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लाइफ स्टाइल
56 की उम्र में भी फिट हैं मनीषा कोइराला, कैंसर को मात देकर बदली जिंदगी
Rajeshwari Nishad
5 Oct 2026 1:09 PM IST

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Life style लाइफ स्टाइल। जिंदगी जब इंसान को सबसे कठिन परीक्षा के सामने खड़ा कर देती है, तब उसी वक्त उसकी असली ताकत भी सामने आती है। बॉलीवुड अभिनेत्री मनीषा कोइराला की कहानी इसी जज्बे की मिसाल है। 1990 के दशक में अपनी खूबसूरती, मासूमियत और दमदार अभिनय से लाखों दिलों पर राज करने वाली मनीषा ने जिंदगी का ऐसा दौर भी देखा, जब बीमारी ने उन्हें मौत के बेहद करीब पहुंचा दिया था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज वही मनीषा 56 साल की उम्र में भी अपनी फिटनेस, आत्मविश्वास और सक्रिय जीवनशैली से लोगों को प्रेरित कर रही हैं।
मनीषा कोइराला की जिंदगी में साल 2012 ऐसा मोड़ लेकर आया, जिसने उनकी सोच और प्राथमिकताओं को हमेशा के लिए बदल दिया। उन्हें स्टेज-4 ओवेरियन कैंसर का पता चला था। यह खबर उनके लिए किसी सदमे से कम नहीं थी। मनीषा ने बाद में बताया कि उस समय उन्हें लगा था कि शायद वह नहीं बच पाएंगी। इलाज के लिए वह न्यूयॉर्क गईं, जहां मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर में उनका उपचार हुआ। सर्जरी और कीमोथेरेपी के लंबे दौर के बाद 30 अप्रैल 2013 को उनका आखिरी कीमोथेरेपी सत्र हुआ और उन्हें कैंसर-मुक्त घोषित किया गया।
कैंसर से उबरने के बाद मनीषा की जिंदगी का नजरिया काफी बदल गया। बीमारी ने उन्हें यह समझने का मौका दिया कि स्वास्थ्य और मानसिक शांति कितनी जरूरी है। उन्होंने अपने अनुभव को छिपाने के बजाय लोगों के सामने रखा और कैंसर के बाद की जिंदगी, डर और भावनात्मक संघर्ष के बारे में भी खुलकर बात की। अगस्त 2026 में उन्होंने उस दौर को याद करते हुए बताया था कि कैंसर की खबर मिलने के बाद की एक रात उनके जीवन की सबसे अकेली और लंबी रातों में से थी।
अब 56 की उम्र में उनकी फिटनेस एक बार फिर चर्चा में है। अक्टूबर 2026 में साझा किए गए एक वर्कआउट वीडियो में मनीषा योग स्ट्रेचिंग, मोबिलिटी एक्सरसाइज और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करती दिखाई दीं। उनके रूटीन में कैट-काउ पोज, थ्रेड-द-नीडल स्ट्रेच और लंज जैसी एक्सरसाइज शामिल थीं। इसके बाद उन्होंने छोटे डंबल के साथ लंज, लेटरल लेग मूवमेंट, लेग रेज और लेग सर्कल भी किए। इससे पता चलता है कि उनकी ट्रेनिंग का फोकस सिर्फ वजन कम करने पर नहीं, बल्कि शरीर की गतिशीलता, ताकत और स्थिरता पर भी है।
5 अक्टूबर 2026 को सामने आए एक और वर्कआउट वीडियो में मनीषा अपर-बॉडी ट्रेनिंग करती दिखीं। इस दौरान उन्होंने लैट पुलडाउन, केबल बाइसेप कर्ल, ओवरहेड ट्राइसेप एक्सटेंशन, डंबल बाइसेप कर्ल, लेटरल रेज और असिस्टेड पुल-अप्स किए। 56 की उम्र में इस तरह का नियमित स्ट्रेंथ वर्कआउट उनकी फिटनेस के प्रति गंभीरता दिखाता है। उनके मौजूदा रूटीन में शरीर के अलग-अलग हिस्सों की ताकत और सहनशक्ति पर काम करने की कोशिश साफ नजर आती है।
मनीषा के फिटनेस सफर का सबसे खास पहलू यह है कि वह उम्र से लड़ने के बजाय अपने शरीर को समझने पर जोर देती दिखाई देती हैं। उन्होंने अपने वेलनेस सफर के बारे में बात करते हुए कहा है कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर में बदलाव आते हैं और हर बदलाव को सिर्फ वजन के पैमाने से नहीं मापा जाना चाहिए। उनके लिए फिटनेस का मतलब शरीर को मजबूत रखना, सक्रिय रहना और बेहतर तरीके से जिंदगी जीना है।
उनकी कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि बॉलीवुड में खूबसूरती को अक्सर उम्र से जोड़कर देखा जाता है। मनीषा ने अपनी यात्रा से यह साबित किया है कि उम्र बढ़ना किसी व्यक्ति की पहचान या आत्मविश्वास को सीमित नहीं करता। आज उनके चेहरे पर नजर आने वाली चमक और उनके व्यक्तित्व का आत्मविश्वास सिर्फ बाहरी खूबसूरती का हिस्सा नहीं, बल्कि उस लंबे सफर का परिणाम भी है जिसमें उन्होंने दर्द, इलाज और दोबारा खड़े होने के अनुभव को जिया है।
मनीषा का करियर भी उनकी वापसी की कहानी का अहम हिस्सा है। फिल्मों से अपनी पहचान बनाने के बाद उन्होंने डिजिटल माध्यम में भी काम किया और नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से उबरने के बाद उनका दोबारा अभिनय की दुनिया में सक्रिय होना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। मेमोरियल स्लोन केटरिंग के अनुसार, वह इलाज के बाद फिर से सक्रिय जीवन में लौटीं और वर्षों से कैंसर रिमिशन में रहते हुए यात्रा और अन्य गतिविधियों में हिस्सा लेती रही हैं।
आज जब 56 की उम्र में मनीषा जिम, योग, मोबिलिटी और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाए हुए हैं, तो उनकी कहानी सिर्फ ग्लैमर या फिटनेस की खबर नहीं रह जाती। यह उस इंसान की कहानी बन जाती है जिसने जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर का सामना किया और फिर खुद को दोबारा खड़ा किया। उनकी फिट बॉडी और चेहरे की चमक की चर्चा जरूर होती है, लेकिन उनकी असली खूबसूरती उस हिम्मत में है जिसने उन्हें बीमारी के बाद फिर से जिंदगी को पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनाने की ताकत दी।
मनीषा कोइराला की यात्रा उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो किसी कठिन दौर से गुजर रहे हैं। उनकी कहानी बताती है कि मुश्किलें हमेशा अंत नहीं होतीं। कई बार वही मुश्किलें जिंदगी के एक नए अध्याय की शुरुआत करती हैं। 56 की उम्र में उनका सक्रिय और अनुशासित जीवन इसी बात का सबूत है कि जिंदगी की खूबसूरती उम्र नहीं, बल्कि हौसला, आत्मविश्वास और खुद को दोबारा संभालने की क्षमता तय करती है।
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