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जानिए सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश को आजादी दिलाने वाले महात्मा गांधी कब और कैसे बने देश के राष्ट्रपिता

Tara Tandi
30 Jan 2022 3:16 AM GMT
जानिए सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश को आजादी दिलाने वाले महात्मा गांधी कब और कैसे बने देश के राष्ट्रपिता
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भारत की स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नायक मोहनदास करमचंद गांधी की मृत्यु 30 जनवरी 1948 को हुई थी। देश इस साल गांधी जी की 74वीं पुण्यतिथि मना रहा है।

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। भारत की स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नायक मोहनदास करमचंद गांधी की मृत्यु 30 जनवरी 1948 को हुई थी। देश इस साल गांधी जी की 74वीं पुण्यतिथि मना रहा है। गांधी जी ने देश के लिए जो किया वह देश सदियों तक याद रखेगा। उनके आदर्शों, अहिंसा की प्रेरणा, सत्य की ताकत ने अंग्रेजों को भी झुकने को मजबूर कर दिया। उनके इसी योगदान के कारण गांधीजी आज महात्मा गांधी के नाम से जाने जाते हैं। कोई उन्हें बापू तो कोई राष्ट्रपिता कहता है। 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में पुतलीबाई और करमचंद गांधी के घर में जन्मा एक बालक जिसने बचपन में मां के धार्मिक व्यवहार और संस्कारों को ग्रहण किया, वह आगे चलकर देश का राष्ट्रपिता बन गया। आखिर कैसे? जानिए सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश को आजादी दिलाने वाले महात्मा गांधी कब और कैसे बने देश के राष्ट्रपिता। गांधीजी की पुण्यतिथि पर जानें भारत के राष्ट्रपिता के बारे में।

महात्मा गांधी का बचपन
गांधी जी बचपन में पढ़ाई में अधिक होनहार नहीं थे। गणित में मध्यम दर्जे के विद्यार्थी थे तो वहीं भूगोल में बहुत कमजोर थे। उनकी लिखावट भी सुंदर नहीं थी, जिसकी वजह से अक्सर उन्हें डांट पड़ती थी लेकिन वह अंग्रेजी में निपुण थे। अंग्रेजी विषय में उन्हें कई पुरस्कार और छात्रवृत्तियां मिला करती थीं।
गांधी जी का परिवार
जब वह मात्र 13 साल के थे तो उनकी शादी पोरबंदर के एक व्यापारी की बेटी कस्तूरबा से हो गई, जो उनसे 6 माह बड़ी थीं। वहीं 15 साल की उम्र में गांधी जी एक बेटे के पिता भी बन गए थे। हालांकि उनका वह पुत्र जीवित न रहा। इसके बाद गांधी जी और कस्तूरबा गांधी के चार बेटे हुए, जिनके नाम हरिलाल, मनिलाल, रामलाल, देवदास है।
गांधी जी के आंदोलन
गांधीजी के हर कदम पर कस्तूरबा गांधी ने उनका साथ दिया। वह एक आदर्श पत्नी कही जाती हैं जो गांधी जी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलीं। गांधी जी को लोग प्यार से बापू कहते हैं तो कस्तूरबा गांधी को बा कहते थे। गांधीजी ने वकालत की शिक्षा हासिल की और 1919 में अंग्रेजों के राॅलेट एक्ट कानून के खिलाफ विरोध शुरु किया। इस एक्ट के तहत बिना मुकदमा चलाए किसी व्यक्ति को जेल में भेजने का प्रावधान था। फिर गांधी जी ने सत्याग्रह की घोषणा की। 'असहयोग आंदोलन', 'नागरिक अवज्ञा आंदोलन', 'दांडी यात्रा' और 'भारत छोड़ो आंदोलन' किए।
सुभाष चंद्र बोस ने कहा था पहली बार राष्ट्रपिता
नेताजी सुभाष चंद्र बोस और महात्मा गांधी के बीच के मतभेदों की बात कही जाती है लेकिन सबसे पहली बार नेताजी ने ही 6 जुलाई 1944 को रंगून रेडियो स्टेशन से दिए गए अपने भाषण में गांधीजी को राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया था। नेताजी ने आजाद हिंद फौज की स्थापना करते हुए महात्मा गांधी से आशिर्वाद मांगा था।
अपने भाषण के अंत में सुभाष चंद्र बोस ने कहा था कि 'हमारे राष्ट्रपिता, भारत की आजादी की पवित्र लड़ाई में मैं आपके आशीर्वाद और शुभकामनाओं की कामना कर रहा हूं।'
बाद में 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली स्थित बिड़ला भवन में नाथूराम गोडसे ने गांधीजी की हत्या कर दी। अहिंसा का संदेश देने वाले इस महान विभूति के जीवन का अंत होने के बाद देशवासियों ने मन ही मन गांधीजी को राष्ट्रपिता मान लिया।


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