लाइफ स्टाइल

फैमिली हिस्ट्री में किडनी रोग है तो हो जाएं सतर्क, जानें कितना है खतरा

Rajeshwari Nishad
26 Oct 2026 1:11 PM IST
फैमिली हिस्ट्री में किडनी रोग है तो हो जाएं सतर्क, जानें कितना है खतरा
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लाइफ स्टाइल: किडनी की बीमारी को अक्सर खराब खानपान, कम पानी पीने, बढ़ती उम्र या अस्वस्थ जीवनशैली से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ मामलों में किडनी से जुड़ी बीमारियों के पीछे आनुवंशिक कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि परिवार में माता-पिता, भाई-बहन या किसी करीबी रिश्तेदार को किडनी की गंभीर बीमारी रही है, तो अन्य सदस्यों में भी कुछ प्रकार के किडनी रोगों का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि परिवार में किसी को किडनी की बीमारी होने पर आपको भी यह बीमारी निश्चित रूप से होगी। सही समय पर जांच, संतुलित खानपान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कई जोखिमों को कम किया जा सकता है।
क्या किडनी की बीमारी आनुवंशिक भी हो सकती है?
किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। इसका मुख्य काम खून से अपशिष्ट पदार्थों और अतिरिक्त पानी को छानकर पेशाब के जरिए बाहर निकालना है। इसके अलावा किडनी शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन, ब्लड प्रेशर और लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।किडनी की बीमारी कई कारणों से हो सकती है। इनमें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, संक्रमण, कुछ दवाओं का प्रभाव और आनुवंशिक विकार शामिल हैं।कुछ बीमारियां माता-पिता से बच्चों में जीन के माध्यम से पहुंच सकती हैं। वहीं, कई परिवारों में किडनी रोग का जोखिम साझा जीवनशैली, खानपान और डायबिटीज जैसी समस्याओं के कारण भी बढ़ सकता है।
पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज से बढ़ सकता है खतरा
आनुवंशिक किडनी रोगों में पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज यानी पीकेडी एक प्रमुख बीमारी है। इसमें किडनी के भीतर तरल पदार्थ से भरी कई छोटी-बड़ी सिस्ट विकसित होने लगती हैं।समय के साथ ये सिस्ट बड़ी हो सकती हैं और किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित कर सकती हैं।ऑटोसोमल डॉमिनेंट पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज के मामलों में यदि माता या पिता में से किसी एक को बीमारी से जुड़ा जीन परिवर्तन है, तो प्रत्येक बच्चे में वह परिवर्तन विरासत में मिलने की संभावना लगभग 50 प्रतिशत होती है।हालांकि, बीमारी के लक्षण और गंभीरता हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं।
परिवार में डायबिटीज और हाई बीपी है तो रहें सतर्क
डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर किडनी की पुरानी बीमारी के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।यदि परिवार में इन बीमारियों का इतिहास है, तो व्यक्ति में इनके विकसित होने की संभावना बढ़ सकती है। लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ी रहने से किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है।इसी तरह अनियंत्रित ब्लड प्रेशर किडनी की रक्त वाहिकाओं पर दबाव डालता है, जिससे धीरे-धीरे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।इसलिए जिन लोगों के परिवार में डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या किडनी रोग का इतिहास है, उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच कराने पर ध्यान देना चाहिए।
किडनी की बीमारी के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
किडनी की बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरण में कई बार इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते।बीमारी बढ़ने पर कुछ लोगों में पैरों और टखनों में सूजन, अत्यधिक थकान, पेशाब में बदलाव, भूख कम लगना और मतली जैसी समस्याएं हो सकती हैं।कुछ मरीजों को पेशाब में झाग दिखाई दे सकता है, जो कभी-कभी पेशाब में प्रोटीन की अधिक मात्रा का संकेत होता है।हालांकि, ये लक्षण केवल किडनी रोग के कारण ही नहीं होते। इनकी वास्तविक वजह जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
कौन-कौन सी जांच कराना जरूरी है?
किडनी की स्थिति जानने के लिए डॉक्टर कुछ सामान्य जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।इनमें खून में क्रिएटिनिन की जांच और उससे अनुमानित ईजीएफआर प्रमुख हैं। ईजीएफआर से यह समझने में मदद मिलती है कि किडनी खून को कितनी अच्छी तरह फिल्टर कर रही है।इसके अलावा यूरिन एल्ब्यूमिन-क्रिएटिनिन रेशियो यानी यूएसीआर जांच से पेशाब में एल्ब्यूमिन की मात्रा का पता लगाया जा सकता है।जरूरत पड़ने पर डॉक्टर किडनी का अल्ट्रासाउंड और विशेष परिस्थितियों में आनुवंशिक जांच कराने की सलाह भी दे सकते हैं।
क्या आनुवंशिक किडनी रोग को रोका जा सकता है?
आनुवंशिक बीमारी से जुड़े जीन परिवर्तन को सामान्य जीवनशैली से समाप्त नहीं किया जा सकता। हालांकि, समय पर बीमारी की पहचान और उचित इलाज से कई मामलों में किडनी को होने वाले नुकसान की गति कम की जा सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना किडनी की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।इसके अलावा धूम्रपान से दूरी, नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित आहार भी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं।जिन लोगों में आनुवंशिक किडनी रोग की आशंका होती है, उनके लिए नेफ्रोलॉजिस्ट से परामर्श लेना उपयोगी हो सकता है।
किडनी को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
किडनी की सेहत बनाए रखने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों पर ध्यान देना जरूरी है।भोजन में नमक की मात्रा सीमित रखें और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, लेकिन पानी की जरूरत उम्र, मौसम, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।जिन लोगों को पहले से किडनी की बीमारी है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही पानी और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए।बिना चिकित्सकीय सलाह के लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं, विशेषकर कुछ एनएसएआईडी दवाओं का सेवन करने से बचना चाहिए।नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और वजन नियंत्रित रखना भी किडनी की सेहत के लिए लाभकारी हो सकता है।
परिवार में किडनी रोग होने पर क्या करें?
यदि आपके माता-पिता या भाई-बहन में किसी को किडनी की गंभीर बीमारी है, तो सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि उन्हें किस प्रकार का किडनी रोग है।हर किडनी रोग आनुवंशिक नहीं होता। इसलिए केवल पारिवारिक इतिहास के आधार पर स्वयं को बीमार मान लेना सही नहीं है।डॉक्टर पारिवारिक इतिहास, उम्र, अन्य बीमारियों और जांच रिपोर्ट के आधार पर यह तय कर सकते हैं कि आपको कितनी बार जांच करानी चाहिए।यदि परिवार में पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज या कोई अन्य पुष्टि किया गया आनुवंशिक रोग है, तो जेनेटिक काउंसलिंग की जरूरत भी पड़ सकती है।समय पर जांच से कम हो सकता है गंभीर बीमारी का खतराकिडनी की बीमारी का शुरुआती चरण में पता चलना बेहद महत्वपूर्ण है। कई मामलों में समय पर इलाज और उचित देखभाल से बीमारी की प्रगति को धीमा किया जा सकता है।
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