लाइफ स्टाइल

पूजा की पुरानी चुनरी को ऐसे दें नया रूप

Ratna Netam
6 Oct 2026 9:24 PM IST
पूजा की पुरानी चुनरी को ऐसे दें नया रूप
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लाइफ स्टाइल : नवरात्रि, दुर्गा पूजा या किसी विशेष धार्मिक अवसर पर माता रानी को चुनरी चढ़ाने की परंपरा काफी पुरानी है। बहुत से लोग मंदिर या घर की पूजा में लाल, पीली या गुलाबी चुनरी अर्पित करते हैं। समय के साथ जब पूजा की चुनरी पुरानी हो जाती है, तो अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि इसका क्या किया जाए। धार्मिक आस्था से जुड़ी वस्तु होने के कारण इसे सामान्य कपड़े की तरह फेंकना कई लोग उचित नहीं मानते। ऐसे में पुरानी चुनरी को सम्मानपूर्वक दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है।सबसे आसान तरीका है कि माता की पुरानी चुनरी को घर के मंदिर में सजावट के लिए इस्तेमाल किया जाए। अगर चुनरी साफ और अच्छी स्थिति में है तो इसे मंदिर की चौकी, माता की प्रतिमा या तस्वीर के पीछे सजाया जा सकता है। इससे पूजा स्थान सुंदर भी दिखाई देता है और धार्मिक वस्तु का सम्मान भी बना रहता है।
पुरानी चुनरी को पूजा की चौकी पर बिछाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि घर में नियमित रूप से पूजा होती है तो इसे साफ करके मोड़ लें और पूजा के समय चौकी पर बिछाएं। इसके ऊपर माता की प्रतिमा, कलश या पूजा सामग्री रखी जा सकती है। हालांकि ध्यान रखें कि चुनरी बहुत अधिक फटी या खराब न हो।अगर चुनरी का कपड़ा मजबूत है तो उससे छोटी पूजा पोटली भी बनाई जा सकती है। इसमें रोली, मौली, अक्षत, सुपारी या अन्य पूजा सामग्री रखी जा सकती है। ऐसी पोटली घर के मंदिर में रखने के साथ यात्रा के दौरान पूजा सामग्री ले जाने में भी काम आ सकती है।
माता की चुनरी से छोटी थैली बनाकर उसमें धार्मिक पुस्तकें, जप माला या पूजा से जुड़ी छोटी वस्तुएं भी रखी जा सकती हैं। इससे चुनरी का उपयोग लंबे समय तक होता रहता है और उसे फेंकने की जरूरत नहीं पड़ती।कई लोग माता की चुनरी को घर के मंदिर के पर्दे के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं। यदि चुनरी का आकार बड़ा है तो उसे मंदिर के आगे हल्के पर्दे की तरह लगाया जा सकता है। खासतौर पर लाल या सुनहरी बॉर्डर वाली चुनरी पूजा स्थान को आकर्षक रूप दे सकती है।यदि चुनरी बहुत बड़ी है तो उसके अच्छे हिस्से काटकर आसन का कवर बनाया जा सकता है। पूजा के दौरान बैठने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले छोटे आसन पर इसे लगाया जा सकता है। यह तरीका उन चुनरियों के लिए उपयोगी है जिनका कुछ हिस्सा खराब हो गया हो लेकिन बाकी कपड़ा ठीक हो।
पुरानी चुनरी को माता की तस्वीर या धार्मिक फ्रेम की सजावट के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। चुनरी की सुनहरी किनारी, गोटा या डिजाइन वाले हिस्से को काटकर फोटो फ्रेम के आसपास लगाया जा सकता है। इससे धार्मिक वस्तु को नया रूप मिल जाता है।कुछ लोग चुनरी का इस्तेमाल त्योहारों के दौरान तोरण या सजावटी पट्टी बनाने में भी करते हैं। इसके लिए चुनरी के कपड़े से छोटे त्रिकोण या पट्टियां काटकर धागे में जोड़ी जा सकती हैं। इन्हें घर के मंदिर या पूजा कक्ष के दरवाजे पर लगाया जा सकता है।अगर माता की चुनरी काफी पुरानी हो चुकी है और उसका दोबारा इस्तेमाल संभव नहीं है, तो उसे सम्मानपूर्वक अलग रखना बेहतर माना जाता है। कई लोग ऐसी धार्मिक वस्तुओं को साफ कपड़े में लपेटकर किसी पवित्र स्थान पर रखते हैं। कुछ परंपराओं में प्राकृतिक तरीके से विसर्जन का भी उल्लेख मिलता है, लेकिन पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए सिंथेटिक कपड़े या सजावटी सामग्री को नदी, तालाब या अन्य जलस्रोत में नहीं डालना चाहिए।
पुरानी चुनरी को पेड़ की जड़ के पास छोड़ना भी हर स्थिति में सही नहीं माना जा सकता, क्योंकि कई चुनरियों में प्लास्टिक, चमकीली पन्नी, धातु की सजावट या सिंथेटिक धागे होते हैं। इससे पर्यावरण को नुकसान हो सकता है। बेहतर है कि उपयोग योग्य हिस्सा अलग कर लें और बाकी सामग्री का जिम्मेदारी से निपटान करें।माता की चुनरी से छोटे रुमाल या पूजा कपड़े भी बनाए जा सकते हैं। इनका इस्तेमाल मंदिर की मूर्तियों, पूजा की चौकी या धार्मिक पुस्तकों को ढकने में किया जा सकता है। ध्यान रखें कि ऐसे कपड़े केवल पूजा से जुड़े काम में ही इस्तेमाल किए जाएं।यदि चुनरी पर माता का नाम, धार्मिक मंत्र या देवी की तस्वीर छपी हो तो उसे काटने से बचना बेहतर है। ऐसे कपड़े को पूरा ही इस्तेमाल करना अधिक सम्मानजनक माना जाता है। इसे मंदिर की सजावट, धार्मिक पुस्तक ढकने या पूजा सामग्री रखने के लिए उपयोग किया जा सकता है।
कई परिवारों में माता की चुनरी को शुभ स्मृति के रूप में संभालकर रखने की परंपरा भी होती है। खासतौर पर किसी मनोकामना पूरी होने, नवदुर्गा पूजा, कन्या पूजन या विशेष धार्मिक अवसर पर चढ़ाई गई चुनरी को लोग वर्षों तक संभालकर रखते हैं। ऐसी चुनरी को साफ और सूखी जगह पर कपड़े की पोटली में सुरक्षित रखा जा सकता है।पुरानी चुनरी का उपयोग करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात साफ-सफाई और श्रद्धा है। यदि चुनरी पूजा के दौरान इस्तेमाल हुई है तो उसे बहुत गंदे या सामान्य घरेलू कामों में इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताएं अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं, इसलिए घर की परंपरा के अनुसार उसका उपयोग करना बेहतर रहता है।इस तरह माता की पुरानी चुनरी को फेंकने के बजाय मंदिर सजावट, पूजा चौकी, पोटली, पर्दा, आसन कवर, धार्मिक पुस्तकों के कवर या स्मृति के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे धार्मिक आस्था का सम्मान भी बना रहता है और कपड़े का उपयोग भी सार्थक तरीके से हो जाता है।
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