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हर पत्नी की भावनाओं को छू गया हरियाणवी गाना, सोशल मीडिया पर धमाल

Saba Naaz
31 July 2026 5:45 PM IST
हर पत्नी की भावनाओं को छू गया हरियाणवी गाना, सोशल मीडिया पर धमाल
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लाइफ स्टाइल डेस्क: हरियाणा की लोक संस्कृति में लोकगीतों की अपनी एक अलग पहचान है। गांव की चौपाल से लेकर शादी-ब्याह और तीज-त्योहारों तक लोकगीत लोगों के जीवन का अहम हिस्सा रहे हैं। इन्हीं पारंपरिक गीतों में एक ऐसा गीत है, जिसने अब सोशल मीडिया की दुनिया में भी अपनी जगह बना ली है। हरियाणा का मशहूर लोकगीत 'मेरे ही करम में बावलिया लिखा था' इन दिनों रील्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खूब वायरल हो रहा है। इस गीत के बोल शादीशुदा जीवन की छोटी-छोटी नोकझोंक, पति की आदतों और पत्नी की मजाकिया शिकायतों को बेहद खूबसूरत अंदाज में पेश करते हैं।

हरियाणवी संस्कृति में यह गीत काफी पुराना माना जाता है। सालों से गांवों में महिलाएं शादी समारोहों, तीज और अन्य पारंपरिक आयोजनों के दौरान इसे गाती आ रही हैं। ढोलक, मंजीरे और थाली की ताल के साथ जब महिलाएं इस गीत को सामूहिक रूप से गाती हैं तो माहौल में हंसी और उत्साह भर जाता है। यही वजह है कि यह गीत सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि हरियाणा की पारंपरिक संस्कृति और रिश्तों की मिठास को भी दर्शाता है।

इस लोकगीत में एक पत्नी अपने पति को प्यार भरे अंदाज में 'बावलिया' कहती है। हरियाणवी भाषा में बावलिया या बावला शब्द का अर्थ होता है नासमझ, सीधा-साधा या भोला व्यक्ति। गीत में पत्नी अपने पति की कुछ आदतों और उनकी मासूम हरकतों को लेकर शिकायत करती है, लेकिन यह शिकायत गुस्से वाली नहीं बल्कि हंसी-मजाक और अपनापन लिए होती है।

गीत के बोलों में पत्नी कहती है कि उसकी सास के कई बेटे हैं, लेकिन उसके भाग्य में यही नासमझ पति लिखा था। इसके बाद वह पति की छोटी-छोटी गलतियों और भोलेपन को मजाकिया तरीके से बताती है। यही अंदाज इस गीत को खास बनाता है, क्योंकि इसमें पति-पत्नी के रिश्ते की वह मिठास दिखाई देती है, जिसमें तकरार भी है और प्यार भी।

हरियाणवी लोकगीतों की सबसे बड़ी खासियत उनकी सादगी और बेबाक शैली होती है। इनमें गांव के जीवन, पारिवारिक रिश्तों और रोजमर्रा की बातों को मनोरंजक तरीके से पेश किया जाता है। 'मेरे ही करम में बावलिया लिखा था' भी इसी परंपरा का हिस्सा है। यह गीत शादीशुदा जिंदगी की छोटी-छोटी परेशानियों को हंसी में बदल देता है और सुनने वालों को रिश्तों की खूबसूरती का एहसास कराता है।

शादी समारोहों में महिलाएं इस गीत पर पारंपरिक पोशाक पहनकर नाचती-गाती हैं। हरियाणा की पारंपरिक दामण, कुर्ती और गोटा लगी चुनरी पहनकर महिलाएं जब ढोलक की थाप पर इस गीत को गाती हैं तो पूरा माहौल उत्सव जैसा बन जाता है। यही वजह है कि यह गीत पीढ़ियों से लोगों के बीच लोकप्रिय बना हुआ है।

हालांकि इस लोकगीत के मूल रचनाकार या पहली बार इसे किसने लिखा और गाया, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। लोक परंपराओं में ऐसे कई गीत होते हैं जो किसी एक व्यक्ति की रचना नहीं बल्कि समाज की सामूहिक धरोहर बन जाते हैं। पीढ़ी-दर-पीढ़ी गाते हुए ये गीत लोगों की यादों और संस्कृति का हिस्सा बन जाते हैं।

सोशल मीडिया के दौर में इस गीत को नया जीवन मिला है। इंस्टाग्राम रील्स और अन्य प्लेटफॉर्म पर लोग इस गाने पर वीडियो बना रहे हैं। खासकर शादी और पारिवारिक कार्यक्रमों में इस गीत के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। नई पीढ़ी भी अब इन पारंपरिक लोकगीतों से जुड़ रही है और हरियाणा की लोक संस्कृति को देशभर में पहचान मिल रही है।

'मेरे ही करम में बावलिया लिखा था' सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते में छिपे प्यार, मजाक और अपनापन की कहानी है। यही कारण है कि वर्षों पुराना यह लोकगीत आज भी लोगों के दिलों में जगह बनाए हुए है और सोशल मीडिया पर एक बार फिर अपनी पहचान बना रहा है।

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