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जानिए कितनी तरह के होते हैं योग

Mahima Marko
21 Jun 2022 9:10 AM GMT
जानिए कितनी तरह के होते हैं योग
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हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yaga Day) मनाया जाता है.

जनता से रिश्ता वेबडेस्क। हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yaga Day) मनाया जाता है. साल 2014 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था. इसके बाद साल 2015 में पहली बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया था. योग एक ऐसी आध्यात्मिक प्रक्रिया है. जो आत्मा, मन और शरीर को आपस में जोड़ता है. माना जाता है कि जब से सभ्यता शुरू हुई है तभी से योग भारतीय संस्कृति का हिस्सा रहा है. योग विद्या में शिव को पहले योगी या आदि योगी या पहला गुरू कहा गया है. माना जाता है आदि योगी ने अपने प्रबुद्ध ज्ञान को अपने प्रसिद्ध सप्तऋषि को प्रदान किया था. तब से ऋषि मुनि योग के जरिए खुद के मन, शरीर नियंत्रित करते आ रहे हैं. आमतौर पर लोग योग का मतलब योगासन और प्राणायाम तक ही समझते हैं, लेकिन वास्तव में योग के कई प्रकार हैं. आइए आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर आपको बताते हैं योग कितनी तरह के होते हैं.

हठ योग
षटकर्म, आसन, मुद्रा, प्राणायाम, प्रत्याहार, ध्यान और समाधि ये 7 हठ योग के अंग माने गए हैं. हठ योग के जरिए कुंडलिनी शक्ति व चक्र जागृत किए जाते हैं. हठ योग मन को संसार की ओर जाने से रोककर अंतर्मुखी करने की एक प्राचीन भारतीय साधना पद्धति है.
राज योग
राज योग को राजसी योग कहा जाता है. इसके आठ अंग माने गए हैं. ये आठ अंग हैं- यम, नियम, आसन, प्राणायाम, धारणा, ध्यान और समाधि. आठ अंग होने के कारण इसे अष्टांग योग भी कहा जाता है. इसमें अन्य योगासन की तुलना में अधिक अनुशासन और नियंत्रण की आवश्यकता होती है.
कर्म योग
कर्म योग का मतलब निस्वार्थ क्रिया है. इसमें व्यक्ति को मानवता के प्रति आत्मसमर्पण करना होता है. ऐसे में मन को विरक्त करके कर्म किया जाता है और व्यक्ति अपने मन को सम भाव में रखता है. कर्म योग की महत्ता को भगवद्गीता में बताया गया है.
भक्ति योग
भक्ति योग में भक्ति के मार्ग का वर्णन किया गया है. इसके जरिए हर किसी में ईश्वर को देखकर अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने का मार्ग बताया गया है. इसमें क्षमा और सहिष्णुता का अभ्यास किया जाता है. श्रवण, कीर्तन, स्मरण, पादसेवन, अर्चन, वंदन, दास्य, सख्य और आत्मनिवेदन, ये इसके नौ अंग हैं.
ज्ञान योग
ज्ञान योग, दिमाग से नकारात्मक ऊर्जा को मुक्त करता है. इसमें ग्रंथों और ग्रंथों के अध्ययन के माध्यम से बुद्धि का विकास किया जाता है. ज्ञान योग के तीन सिद्धांत हैं, आत्मबोध, अहंकार दूर करना और आत्मानुभूति.
तंत्र योग
तंत्र योग में पुरुष और स्त्री मिलकर इंद्रियों पर संयम रखकर योग करते हैं. इसे कुंडलिनी योग भी कहा जाता है. तंत्र योग का वर्णन अर्थवेद में पाया जाता है. तंत्र शास्त्र के तीन अंग माने गए हैं- आगम तंत्र, यामल तंत्र, मुख्य तंत्र. जिस तंत्र में देवताओं की पूजा, साधन, सृष्टि प्रलय का वर्णन हो, वो आगम तंत्र कहलाता है. जिसमें ज्योतिष, नित्य कृत्य, सूत्र और वर्णभेद, युगधर्म का वर्णन हो उसे यामल कहते हैं और जिसमें लय, मंत्र, तीर्थ, कल्प, दानधर्म, व्रतकथा और आध्यात्म का वर्णन हो वो मुख्य तंत्र माना जाता है.
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