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लाइफ स्टाइल : आंवले का खट्टा और थोड़ा कसैला स्वाद हर किसी को पसंद नहीं आता। खासकर बच्चे इसे सीधे खाने से अक्सर बचते हैं। लेकिन इसी आंवले को मीठे और चटपटे स्वाद वाली कैंडी में बदलकर परोसा जाए तो यह एक दिलचस्प विकल्प बन सकता है। बाजार में मिलने वाली मसाला कैंडी की तरह इसे घर पर भी तैयार किया जा सकता है। इसके लिए आंवला, चीनी और रसोई में उपलब्ध कुछ सामान्य मसालों की जरूरत होती है। कैंडी बनाते समय मिठास, खटास और मसालों का संतुलन अपनी पसंद के अनुसार रखा जा सकता है।
घर पर आंवला कैंडी बनाने का फायदा यह है कि आप उसके स्वाद और सामग्री को खुद तय कर सकते हैं। बच्चों के लिए इसे हल्का मीठा और कम मसालेदार रखें, जबकि बड़ों के लिए काला नमक, भुना जीरा और काली मिर्च का स्वाद थोड़ा बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, कैंडी तैयार होने में कुछ समय लगता है। आंवले को पकाने, चीनी में रखने और अच्छी तरह सुखाने की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। जल्दबाजी में तैयार की गई कैंडी में नमी बच सकती है, जिससे उसका स्वाद और भंडारण प्रभावित हो सकता है।
लगभग आधा किलो आंवला कैंडी के लिए 500 ग्राम ताजे आंवले और 300 से 400 ग्राम चीनी लें। मसाले के लिए एक छोटा चम्मच भुना जीरा पाउडर, आधा छोटा चम्मच काला नमक और एक चौथाई छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर रख सकते हैं। सामान्य नमक जरूरत के अनुसार बहुत कम मात्रा में मिलाएं। चाहें तो एक चौथाई छोटा चम्मच सोंठ पाउडर भी लें। ये शुरुआती अनुपात हैं; मसाला मिलाते समय पहले थोड़ी मात्रा डालकर स्वाद देखें। बच्चों के हिस्से में काली मिर्च और सोंठ छोड़ भी सकते हैं।
सबसे पहले आंवलों को अच्छी तरह धो लें। खराब, कटे या नरम पड़े आंवलों को अलग कर दें। इसके बाद एक बर्तन में पानी गर्म करें और आंवले डालकर धीमी से मध्यम आंच पर पकाएं। लगभग आठ से दस मिनट बाद एक आंवला निकालकर देखें। उसकी फांकें आसानी से अलग होने लगें तो आंच बंद कर दें। पकने का समय आंवले के आकार और सख्ती के अनुसार बदल सकता है। इन्हें इतना ज्यादा न उबालें कि गूदा गलने लगे। कैंडी के लिए फांकों का आकार बना रहना जरूरी है।
उबले आंवलों का पानी निकाल दें और उन्हें ठंडा होने दें। फिर हल्के दबाव से फांकें अलग करें और बीच की गुठली हटा दें। यदि बच्चों के लिए छोटे टुकड़े चाहिए तो फांकों को काट सकते हैं। तैयार टुकड़ों को साफ, सूखे बर्तन में रखें। अब इनके ऊपर चीनी डालें और धीरे से मिला दें। बर्तन ढककर फ्रिज में रखें। अगले दिन तक चीनी घुलने लगेगी और आंवले के साथ चाशनी बन जाएगी। बीच में साफ, सूखे चम्मच से मिश्रण को हल्के हाथ से चला सकते हैं।
आंवले की फांकों को लगभग दो दिन चीनी के साथ फ्रिज में रखा जा सकता है, ताकि उनमें मिठास समा जाए। इसके बाद छलनी की मदद से चाशनी अलग कर लें। फांकों को कुछ देर छलनी में ही रहने दें, जिससे अतिरिक्त चाशनी निकल जाए। फिर उन्हें साफ ट्रे पर एक परत में फैलाएं। टुकड़े एक-दूसरे के ऊपर रखने से वे बराबर नहीं सूखेंगे। ट्रे पर बहुत ज्यादा चाशनी जमा हो तो फांकें दूसरी सूखी ट्रे में रख दें। इस चरण में सफाई और अतिरिक्त तरल निकालने पर ध्यान दें।
अब फांकों को धूल और कीड़ों से सुरक्षित रखते हुए सुखाएं। धूप में सुखा रहे हैं तो खाने के लिए उपयुक्त जालीदार कवर इस्तेमाल करें। शाम होने से पहले ट्रे अंदर रख लें। मौसम में नमी अधिक हो या पर्याप्त धूप न मिले तो फूड डिहाइड्रेटर का इस्तेमाल उसके निर्देशों के अनुसार किया जा सकता है। सुखाने का समय मौसम और टुकड़ों के आकार पर निर्भर करेगा। फांकें बाहर से सूखी हों, अतिरिक्त तरल न छोड़ें और बहुत चिपचिपी न लगें, तभी अगले चरण में जाएं।
सूखी फांकों पर भुना जीरा, काला नमक और चुने हुए बाकी मसाले छिड़कें। धीरे से मिलाएं, ताकि हर टुकड़े पर मसाला लगे। पहले एक छोटे हिस्से पर मसाला डालकर स्वाद जांचना बेहतर है। जरूरत लगे तो बाकी कैंडी में उसी अनुपात से मिलाएं। अधिक खट्टापन पसंद हो तो थोड़ी मात्रा में अमचूर डाल सकते हैं, लेकिन आंवला पहले से खट्टा होता है। इसलिए अमचूर जरूरी नहीं है। मसाला मिलाने के बाद कैंडी को थोड़ी देर साफ ट्रे पर फैलाकर रखें और फिर डिब्बे में भरें।
कैंडी रखने के लिए साफ, पूरी तरह सूखा और एयरटाइट डिब्बा चुनें। इसे ठंडी, सूखी जगह पर रखें और हमेशा सूखे चम्मच से निकालें। घर की कैंडी कितने दिन चलेगी, यह उसकी बची हुई नमी और भंडारण पर निर्भर करता है। फफूंद, असामान्य गंध या रंग में बदलाव दिखे तो उसे न खाएं। बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार छोटे, आसानी से चबाए जा सकने वाले टुकड़े दें। इसमें चीनी और नमक दोनों हैं, इसलिए थोड़ी मात्रा में परोसें। इस तरह आंवले का चटपटा स्वाद घर पर अपनी पसंद के अनुसार तैयार किया जा सकता है।
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