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नई दिल्ली: सर्दियों का मौसम शुरू होते ही लोग अपनी सेहत और रोग प्रतिरोधक क्षमता का खास ध्यान रखने लगते हैं। इस दौरान च्यवनप्राश का सेवन भी काफी लोकप्रिय है। बाजार में अलग-अलग कंपनियों के च्यवनप्राश उपलब्ध हैं, लेकिन कई लोग घर पर पारंपरिक तरीके से इसे बनाना पसंद करते हैं। अगर आपके पास एक किलो ताजा आंवला है, तो कुछ घरेलू मसालों और अन्य सामग्री की मदद से आप स्वादिष्ट च्यवनप्राश तैयार कर सकते हैं। हालांकि, घर पर बना च्यवनप्राश भी सर्दी-खांसी से पूरी तरह बचाव की गारंटी नहीं देता।
च्यवनप्राश बनाने के लिए जरूरी सामग्री
- आंवला – 1 किलो
- देसी घी – 100 ग्राम
- गुड़ या मिश्री – 500 से 700 ग्राम
- शहद – 100 ग्राम (वैकल्पिक)
- दालचीनी पाउडर – 1 छोटा चम्मच
- छोटी इलायची पाउडर – 1 छोटा चम्मच
- सोंठ पाउडर – 1 छोटा चम्मच
- काली मिर्च पाउडर – आधा छोटा चम्मच
- लौंग पाउडर – एक चौथाई छोटा चम्मच
- पानी – आवश्यकतानुसार
पहला स्टेप: आंवले को उबालकर तैयार करें
सबसे पहले एक किलो आंवले को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। इसके बाद एक बड़े बर्तन में पानी गर्म करें और उसमें आंवले डालकर नरम होने तक उबालें। जब आंवले ठंडे हो जाएं, तो उनकी गुठलियां निकाल दें। अब आंवले के गूदे को मिक्सर में डालकर बारीक पेस्ट तैयार कर लें। जरूरत पड़ने पर थोड़ा पानी मिला सकते हैं।
दूसरा स्टेप: घी में आंवले का पेस्ट भूनें
एक भारी तले वाली कड़ाही में देसी घी गर्म करें। इसमें आंवले का तैयार पेस्ट डालकर धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए पकाएं। ध्यान रखें कि मिश्रण कड़ाही में चिपके नहीं। जब पेस्ट का अतिरिक्त पानी कम होने लगे और मिश्रण गाढ़ा हो जाए, तब अगला चरण शुरू करें।
तीसरा स्टेप: गुड़ और मसाले मिलाएं
अब आंवले के मिश्रण में गुड़ या मिश्री डालें। इसे धीमी आंच पर अच्छी तरह मिलाते हुए पकाएं। गुड़ पूरी तरह घुल जाने के बाद दालचीनी, इलायची, सोंठ, काली मिर्च और लौंग का पाउडर मिलाएं। सभी सामग्रियों को अच्छी तरह मिलाकर मिश्रण को गाढ़ा होने तक पकाते रहें।
चौथा स्टेप: ठंडा करके सुरक्षित रखें
जब मिश्रण गाढ़ा हो जाए, तो गैस बंद कर दें। इसे पूरी तरह ठंडा होने दें। यदि शहद मिलाना चाहते हैं, तो ठंडा होने के बाद मिलाएं। तैयार मिश्रण को साफ, सूखे और एयरटाइट कांच के जार में भरें। घर पर बने इस मिश्रण की सुरक्षित भंडारण अवधि निश्चित नहीं होती, इसलिए इसे फ्रिज में रखें और खराब होने के संकेत दिखाई देने पर इस्तेमाल न करें।
सर्दियों में आंवले के फायदे
आंवला विटामिन सी और विभिन्न एंटीऑक्सीडेंट का स्रोत है। संतुलित आहार के हिस्से के रूप में इसका सेवन लाभकारी हो सकता है। हालांकि, पकाने की प्रक्रिया से आंवले में मौजूद विटामिन सी की मात्रा कम हो सकती है। घरेलू च्यवनप्राश को सर्दी-जुकाम की दवा या संक्रमण से बचाव का निश्चित उपाय नहीं समझना चाहिए।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
घर पर तैयार यह आंवला-मसाला मिश्रण पारंपरिक आयुर्वेदिक च्यवनप्राश का पूर्ण विकल्प नहीं है, क्योंकि पारंपरिक च्यवनप्राश में कई अन्य औषधीय जड़ी-बूटियां भी शामिल होती हैं। इसमें गुड़, मिश्री या शहद होने के कारण शुगर की मात्रा अधिक हो सकती है। मधुमेह से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
बच्चों को देने से पहले उनकी उम्र और सामग्री का ध्यान रखें। एक वर्ष से कम उम्र के शिशुओं को शहद नहीं देना चाहिए।
पारंपरिक च्यवनप्राश के स्वास्थ्य लाभों की पुष्टि के लिए अभी अधिक उच्च गुणवत्ता वाले वैज्ञानिक अध्ययनों की आवश्यकता है। इसलिए लगातार खांसी, बुखार या सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
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