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Dampness से खराब हो रहा घर? इन छोटे उपायों से मानसून में बचाएं दीवारें

New Delhi नई दिल्ली : मानसून में झमाझम बारिश और सुहाना मौसम भले ही लोगों को पसंद आता है, लेकिन यही बारिश कई बार घरों के लिए परेशानी भी लेकर आती है। लगातार बारिश के कारण जहां सड़कों पर जलभराव की समस्या होती है, वहीं घरों की दीवारों में सीलन आना भी आम बात हो जाती है। दीवारों में जमा नमी न सिर्फ घर की खूबसूरती खराब करती है, बल्कि इससे फर्नीचर, कपड़े और अन्य सामान भी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।
बारिश के मौसम में लंबे समय तक बनी रहने वाली सीलन से घरों में बदबू आने लगती है और कई बार दीमक की समस्या भी शुरू हो जाती है। ऐसे में समय रहते सीलन को रोकना जरूरी हो जाता है। कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सबसे पहले जांचें पानी का रिसाव
अगर घर की दीवारों पर सीलन दिखाई दे रही है तो सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी है कि पानी कहां से आ रहा है। कई बार बाथरूम की पाइपलाइन, पानी की सप्लाई पाइप या नालियों में लीकेज के कारण दीवारों में नमी पहुंच जाती है।
इसके अलावा अगर घर की छत या ऊपर वाले फ्लोर से पानी रिस रहा है तो भी नीचे की दीवारों में सीलन आ सकती है। इसलिए आसपास की पाइपलाइन और लीकेज की जांच कराकर उसे तुरंत ठीक करवाना चाहिए।
घर में हवा का बेहतर इंतजाम करें
बारिश के दिनों में घर के अंदर नमी बढ़ जाती है, खासकर बंद कमरों में हवा का आवागमन कम होने से सीलन की समस्या बढ़ती है। ऐसे में जब भी मौसम साफ हो, घर की खिड़कियां और दरवाजे खोल देने चाहिए, ताकि ताजी हवा अंदर आ सके और नमी कम हो।
एक्जास्ट फैन और ह्यूमिडिटी कंट्रोल करें
घर के अंदर जमा नमी को कम करने के लिए एक्जास्ट फैन काफी मददगार साबित हो सकता है। खासकर बाथरूम और किचन में एक्जास्ट फैन लगाने से भाप और नमी बाहर निकल जाती है। इससे दीवारों पर सीलन बनने की संभावना कम हो जाती है।
बेकिंग सोडा से कम करें नमी
बेकिंग सोडा को नमी सोखने वाला पदार्थ माना जाता है। जिन कमरों में ज्यादा सीलन या नमी रहती है, वहां कटोरी में बेकिंग सोडा रख सकते हैं। यह कमरे की अतिरिक्त नमी को सोखने में मदद करता है और वातावरण को थोड़ा सूखा बनाए रखता है।
खिड़कियों और दरारों को करें सील
कई बार बाहरी दीवारों पर बनी खिड़कियों के आसपास छोटी-छोटी दरारों से बारिश का पानी अंदर पहुंच जाता है। इन दरारों को नजरअंदाज करने से दीवारों में सीलन बढ़ सकती है। इसलिए समय रहते इन जगहों पर सीलेंट या अन्य सामग्री लगाकर इन्हें बंद करना जरूरी है।
वाटरप्रूफिंग भी है जरूरी
अगर घर में बार-बार सीलन की समस्या आती है तो केवल घरेलू उपाय काफी नहीं होते। ऐसे में दीवारों पर वाटरप्रूफिंग केमिकल या वाटर प्रोटेक्शन ट्रीटमेंट करवाना बेहतर विकल्प हो सकता है। इससे बारिश के पानी को दीवारों में जाने से रोका जा सकता है और लंबे समय तक सीलन की समस्या से राहत मिल सकती है।
मानसून में घर को सुरक्षित रखने के लिए समय-समय पर दीवारों, पाइपलाइन और छत की जांच करना जरूरी है। थोड़ी सावधानी और सही उपाय अपनाकर बारिश के मौसम में घर को सीलन और नुकसान से बचाया जा सकता है।





