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Skin Slugging Side Effects: सोशल मीडिया पर आए दिन स्किनकेयर से जुड़े नए-नए ट्रेंड वायरल होते रहते हैं। कभी ग्लास स्किन का ट्रेंड चर्चा में रहता है तो कभी चेहरे को चमकदार और मुलायम बनाने के घरेलू उपाय लोगों का ध्यान खींचते हैं। इन्हीं में से एक है 'स्लगिंग' (Slugging), जो पिछले कुछ समय से ब्यूटी और स्किनकेयर की दुनिया में काफी लोकप्रिय हो रहा है। इस तकनीक को कोरियन ब्यूटी रूटीन से जोड़कर देखा जाता है। इसमें रात को सोने से पहले चेहरे पर वैसलीन या पेट्रोलियम जेली की परत लगाई जाती है, ताकि त्वचा की नमी बनी रहे। हालांकि, त्वचा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तरीका हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होता। कुछ लोगों को इससे राहत मिल सकती है, जबकि कुछ की त्वचा पर पिंपल्स, जलन और दूसरी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
स्लगिंग एक ऐसी स्किनकेयर तकनीक है, जिसमें चेहरे की सफाई और मॉइस्चराइजर लगाने के बाद पेट्रोलियम जेली जैसे ऑक्लूसिव उत्पाद की पतली परत लगाई जाती है। ऑक्लूसिव ऐसे पदार्थ होते हैं, जो त्वचा की सतह पर एक सुरक्षात्मक परत बनाकर पानी के वाष्पीकरण को कम करते हैं। इससे त्वचा में पहले से मौजूद नमी को बनाए रखने में मदद मिलती है। यह तकनीक विशेष रूप से रूखी और डिहाइड्रेटेड त्वचा वाले लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है।
यह तरीका नया नहीं है। त्वचा की नमी बनाए रखने के लिए पेट्रोलियम जेली का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। हालांकि, सोशल मीडिया और कोरियन ब्यूटी ट्रेंड के कारण इसे स्लगिंग के नाम से नई पहचान मिली है। इस प्रक्रिया के बाद चेहरे पर चमकदार और चिकनी परत दिखाई देती है। इसी वजह से इसे स्लगिंग कहा जाता है।
स्लगिंग का सबसे बड़ा फायदा त्वचा की नमी को बनाए रखना है। खासकर सर्दियों के मौसम में जब ठंडी हवा और कम नमी के कारण त्वचा रूखी होने लगती है, तब पेट्रोलियम जेली की सुरक्षात्मक परत उपयोगी हो सकती है। इससे त्वचा में पानी की कमी कम होती है और स्किन बैरियर को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है। जिन लोगों की त्वचा बार-बार खिंची हुई महसूस होती है या चेहरे पर रूखापन और पपड़ी की समस्या रहती है, उन्हें इससे लाभ मिल सकता है।
हालांकि, पेट्रोलियम जेली खुद त्वचा में पानी नहीं पहुंचाती। इसका मुख्य काम त्वचा में पहले से मौजूद नमी को बाहर निकलने से रोकना है। इसलिए इसे हल्की नम त्वचा या मॉइस्चराइजर के ऊपर लगाना ज्यादा उपयोगी माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्लगिंग को किसी जादुई एंटी-एजिंग उपाय या मुंहासों के इलाज के रूप में नहीं देखना चाहिए।
स्लगिंग के नुकसान की बात करें तो यह तकनीक ऑयली और एक्ने-प्रोन स्किन वाले लोगों के लिए परेशानी बढ़ा सकती है। जिन लोगों के चेहरे पर पहले से मुंहासे, ब्लैकहेड्स या बार-बार पिंपल्स निकलने की समस्या रहती है, उन्हें पूरे चेहरे पर पेट्रोलियम जेली लगाने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, शुद्ध पेट्रोलियम जेली को सामान्यतः नॉन-कॉमेडोजेनिक माना जाता है, यानी यह अपने आप रोमछिद्र बंद करने वाला पदार्थ नहीं है। इसके बावजूद त्वचा पर तेल, गंदगी और अन्य उत्पादों को बंद कर देने से कुछ लोगों में मुंहासे बढ़ सकते हैं।
संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को पहले से लालिमा, खुजली, जलन या किसी स्किनकेयर उत्पाद से एलर्जी की समस्या है, तो स्लगिंग शुरू करने से पहले त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। कुछ लोगों को पेट्रोलियम जेली लगाने के बाद चेहरे पर भारीपन और चिपचिपाहट महसूस हो सकती है। हालांकि, चिपचिपाहट अपने आप में किसी गंभीर नुकसान का संकेत नहीं है।
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि स्लगिंग के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले दूसरे स्किनकेयर उत्पाद भी त्वचा को प्रभावित कर सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति रेटिनॉल, रेटिनॉइड, एएचए या बीएचए जैसे सक्रिय तत्वों वाले उत्पाद इस्तेमाल करता है और उनके ऊपर पेट्रोलियम जेली की परत लगा देता है, तो कुछ स्थितियों में जलन बढ़ सकती है। इसलिए ऐसे उत्पादों के साथ स्लगिंग करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
स्लगिंग करने का सही तरीका भी समझना जरूरी है। सबसे पहले चेहरे को हल्के फेसवॉश से साफ करें। इसके बाद त्वचा को पूरी तरह रगड़कर सुखाने के बजाय हल्का नम रहने दें। फिर अपनी त्वचा के अनुसार मॉइस्चराइजर लगाएं। अंतिम चरण में थोड़ी मात्रा में शुद्ध पेट्रोलियम जेली की पतली परत लगाएं। इसके लिए बहुत मोटी परत लगाने की जरूरत नहीं है।
रात में पेट्रोलियम जेली लगाने के बाद सुबह चेहरे को हल्के क्लींजर से साफ किया जा सकता है। इससे रातभर त्वचा पर जमा अतिरिक्त तेल और उत्पाद हटाने में मदद मिलती है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्लगिंग हर रात करना जरूरी नहीं है। त्वचा की जरूरत और मौसम के अनुसार इसे कभी-कभी इस्तेमाल किया जा सकता है।
जिन लोगों के चेहरे पर सक्रिय संक्रमण, संक्रमित घाव या त्वचा की कोई गंभीर समस्या है, उन्हें बिना चिकित्सकीय सलाह के स्लगिंग नहीं करनी चाहिए। इसी तरह अगर स्लगिंग के बाद चेहरे पर लगातार लालिमा, जलन या नए मुंहासे दिखाई दें, तो इसका इस्तेमाल बंद करके त्वचा विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
सोशल मीडिया पर स्लगिंग को अक्सर ग्लोइंग स्किन पाने का आसान तरीका बताया जाता है, लेकिन केवल वैसलीन लगाने से त्वचा गोरी नहीं होती और न ही इससे झुर्रियां हमेशा के लिए खत्म होती हैं। यह मुख्य रूप से नमी को बनाए रखने वाली तकनीक है। इसके परिणाम व्यक्ति की त्वचा के प्रकार, पहले से मौजूद समस्याओं और स्किनकेयर रूटीन पर निर्भर करते हैं।
कुल मिलाकर, स्लगिंग रूखी त्वचा वाले लोगों के लिए एक किफायती और उपयोगी उपाय हो सकता है, लेकिन इसे हर किसी के लिए जरूरी स्किनकेयर स्टेप नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी वायरल ब्यूटी ट्रेंड को अपनाने से पहले अपनी त्वचा की जरूरतों को समझना सबसे महत्वपूर्ण है।
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