्त के निर्माण की प्रक्रिया सक्रिय रहती है। हालांकि यह लाभ हर व्यक्ति के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।

डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया है कि रक्तदान से संक्रमण का कोई खतरा नहीं होता, क्योंकि हर बार नई और स्टरलाइज्ड सुइयों का उपयोग किया जाता है। पूरी प्रक्रिया मेडिकल मानकों के अनुसार की जाती है, जिससे सुरक्षा सुनिश्चित रहती है।

वर्ल्ड ब्लड डोनर डे के अवसर पर स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अधिक लोग आगे आकर नियमित रूप से रक्तदान करें, तो देश में रक्त की कमी की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

रक्तदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर देते हुए डॉक्टरों ने कहा कि यह एक सरल, सुरक्षित और जीवन बचाने वाली प्रक्रिया है। इसे लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना समय की जरूरत है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस महादान में भाग ले सकें और जरूरतमंदों की जान बचाई जा सके।

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