लाइफ स्टाइल

सेहत बचानी है तो इन तरीकों से करें पहचान

Kanchan Paikara
20 Jun 2026 2:42 PM IST
सेहत बचानी है तो इन तरीकों से करें  पहचान
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फल और सब्जियां देखने में आकर्षक लग सकती हैं,

Lifestyle लाइफ स्टाइल : आजकल बाजार में मिलने वाली सब्जियों और फलों की गुणवत्ता को लेकर लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि कई बार बाहर से देखने में सब्जियां और फल बेहद ताजे और चमकदार लगते हैं, लेकिन असल में उनकी गुणवत्ता संदिग्ध हो सकती है। रोजमर्रा की जरूरत की सब्जियों जैसे टमाटर, बैगन, लौकी और अन्य सब्जियों को जल्दी पकाने और बाजार में उतारने के लिए कुछ स्थानों पर गलत तरीकों के इस्तेमाल की बात सामने आती रही है।

जानकारों के अनुसार, कुछ व्यापारी और उत्पादक फसल को जल्दी तैयार करने या उन्हें जल्दी पका हुआ दिखाने के लिए रसायनों का उपयोग करते हैं। इनमें कैल्शियम कार्बाइड जैसे पदार्थ का नाम भी चर्चा में रहता है, जिसका उपयोग फलों को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए किया जाता है। हालांकि, खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार इस तरह के रसायनों का उपयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है और इसे नियंत्रित करने के लिए नियम भी बनाए गए हैं।

विशेषज्ञ बताते हैं कि रसायनों से पकाए गए फल और सब्जियां देखने में आकर्षक लग सकती हैं, लेकिन इनके सेवन से स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका रहती है। इससे पेट संबंधी समस्याएं, सिरदर्द, और लंबे समय में अन्य स्वास्थ्य जोखिम भी हो सकते हैं। इसी कारण खाद्य सुरक्षा विभाग समय-समय पर बाजारों में जांच अभियान चलाता है ताकि ऐसे मामलों पर रोक लगाई जा सके।

उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे सब्जियां और फल खरीदते समय केवल बाहरी चमक पर भरोसा न करें। कई बार प्राकृतिक रूप से पके हुए फल और सब्जियां उतनी चमकदार नहीं दिखतीं, लेकिन वे अधिक सुरक्षित मानी जाती हैं। खरीदारी के दौरान रंग, गंध और बनावट पर ध्यान देना जरूरी बताया जाता है।

कैल्शियम कार्बाइड जैसे रसायनों के उपयोग को लेकर कई बार प्रशासन द्वारा चेतावनी जारी की जाती है। नियमों के अनुसार, खाद्य पदार्थों को पकाने के लिए केवल सुरक्षित और मान्यता प्राप्त तरीकों का ही उपयोग किया जाना चाहिए। इसके बावजूद कुछ जगहों पर लापरवाही के मामले सामने आते रहते हैं, जिससे उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि लोगों को जागरूक होना जरूरी है, ताकि वे खुद भी ऐसे उत्पादों की पहचान कर सकें और सुरक्षित विकल्प चुन सकें। साथ ही, स्थानीय प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि वे नियमित निरीक्षण करें और नियमों का पालन सुनिश्चित कराएं।

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