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लाइफस्टाइल । गर्मियों का मौसम आते ही घरों में आम का अचार बनाने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। भारतीय रसोई में आम के अचार का विशेष स्थान है। दाल-चावल, रोटी, पराठे और कई दूसरे व्यंजनों के साथ आम का अचार खाने का स्वाद बढ़ा देता है। यही वजह है कि कई घरों में एक बार बड़ी मात्रा में अचार तैयार किया जाता है, ताकि महीनों तक इसका आनंद लिया जा सके। लेकिन कई बार पूरी मेहनत से तैयार किया गया अचार कुछ ही दिनों या हफ्तों में खराब होने लगता है। अचार के ऊपर सफेद, हरी या काली परत दिखाई देने लगती है। यह फफूंदी होने का संकेत हो सकता है।
ऐसी स्थिति में अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या अचार के ऊपर जमी फफूंदी को हटाकर बाकी अचार खाया जा सकता है या फिर पूरे अचार को फेंक देना चाहिए। खाद्य सुरक्षा के लिहाज से यह सवाल बेहद महत्वपूर्ण है। अचार में फफूंदी लगने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें नमी, गलत भंडारण, गीले बर्तनों का इस्तेमाल और अचार तैयार करने की प्रक्रिया में बरती गई लापरवाही शामिल हैं।
आम के अचार में फफूंदी क्यों लगती है?
आम के अचार में फफूंदी लगने की सबसे बड़ी वजहों में नमी शामिल है। अचार तैयार करते समय अगर कच्चे आमों को धोने के बाद अच्छी तरह नहीं सुखाया गया है, तो उनमें मौजूद पानी खराब होने का खतरा बढ़ा सकता है।
इसके अलावा, अचार रखने वाले जार में नमी होने से भी फफूंदी पनप सकती है। कई बार लोग अचार निकालने के लिए गीले चम्मच का इस्तेमाल कर लेते हैं। इससे अचार में अतिरिक्त पानी पहुंच जाता है और सूक्ष्मजीवों को बढ़ने का अवसर मिल सकता है।
अचार के टुकड़े तेल में पूरी तरह डूबे नहीं होने पर भी खराब होने की आशंका बढ़ सकती है। पारंपरिक तेल वाले अचार में तेल की परत हवा के सीधे संपर्क को कम करने में मदद करती है। हालांकि, केवल तेल मौजूद होने से अचार पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा, इसकी गारंटी नहीं होती।
क्या फफूंदी हटाकर बाकी अचार खा सकते हैं?
यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। कई लोग अचार के ऊपर सफेद या हरी फफूंदी दिखाई देने पर केवल प्रभावित हिस्से को निकाल देते हैं और बाकी अचार का इस्तेमाल जारी रखते हैं।लेकिन खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों के सामान्य दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि अचार में वास्तव में फफूंदी लग गई है, तो केवल ऊपर की परत हटाकर बाकी अचार खाना सुरक्षित नहीं माना जाता।फफूंदी के महीन धागे दिखाई देने वाले हिस्से से आगे तक फैल सकते हैं। कुछ प्रकार की फफूंदी हानिकारक विषैले पदार्थ भी बना सकती हैं, जिन्हें माइकोटॉक्सिन कहा जाता है।
इसलिए यदि अचार में रोएंदार सफेद, हरी या काली फफूंदी दिखाई दे रही है, तो पूरे प्रभावित जार का अचार फेंक देना सबसे सुरक्षित विकल्प है। उसे चखकर जांचने या फफूंदी हटाकर खाने से बचना चाहिए।
हालांकि, अचार के ऊपर दिखाई देने वाली हर सफेद परत फफूंदी नहीं होती। कभी-कभी नमक के क्रिस्टल या तेल के जमने से भी सफेद पदार्थ दिखाई दे सकता है। यदि परत की पहचान स्पष्ट नहीं है, तो अचार खाने का जोखिम नहीं लेना चाहिए।
अचार बनाने से पहले आम को अच्छी तरह सुखाएं
अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए सबसे जरूरी बात है कि आमों में अतिरिक्त नमी न रहे। अचार बनाने से पहले कच्चे आमों को साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए।इसके बाद आमों को साफ कपड़े से पोंछकर अच्छी तरह सुखाना चाहिए। आम काटने के लिए इस्तेमाल होने वाला चाकू और कटिंग बोर्ड भी साफ तथा सूखा होना चाहिए।आम के टुकड़ों में पानी रह जाने से अचार के खराब होने की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए अचार बनाने की प्रक्रिया में साफ-सफाई और सूखे उपकरणों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
सही मात्रा में नमक और तेल का इस्तेमाल जरूरी
पारंपरिक आम के अचार में नमक और तेल का इस्तेमाल केवल स्वाद बढ़ाने के लिए नहीं किया जाता, बल्कि ये अचार के संरक्षण में भी भूमिका निभाते हैं।नमक पर्याप्त मात्रा में होने पर सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को सीमित करने में मदद कर सकता है। वहीं तेल की परत अचार के टुकड़ों को हवा के सीधे संपर्क से बचाने में सहायक हो सकती है।लेकिन नमक या तेल की मात्रा अनुमान से कम-ज्यादा करने पर अचार की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसलिए किसी विश्वसनीय और जांची हुई अचार बनाने की विधि का पालन करना बेहतर होता है।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि सभी प्रकार के अचार लंबे समय तक कमरे के तापमान पर सुरक्षित नहीं रहते। अचार की सामग्री, अम्लता और तैयार करने की विधि के अनुसार भंडारण की जरूरत अलग हो सकती है।
अचार रखने के लिए सही जार चुनें
अचार को सुरक्षित रखने में जार की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अचार रखने के लिए साफ, खाद्य-सुरक्षित कांच के जार का इस्तेमाल करना अच्छा विकल्प है।जार में अचार भरने से पहले उसे अच्छी तरह साफ करके पूरी तरह सुखाना चाहिए। ढक्कन भी साफ और सूखा होना जरूरी है।
अचार निकालने के बाद जार का ढक्कन अच्छी तरह बंद कर देना चाहिए, ताकि उसमें धूल और अतिरिक्त नमी प्रवेश न कर सके।जार को सीधे धूप, अत्यधिक गर्मी और नमी वाले स्थानों से दूर रखना चाहिए, जब तक कि अचार की निर्धारित विधि में धूप में रखने का निर्देश न दिया गया हो।
गीले चम्मच से अचार निकालने की गलती न करेंअचार खराब होने का एक सामान्य कारण गीले या गंदे चम्मच का इस्तेमाल है। कई बार खाना खाते समय लोग उसी चम्मच से अचार निकाल लेते हैं, जिससे दूसरे खाद्य पदार्थ भी निकाले गए होते हैं।
ऐसा करने से अचार में पानी, भोजन के कण और सूक्ष्मजीव पहुंच सकते हैं। इससे अचार की गुणवत्ता और सुरक्षित रहने की अवधि प्रभावित हो सकती है।इसलिए अचार निकालने के लिए हमेशा साफ और पूरी तरह सूखे चम्मच का इस्तेमाल करें। अचार निकालने के बाद जार को तुरंत बंद कर दें।
अचार खराब होने के संकेतों को नजरअंदाज न करें
अचार के ऊपर फफूंदी दिखाई देना खराब होने का एक प्रमुख संकेत है। इसके अलावा असामान्य दुर्गंध, अनचाही गैस बनना, झाग दिखाई देना या बनावट में असामान्य बदलाव भी खराब होने की चेतावनी हो सकते हैं।
हालांकि, केवल गंध और रंग सामान्य होने का मतलब यह नहीं है कि अचार पूरी तरह सुरक्षित है। कुछ हानिकारक सूक्ष्मजीव बिना स्पष्ट संकेत दिए भी मौजूद हो सकते हैं।अगर अचार की सुरक्षा को लेकर संदेह हो, तो उसका सेवन नहीं करना चाहिए।
आम का अचार लंबे समय तक स्वादिष्ट बना रहे, इसके लिए सही सामग्री, स्वच्छता, नमी से बचाव और उचित भंडारण बेहद जरूरी हैं। थोड़ी सावधानी से अचार के खराब होने का खतरा कम किया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फफूंदी लगे अचार को बचाने के चक्कर में स्वास्थ्य के साथ जोखिम नहीं लेना चाहिए।
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