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जानिए बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज के लक्षण और बचाव के उपाय

Mahima Marko
15 Jun 2022 9:34 AM GMT
जानिए बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज के लक्षण और बचाव के उपाय
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डायबिटीज ( Diabetes ) जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित होना आजकल एक आम बात है. इस बीमारी का पता बहुत देर में चलता है

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। डायबिटीज ( Diabetes ) जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित होना आजकल एक आम बात है. इस बीमारी का पता बहुत देर में चलता है, लेकिन चिंता की बात है कि ये बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रही है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक बच्चों में इसके होने का कोई सटीक कारण मौजूद नहीं है, लेकिन खराब लाइफस्टाइल, गलत खानपान और जेनेटिक वजह बन सकते हैं. ज्यादातर बच्चों और किशोरों को टाइप-1 डायबिटीज ( Type-1 Diabetes in children ) के होने का खतरा बना रहता है. कहते हैं कि इसमें इंसुलिन के उत्पादन की दिक्कत होने लगती है. हार्मोन ब्लड ( Blood sugar level ) में ग्लूकोज के लेवल को कंट्रोल करने वाला पैंक्रियाज इंसुलिन का उत्पादन बंद कर देता है. डायबिटीज के टाइप 1 और 2 है, जिसमें टाइप 1 को ज्यादा खतरनाक माना जाता है.

टाइप 1 डायबिटीज के होने पर अधिकतर मामलों में मरीज को इंसुलिन की डोज लेनी पड़ती है, लेकिन अगर वह इसे लेना बंद कर दे, तो जल्द ही उसकी मौत भी हो सकती है. हम आपको बताने जा रहे हैं कि बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज के कौन-कौन से लक्षण नजर आते हैं और इससे बचाव के लिए किन उपायों को अपनाया जा सकता है.
बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज के होने पर नजर आने वाले लक्षण
1. अगर कोई बच्चा या किशोर टाइप-1 डायबिटीज से ग्रसित है, तो ऐसे में इसका असर उसके वजन पर दिखने लगता है. ऐसा देखा गया है कि इस बीमारी के पीड़ित बच्चे का वजन तेजी से घटने लगता है. पेरेंट्स को इस सिचुएशन में तुरंत उसे डॉक्टर को दिखाना चाहिए.
2. टाइप-1 डायबिटीज वाले मरीजों को सामान्य से ज्यादा भूख लगती है. एक्सपर्ट्स के अनुसार शरीर में ग्लूकोज का लेवल बढ़ जाने के कारण भूख ज्यादा लगने लगी है. हालांकि ये लक्षण दोनों तरह की डायबिटीज में नजर आता है, लेकिन ज्यादा खाना पर शरीर की एनर्जी उसे पचाने में वेस्ट होती है. ऐसे में बच्चा को कई अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी होने लगती है.
3. बच्चा अगर टाइप-1 डायबिटीज से ग्रसित हो जाए, तो वह अक्सर थका हुआ भी महसूस करता है. खाने को पचाने से लेकर कई अन्य समस्याओं के चलते उसकी एनर्जी वेस्ट होती है.
4. टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों को टाइप-2 डायबिटीज की मरीज की तरह प्यास भी ज्यादा लगती है. पानी भले ही हर समस्या में रामबाण की भूमिका निभाता हो, लेकिन हद से इसका हद से ज्यादा सेवन नुकसान पहुंचा सकता है. मरीज को बार-बार यूरिन आने की दिक्कत भी होने लगती है.
करें ये उपाय
अगर आप अपने बच्चे को टाइप-1 डायबिटीज से बचाकर रखना चाहते हैं, तो उसे हरी सब्जियों व कम मीठे फलों का रोजाना सेवन कराए. साथ ही उसे रनिंग के जरिए एक्टिव रखने की कोशिश करें.

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