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खून में छिपा Health का कोड: वैज्ञानिकों ने खोजे 750 नए जीन

Harrison
11 Oct 2025 8:10 PM IST
खून में छिपा  Health का कोड: वैज्ञानिकों ने खोजे 750 नए जीन
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Lifestyle,लाइफस्टाइल: मानव शरीर के खून की एक-एक बूंद में हमारी सेहत का एक राज छुपा हो सकता है — और अब वैज्ञानिकों ने इसे और करीब से जानने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। हाल ही में एक अध्ययन में लगभग 750 ऐसे जीन (genes) की पहचान की गई है, जो खून में मौजूद विभिन्न मेटाबॉलाइट्स (metabolites) जैसे लिपिड्स, अमीनो एसिड आदि की मात्रा को नियंत्रित करते हैं।
इस खोज से यह स्पष्ट होता है कि हमारे खून के अन्दर कई ऐसे आनुवंशिक तंत्र काम करते हैं, जो शरीर की ऊर्जा, मेटाबॉलिज़्म और रोग प्रतिरोधक क्षमता को नियंत्रित करते हैं।
अध्ययन की पृष्ठभूमि और निष्कर्ष
इस शोध को बर्लिन इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (Berlin Institute of Health) और लंदन की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी (Queen Mary University) के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया है। उन्होंने करीब 4.5 लाख (450,000) व्यक्तियों के आनुवंशिक डेटा का विश्लेषण किया, जिनमें यूरोपीय, अफ्रीकी और एशियाई मूल के लोग शामिल थे।
उनका लक्ष्य यह जानना था कि कौन-कौन से जीन खून में पाए जाने वाले 250 मेटाबॉलाइट्स (lipids, amino acids आदि) को नियंत्रित करते हैं। परिणामस्वरूप उन्होंने 29,824 जीन-लाइगैंड (locus-metabolite) संबंध खोजे, जो 753 आनुवंशिक क्षेत्रों (regions) से जुड़े हैं।
इनमें से कई जीन अब तक मेटाबॉलिज़्म या रोग नियंत्रण से जुड़े नहीं माने जाते थे। उदाहरण के रूप में, एक जीन VEGFA को इस शोध में HDL (अधिक घनी तरह की “अच्छे” कोलेस्ट्रॉल) पर असर डालने वाला पाया गया, जो हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि ये जीन-रूपांतर बीमारी जोखिम, डायग्नॉस्टिक जांच और नयी दवाओं की खोज में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
क्यों है यह खोज मायने रखती?
अनुवांशिक नियंत्रण की स्पष्टता:
अब यह समझना संभव हो सकेगा कि खून में पाये जाने वाले मेटाबॉलाइट्स किस जीन के द्वारा नियंत्रित होते हैं, और किस इंडिविजुअल में किस तरह परिवर्तन हो सकते हैं।
रिस्क पूर्वानुमान:
अगर किसी व्यक्ति में स्वास्थ्य से जुड़े विशेष जीन पैटर्न पाए जाते हैं, तो यह अनुमान लगाया जा सकता है कि वह किस बीमारियों की ओर अधिक संवेदनशील है। इसका उपयोग प्रीसिजन मेडिसिन (व्यक्ति-विशिष्ट उपचार) में किया जा सकता है।
नवीन दवाओं का विकास:
कुछ जीन (जिन्हें पहले स्वास्थ्य संबंधी भूमिका नहीं मानी जाती थी) दवा टारगेट बनने की संभावना दिखाते हैं। जैसे VEGFA जीन का HDL पर प्रभाव — इसे हृदय रोगों के इलाज में इस्तेमाल किया जा सकता है।
अनुक्रमण की सार्वभौमिकता:
यह शोध अलग-अलग समुदायों (ancestries) और लिंगों में समान रूप से लागू पाया गया। यानी यह खोज व्यापक रूप से लोगों पर भी लागू हो सकती है।
सीमाएँ और चुनौतियाँ
यह शोध सह-सम्बंध (association) स्थापित करता है, न कि कारण-प्रभाव (causation)।
किसी व्यक्ति में जीन होने का मतलब यह नहीं कि वह बिमार होगा — जीवनशैली, पर्यावरण और अन्य कारक भी भूमिका निभाते हैं।
नए जीनों को चिकित्सा या दवा में उपयोग करने तक अभी और परीक्षण करना बाकी है।
अलग-अलग जनसंस्थान (populations) में जिनों का असर अलग हो सकता है — इसलिए स्थानीय अध्ययन ज़रूरी होंगे।
आगे की राह
इन 750 जीनों के कार्य संरचनात्मक, क्रियात्मक और पाथोलॉजी से जुड़े मापदंडों को समझने के लिए लैब अध्ययन होंगे।
इन जीनों में कैसे परिवर्तन (variants) होते हैं, इसका अध्ययन किया जाएगा — कौन से वेरिएंट जोखिम बढ़ाते हैं।
आधार डेटा को आधार पर रोकथाम चिकित्सा, निजीकृत उपचार और स्वास्थ्य निगरानी को बेहतर बनाना।
विभिन्न अध्ययनों में भारतीय, एशियाई और अन्य समुदायों में इन जीनों की भूमिका की समीक्षा करना।
हमारे खून की एक-एक बूंद, जीनों की एक जटिल दुनिया समेटे हुए है — और अब वैज्ञानिकों ने 750 ऐसे जीनों की खोज की है, जो मेटाबॉलिज़्म से जुड़े मोलिक्यूल्स को नियंत्रित करते हैं। यह खोज स्वास्थ्य विज्ञान में एक बड़ा मोड़ हो सकती है — बीमारी जोखिम को बेहतर पहचानने, दवाओं की खोज और चिकित्सा को अधिक व्यक्तिगत बनाने में।
अगर आप चाहें, तो मैं इस शोध की मूल जर्नल लेख, भारत में इसका महत्व या इन जीनों से जुड़े स्वास्थ्य सुझाव भी भेज सकता हूँ — क्या चाहेंगे?
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