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पुरुषों को भी हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर, जानें लक्षण
Rajeshwari Nishad
24 Oct 2026 3:18 PM IST

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लाइफ स्टाइल : ब्रेस्ट कैंसर का नाम सुनते ही अधिकतर लोगों के दिमाग में महिलाओं से जुड़ी बीमारी की तस्वीर सामने आती है। आमतौर पर माना जाता है कि स्तन कैंसर केवल महिलाओं को होता है, लेकिन यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पुरुषों को भी ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है। हालांकि, महिलाओं की तुलना में पुरुषों में यह बीमारी काफी दुर्लभ है। पुरुषों में भी स्तन ऊतक मौजूद होते हैं और इन्हीं ऊतकों की कोशिकाओं में कैंसर विकसित हो सकता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि जानकारी के अभाव में कई पुरुष इसके शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी की पहचान देर से होती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पुरुषों में छाती के आसपास गांठ बनना ब्रेस्ट कैंसर का सबसे आम लक्षण है। इसके अलावा निप्पल से खून मिला स्राव निकलना, निप्पल का अंदर की तरफ मुड़ना, त्वचा के रंग या बनावट में बदलाव और बगल में गांठ भी चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। हालांकि, हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन किसी भी असामान्य बदलाव की जांच कराना जरूरी है।
पुरुषों में कैसे होता है ब्रेस्ट कैंसर?
पुरुषों के शरीर में भी जन्म से स्तन ऊतक मौजूद होते हैं। महिलाओं की तुलना में ये ऊतक कम विकसित होते हैं, लेकिन इनमें भी दूध की नलिकाओं से संबंधित कोशिकाएं होती हैं।
जब इन कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि शुरू हो जाती है और उनका विभाजन अनियंत्रित होने लगता है, तो कैंसर विकसित हो सकता है। पुरुषों में सबसे सामान्य प्रकार डक्टल कार्सिनोमा होता है, जो स्तन की नलिकाओं से शुरू होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पुरुषों में स्तन कैंसर के मामले कुल ब्रेस्ट कैंसर मामलों का लगभग एक प्रतिशत होते हैं। यही वजह है कि इस बीमारी को लेकर जागरूकता अपेक्षाकृत कम है।
छाती में गांठ होना सबसे आम लक्षण
पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर का सबसे प्रमुख संकेत छाती में गांठ का बनना है। यह गांठ अक्सर निप्पल के आसपास या उसके ठीक नीचे महसूस हो सकती है।
कई बार गांठ में दर्द नहीं होता, इसलिए लोग इसे मामूली सूजन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। कुछ मामलों में गांठ धीरे-धीरे आकार में बढ़ सकती है।
डॉक्टरों के अनुसार, यदि छाती में नई गांठ दिखाई दे या पहले से मौजूद गांठ का आकार बदलने लगे, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
छाती में गांठ बनने की दूसरी वजहें भी हो सकती हैं, जिनमें गाइनेकोमास्टिया जैसी गैर-कैंसरकारी स्थिति शामिल है। इसलिए जांच के बिना किसी गांठ को कैंसर मान लेना सही नहीं है।
निप्पल में बदलाव भी हो सकता है चेतावनी का संकेत
पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के दौरान निप्पल और आसपास की त्वचा में बदलाव दिखाई दे सकते हैं।
कुछ लोगों में निप्पल अंदर की ओर खिंचने लगता है। इसके अलावा निप्पल से खून या अन्य असामान्य तरल पदार्थ निकलना भी चिंता का विषय हो सकता है।
छाती की त्वचा पर लालिमा, पपड़ी बनना, घाव होना या त्वचा का सिकुड़ना भी संभावित लक्षण हैं।
कभी-कभी बगल के पास लिम्फ नोड्स में सूजन दिखाई दे सकती है। ऐसे किसी भी बदलाव को नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
किन पुरुषों में ज्यादा रहता है खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। अधिकतर मामले 60 से 70 वर्ष की उम्र के आसपास सामने आते हैं, लेकिन यह बीमारी कम उम्र में भी हो सकती है।
इसके अलावा परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास होना भी जोखिम बढ़ा सकता है। जिन पुरुषों के परिवार में माता, बहन या अन्य करीबी रिश्तेदार को ब्रेस्ट कैंसर रहा हो, उन्हें विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
बीआरसीए-1 और बीआरसीए-2 जैसे जीन में विरासत में मिले हानिकारक बदलाव भी जोखिम बढ़ा सकते हैं। खासकर बीआरसीए-2 से जुड़े आनुवंशिक बदलाव पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर के महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में शामिल हैं।
मोटापा, शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का अधिक स्तर, कुछ लिवर संबंधी बीमारियां और छाती पर पहले रेडिएशन थेरेपी लेना भी जोखिम बढ़ा सकते हैं।
बीमारी की पहचान कैसे होती है?
पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर की आशंका होने पर डॉक्टर सबसे पहले शारीरिक जांच करते हैं। इसमें छाती, निप्पल और बगल के आसपास किसी गांठ या असामान्य बदलाव की जांच की जाती है।
इसके बाद जरूरत के अनुसार अल्ट्रासाउंड या मैमोग्राफी कराने की सलाह दी जा सकती है। यदि जांच में संदिग्ध गांठ दिखाई देती है, तो बायोप्सी की जाती है।
बायोप्सी में गांठ से ऊतक का नमूना लेकर प्रयोगशाला में जांच की जाती है। इससे पता चलता है कि संबंधित कोशिकाएं कैंसरयुक्त हैं या नहीं।
कैंसर की पुष्टि होने के बाद उसकी अवस्था और प्रकार का पता लगाने के लिए अन्य जांचें की जा सकती हैं।
क्या पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर का इलाज संभव है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर का इलाज संभव है। इलाज का चुनाव कैंसर के प्रकार, उसकी अवस्था, शरीर में फैलाव और मरीज की स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर किया जाता है।
कई मामलों में सर्जरी के जरिए कैंसरयुक्त ऊतक हटाए जाते हैं। इसके अलावा रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी, हार्मोन थेरेपी और टारगेटेड थेरेपी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
शुरुआती अवस्था में बीमारी की पहचान होने से उपचार के बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए किसी भी संदिग्ध लक्षण की जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।
पुरुष कैसे रखें अपनी सेहत का ध्यान?
विशेषज्ञों के अनुसार, पुरुषों को भी छाती में होने वाले बदलावों के प्रति जागरूक रहना चाहिए। यदि अचानक गांठ, सूजन, निप्पल में बदलाव या असामान्य स्राव दिखाई दे, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
स्वस्थ वजन बनाए रखना, नियमित शारीरिक गतिविधियां करना और संतुलित भोजन लेना समग्र स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है। जिन पुरुषों के परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास है, उन्हें डॉक्टर से आनुवंशिक परामर्श के बारे में चर्चा करनी चाहिए।
आमतौर पर बिना लक्षण वाले सभी पुरुषों के लिए नियमित ब्रेस्ट कैंसर स्क्रीनिंग की सिफारिश नहीं की जाती। हालांकि, अधिक जोखिम वाले व्यक्तियों को डॉक्टर व्यक्तिगत जांच और निगरानी की सलाह दे सकते हैं।
जागरूकता से समय पर हो सकती है पहचान
पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर दुर्लभ जरूर है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। अक्सर जानकारी की कमी या संकोच के कारण पुरुष छाती में होने वाले बदलावों के बारे में खुलकर बात नहीं करते।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेस्ट कैंसर को केवल महिलाओं से जुड़ी बीमारी मानने की सोच बदलने की जरूरत है।
छाती में गांठ, निप्पल से खून निकलना या त्वचा में असामान्य बदलाव जैसे संकेत दिखाई देने पर तुरंत जांच कराना महत्वपूर्ण है। समय पर पहचान और उचित उपचार से मरीज के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।
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