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लाइफ स्टाइल
भारत के 3 सबसे खूबसूरत ट्रेन रूट जहां सफर ही बन जाएगा मंजिल
Ratna Netam
1 Oct 2026 6:01 PM IST

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लाइफ स्टाइल : भारत में ट्रेन का सफर केवल एक शहर से दूसरे शहर तक पहुंचने का जरिया नहीं है। देश में कुछ ऐसे रेलवे रूट भी हैं, जहां खिड़की के बाहर दिखने वाले नजारे पूरे सफर को यादगार बना देते हैं। ऊंचे पहाड़, हरे-भरे जंगल, गहरी घाटियां, चाय के बागान, झरने और बादलों के बीच से गुजरती ट्रेनें यात्रियों को ऐसा अनुभव देती हैं कि मंजिल से ज्यादा खूबसूरत रास्ता लगने लगता है।अगर आप भी सामान्य ट्रेन यात्रा से हटकर प्रकृति के बीच कुछ खास अनुभव करना चाहते हैं तो भारत के तीन ट्रेन रूट आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होने चाहिए। इनमें हिमाचल प्रदेश की कालका-शिमला रेलवे, तमिलनाडु की नीलगिरि माउंटेन रेलवे और पश्चिमी घाट से गुजरने वाला कोंकण रेलवे शामिल है।
1. कालका से शिमला: पहाड़ों और सुरंगों के बीच यादगार सफर
हिमाचल प्रदेश का कालका-शिमला रेलवे भारत के सबसे खूबसूरत ट्रेन रूटों में गिना जाता है। कालका से निकलने के बाद ट्रेन धीरे-धीरे पहाड़ों की ऊंचाई पर चढ़ती है और रास्ते में देवदार तथा चीड़ के जंगल, छोटी पहाड़ी बस्तियां और गहरी घाटियां नजर आती हैं।यह करीब 96 किलोमीटर लंबा नैरो गेज रेलवे मार्ग है और UNESCO की Mountain Railways of India विश्व धरोहर का हिस्सा है। रेलवे लाइन पहाड़ी इलाके में बनाई गई इंजीनियरिंग का भी शानदार उदाहरण मानी जाती है।इस रूट की सबसे खास बात रास्ते में आने वाली बड़ी संख्या में सुरंगें, पुल और घुमावदार मोड़ हैं। पर्यटन मंत्रालय के मुताबिक कालका-शिमला सफर में ट्रेन करीब 103 सुरंगों, 917 मोड़ों और 988 पुलों से गुजरती है। पूरा सफर लगभग पांच घंटे में पूरा होता है।बरसात के बाद यहां पहाड़ों पर हरियाली और बढ़ जाती है, जबकि सर्दियों के मौसम में कुछ इलाकों में बर्फ से ढके पहाड़ देखने को मिल सकते हैं। ट्रेन जैसे-जैसे शिमला की तरफ बढ़ती है, मौसम भी बदलता हुआ महसूस होता है।इस यात्रा में बड़ोग स्टेशन और आसपास का पहाड़ी क्षेत्र यात्रियों को खास तौर पर पसंद आता है। ट्रेन की धीमी रफ्तार के कारण यात्री आराम से बाहर के नजारे देख सकते हैं और तस्वीरें ले सकते हैं।
2. नीलगिरि माउंटेन रेलवे: चाय के बागानों और बादलों के बीच ट्रेन
दक्षिण भारत में अगर किसी ट्रेन यात्रा को बेहद खूबसूरत माना जाता है तो उसमें नीलगिरि माउंटेन रेलवे का नाम जरूर आता है। तमिलनाडु के मेट्टुपालयम से ऊटी की ओर जाने वाली यह ऐतिहासिक रेल लाइन हरे-भरे नीलगिरि पहाड़ों से होकर गुजरती है।इस मार्ग की लंबाई लगभग 46 किलोमीटर है। ट्रेन निचले इलाके से शुरू होकर करीब 326 मीटर की ऊंचाई से 2,203 मीटर तक पहुंचती है। नीलगिरि माउंटेन रेलवे भी UNESCO की Mountain Railways of India विश्व धरोहर का हिस्सा है।इस ट्रेन का सफर इसलिए भी खास है क्योंकि रास्ते में घने जंगल, पहाड़ी झरने, चाय के बागान और धुंध से ढकी घाटियां दिखाई देती हैं। कई जगह ट्रेन इतने खूबसूरत प्राकृतिक इलाकों से गुजरती है कि यात्रियों का ध्यान मोबाइल से ज्यादा खिड़की के बाहर रहता है।नीलगिरि माउंटेन रेलवे में पहाड़ की तेज चढ़ाई को पार करने के लिए विशेष रैक एंड पिनियन प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है। यह इसकी इंजीनियरिंग को दूसरे सामान्य रेलवे मार्गों से अलग बनाती है।कुन्नूर के आसपास के इलाके इस यात्रा के सबसे खूबसूरत हिस्सों में शामिल हैं। यहां दूर तक फैले चाय के बागान और बादलों से घिरी पहाड़ियां देखने को मिलती हैं। बारिश के बाद हरियाली और ज्यादा गहरी हो जाती है।जो यात्री ऊटी घूमने की योजना बना रहे हैं, वे सड़क मार्ग के बजाय इस ट्रेन यात्रा को चुनकर पूरे सफर को ही छुट्टी का खास हिस्सा बना सकते हैं।
3. कोंकण रेलवे: समुद्र, झरने और पश्चिमी घाट का शानदार मेल
मुंबई और दक्षिण भारत के बीच फैला कोंकण रेलवे रूट अपने प्राकृतिक नजारों के लिए मशहूर है। महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों से गुजरने वाला यह मार्ग पश्चिमी घाट, नदियों, जंगलों और समुद्री इलाकों का शानदार मेल दिखाता है।कोंकण रेलवे के पूरे नेटवर्क में 91 सुरंगें और 1,800 से ज्यादा बड़े-छोटे पुल हैं। इसका सबसे लंबा पुल कर्नाटक के होन्नावर में शरावती नदी पर लगभग 2.06 किलोमीटर लंबा है, जबकि रत्नागिरी के पास पनवल नदी का वायाडक्ट करीब 64 मीटर ऊंचा है।मानसून में इस रूट की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। पहाड़ों से गिरते झरने, बादलों से ढके पश्चिमी घाट, हरे जंगल और नदियों को पार करती ट्रेन का नजारा यात्रियों को आकर्षित करता है। कर्नाटक में भी कोंकण रेलवे का मार्ग पश्चिमी घाट की तलहटी और तटीय क्षेत्रों से गुजरता है।गोवा और रत्नागिरी के आसपास ट्रेन की खिड़की से नारियल के पेड़, लाल मिट्टी वाले गांव और दूर तक फैली हरियाली दिखाई देती है। कई हिस्सों में ट्रेन एक सुरंग से निकलते ही अचानक किसी घाटी या नदी के पुल पर पहुंच जाती है।हालांकि मानसून के दौरान भारी बारिश से पहाड़ी रेलवे और कोंकण क्षेत्र में कभी-कभी संचालन प्रभावित हो सकता है। इसलिए यात्रा से पहले ट्रेन की ताजा स्थिति जरूर जांच लेना बेहतर है।अगर आप ऐसी यात्रा चाहते हैं जिसमें मंजिल पर पहुंचने की जल्दी से ज्यादा रास्ते का आनंद हो, तो कालका-शिमला, नीलगिरि माउंटेन रेलवे और कोंकण रेलवे शानदार विकल्प हैं। इन तीनों रूटों की खूबसूरती अलग-अलग है—कहीं हिमालय की वादियां हैं, कहीं चाय के बागान और बादल, तो कहीं पश्चिमी घाट के जंगल और झरने। यही वजह है कि इन रूटों पर ट्रेन का सफर अपने आप में एक पूरा पर्यटन अनुभव बन जाता है।
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