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लाइफ स्टाइल : व्रत के दौरान अक्सर समझ नहीं आता कि ऐसा क्या बनाया जाए, जो स्वादिष्ट होने के साथ पेट भी भर दे। सुबह फल और उबले आलू खाने के बाद शाम होते-होते कुछ चटपटा खाने का मन करने लगता है। ऐसे में अगर आप भी व्रत में एक ही तरह का खाना खाकर बोर हो गई हैं, तो सिंघाड़े के आटे से बने कुरकुरे पकौड़े ट्राई कर सकती हैं। इन्हें बनाना आसान है और इसके लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत भी नहीं पड़ती।
सिंघाड़े के आटे का इस्तेमाल व्रत में कई तरह के व्यंजन बनाने के लिए किया जाता है। इससे पकौड़े, पूड़ी और हलवा जैसी चीजें तैयार की जा सकती हैं। अगर आपको शाम की चाय के साथ कुछ चटपटा खाने का मन है, तो सिंघाड़े के पकौड़े एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं। इन्हें सेंधा नमक और व्रत में इस्तेमाल किए जाने वाले मसालों के साथ तैयार किया जा सकता है। आइए जानते हैं सिंघाड़े के आटे से कुरकुरे पकौड़े बनाने की आसान रेसिपी।
सिंघाड़े के पकौड़े बनाने के लिए सामग्री
इस रेसिपी को बनाने के लिए आपको घर में आसानी से मिलने वाली कुछ चीजों की जरूरत होगी।
सिंघाड़े का आटा – 1 कप
उबले हुए आलू – 2 मध्यम आकार के
हरी मिर्च – 1 से 2 बारीक कटी हुई
हरा धनिया – 2 बड़े चम्मच बारीक कटा हुआ
सेंधा नमक – स्वादानुसार
काली मिर्च पाउडर – आधा छोटा चम्मच
जीरा – आधा छोटा चम्मच, यदि आपके व्रत में अनुमत हो
पानी – जरूरत के अनुसार
तेल या घी – तलने के लिए
ध्यान दें: व्रत के नियम अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में अलग हो सकते हैं। इसलिए सामग्री चुनते समय अपने व्रत के नियमों का ध्यान रखें।
सिंघाड़े के पकौड़े बनाने की आसान विधि
1. सबसे पहले आलू तैयार करें
सबसे पहले दो मध्यम आकार के आलू उबाल लें। जब आलू ठंडे हो जाएं, तो उनके छिलके उतारकर अच्छी तरह मैश कर लें। ध्यान रखें कि आलू में बड़े टुकड़े न रहें, ताकि पकौड़ों का मिश्रण अच्छी तरह तैयार हो सके।
अब मैश किए हुए आलू में बारीक कटी हरी मिर्च, हरा धनिया, सेंधा नमक और काली मिर्च पाउडर डालें। सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें। इससे पकौड़ों में अच्छा स्वाद आएगा और वे अंदर से भी स्वादिष्ट बनेंगे।
2. सिंघाड़े के आटे का घोल बनाएं
अब एक बड़े बर्तन में सिंघाड़े का आटा लें। इसमें तैयार किया हुआ आलू का मिश्रण डाल दें। इसके बाद थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाएं।
ध्यान रखें कि घोल बहुत पतला न हो। पकौड़े बनाने के लिए मिश्रण इतना गाढ़ा होना चाहिए कि चम्मच से आसानी से उठाया जा सके। अगर घोल ज्यादा पतला हो जाए, तो थोड़ा सिंघाड़े का आटा मिला सकती हैं। वहीं, मिश्रण बहुत गाढ़ा होने पर थोड़ा पानी डालकर इसे सही कर लें।
3. मिश्रण को कुछ देर के लिए रखें
घोल तैयार होने के बाद इसे लगभग 5 मिनट के लिए रख दें। इससे आटा पानी को अच्छी तरह सोख लेगा और मिश्रण की बनावट बेहतर हो सकती है।
पकौड़ों को अधिक स्वादिष्ट बनाने के लिए आप अपने व्रत के नियमों के अनुसार इसमें थोड़ा कुट्टू का आटा भी मिला सकती हैं। हालांकि, केवल सिंघाड़े के आटे से भी पकौड़े तैयार किए जा सकते हैं।
4. अब पकौड़ों को तलें
एक कड़ाही में तेल या घी गर्म करें। जब तेल मध्यम गर्म हो जाए, तो चम्मच की मदद से थोड़ा-थोड़ा मिश्रण डालें। एक साथ बहुत ज्यादा पकौड़े न डालें, क्योंकि इससे तेल का तापमान कम हो सकता है और पकौड़े अच्छी तरह नहीं तलेंगे।
पकौड़ों को मध्यम आंच पर तलें और बीच-बीच में पलटते रहें। जब वे सुनहरे और कुरकुरे हो जाएं, तो उन्हें निकाल लें। इसके बाद अतिरिक्त तेल निकालने के लिए कुछ देर टिश्यू पेपर पर रख दें।
ध्यान रखें कि तेल बहुत ज्यादा गर्म न हो, वरना पकौड़े बाहर से जल्दी रंग पकड़ लेंगे और अंदर से अच्छी तरह नहीं पक पाएंगे।
इन चीजों के साथ परोसें सिंघाड़े के पकौड़े
सिंघाड़े के पकौड़े गर्मागर्म खाने में सबसे अच्छे लगते हैं। आप इन्हें व्रत में अनुमत हरी चटनी, दही या सेंधा नमक वाली दही की चटनी के साथ परोस सकती हैं। अगर आपको खट्टा-मीठा स्वाद पसंद है, तो व्रत में अनुमत सामग्री से बनी चटनी भी अच्छा विकल्प हो सकती है।
शाम की भूख के लिए यह रेसिपी आसानी से तैयार हो जाती है। परिवार के अन्य सदस्यों के लिए भी इन्हें नाश्ते के रूप में बनाया जा सकता है।
पकौड़ों को कुरकुरा बनाने के लिए अपनाएं ये टिप्स
घोल को बहुत पतला न रखें, वरना पकौड़ों को आकार देना मुश्किल हो सकता है।
तेल को मध्यम गर्म रखें, ताकि पकौड़े अंदर तक पक सकें।
कड़ाही में एक बार में बहुत ज्यादा मिश्रण न डालें।
पकौड़ों को धीमी से मध्यम आंच पर तलें और सुनहरा होने तक पकाएं।
बेहतर स्वाद के लिए इन्हें तलने के तुरंत बाद गर्मागर्म परोसें।
व्रत में स्वाद बदलने का आसान तरीका
अगर आप व्रत में बार-बार फल और उबले आलू खाकर बोर हो गई हैं, तो सिंघाड़े के आटे से बने पकौड़े अपने फलाहारी मेन्यू में शामिल कर सकती हैं। इन्हें बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता और स्वाद के अनुसार तीखापन भी कम या ज्यादा किया जा सकता है।
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