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लगातार खांसी बनी जान की दुश्मन? इन आयुर्वेदिक नुस्खों से मिलेगी राहत
jantaserishta.com
21 Jan 2026 8:40 AM IST

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दिल्ली: सर्दियों के मौसम में खांसी की समस्या आम हो जाती है, लेकिन अगर यह लगातार बनी रहे तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। छाती में बेचैनी, बलगम का बनना या गले में जलन जैसे लक्षण सांस की सेहत पर असर डाल सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, समय रहते इन संकेतों को पहचानकर घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय अपनाने से खांसी को नियंत्रित किया जा सकता है और सांस की सेहत बेहतर बनी रह सकती है।
भारत सरकार का आयुष मंत्रालय खांसी के लिए घरेलू उपाय की सलाह देने से पहले बताता है, खांसी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है- सूखी खांसी और बलगम वाली खांसी। सूखी खांसी में गले में खुजली, जलन या लगातार खांसी होती है, जबकि बलगम वाली खांसी में छाती भारी लगना, बलगम निकलना और सीने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखते हैं। इन दोनों में गले में जलन और सीने की बेचैनी आम संकेत हैं। यदि खांसी कई दिनों तक कम न हो तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें, लेकिन शुरुआती चरण में आयुर्वेदिक उपाय काफी कारगर साबित हो सकते हैं।
आयुर्वेदाचार्य खांसी से राहत के लिए कई आसान और प्रभावी नुस्खों की सलाह देते हैं। सूखी खांसी में मुलेठी या लौंग का एक छोटा टुकड़ा मुंह में रखकर चूसने से गले को तुरंत आराम मिलता है। वासा के पत्तों का काढ़ा बनाकर पीना या इसका पाउडर इस्तेमाल करना भी फायदेमंद होता है, क्योंकि यह कफ को कम करने में मदद करता है। रात को सोने से पहले हल्दी मिलाकर गर्म दूध पीने से खांसी और गले की जलन में काफी राहत मिलती है।
बलगम वाली खांसी या सामान्य खांसी के लिए गुनगुने अदरक का काढ़ा, अदरक-तुलसी का काढ़ा शहद के साथ लेना बहुत उपयोगी है। यह कफ को पतला करके बाहर निकालने में सहायक होता है। इसके अलावा, गर्म पानी में नमक डालकर गरारा करना और भाप लेना गले और छाती की जलन को कम करता है। लौंग, अदरक और इलायची को मिलाकर पाउडर बनाकर या काढ़े के रूप में इस्तेमाल करने से भी खांसी में आराम मिलता है।
एक्सपर्ट के अनुसार, ये आयुर्वेदिक नुस्खे प्राकृतिक और सुरक्षित हैं, लेकिन संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और आराम के साथ इनका सेवन अधिक प्रभावी होता है। इन उपायों को रोजाना की दिनचर्या में शामिल करने से न केवल खांसी नियंत्रित होती है, बल्कि सांस की सेहत भी मजबूत बनी रहती है। हालांकि, यदि लक्षण गंभीर हों जैसे सांस फूलना, बुखार या लगातार कमजोरी, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
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