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लाइफ स्टाइल
सूंघने की क्षमता में गिरावट भी अल्जाइमर्स का शुरुआती संकेत
SHIDDHANT
14 April 2026 9:03 PM IST

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Delhi दिल्ली। अल्जाइमर एक ऐसी अवस्था है जिसमें ढलती उम्र के साथ याददाश्त कमजोर होती चली जाती है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, अल्जाइमर डिमेंशिया (मस्तिष्क क्षीणता) का एक प्रकार है। इसमें याददाश्त के साथ-साथ सोचने-समझने, निर्णय लेने, और पहचानने व बोलने और समझने की क्षमता में गिरावट आती है। कुछ ऐसे लक्षण होते हैं जिन पर गौर किया जाए तो इसको काबू में किया जा सकता है। इसमें से एक सूंघने की क्षमता भी है।
एक नए शोध में संकेत मिला है कि सूंघने की क्षमता में कमी अल्जाइमर्स के शुरुआती संकेत हो सकते हैं, जो याददाश्त में गिरावट के स्पष्ट लक्षणों से पहले ही दिखाई दे सकती है। यह निष्कर्ष प्रतिष्ठित जर्नल नेचर कम्युनिकेशन्स में प्रकाशित हुआ है, जिसमें बताया गया कि दिमाग में होने वाले शुरुआती बदलाव इंद्रियों, विशेष रूप से सूंघने की क्षमता पर असर डालते हैं। जर्मनी के डीजेडएनई और लुडविंग-मैक्सिमिलियंस-यूनिवर्सिटी म्यूनिख के वैज्ञानिकों ने पाया कि दिमाग की प्रतिरक्षा प्रणाली इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। शोध के अनुसार, माइक्रोग्लिया नामक प्रतिरक्षा कोशिकाएं गलती से उन तंत्रिका रेशों पर हमला कर सकती हैं, जो सूंघने की क्षमता के लिए जरूरी होते हैं।
अध्ययन में बताया गया कि सूंघने से जुड़ी समस्या तब उत्पन्न होती है, जब दिमाग के दो अहम हिस्सों के बीच संचार बाधित हो जाता है। इनमें ओलफैक्ट्री बल्ब, जो नाक से आने वाले गंध संकेतों को प्रोसेस करता है, और लोकस कोरुलियस शामिल हैं, जो इस प्रक्रिया को तंत्रिका कनेक्शनों के जरिए नियंत्रित करता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, जब माइक्रोग्लिया इन दोनों हिस्सों के बीच संपर्क को प्रभावित करती हैं, तो गंध पहचानने की क्षमता कमजोर पड़ने लगती है। यही बदलाव आगे चलकर अल्जाइमर के अन्य लक्षणों का संकेत बन सकते हैं।
इस अध्ययन में चूहों और इंसानों, दोनों पर आधारित साक्ष्य शामिल किए गए। शोधकर्ताओं ने दिमाग के ऊतकों के विश्लेषण और पीईटी स्कैनिंग के जरिए यह समझने की कोशिश की कि बीमारी के शुरुआती चरणों में ये परिवर्तन कैसे होते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सूंघने की क्षमता में कमी को समय रहते पहचाना जाए, तो यह अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारी के शुरुआती निदान में मददगार साबित हो सकता है, जिससे इलाज और देखभाल के बेहतर विकल्प विकसित किए जा सकते हैं।
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