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लाइफ स्टाइल
रोगों से दूर रहने के लिए अपनाएं चावल पकाने का ये तरीका
Kajal Dubey
19 Sept 2021 6:05 PM IST

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विटामिन और मिनरल से भरपूर चावल पूरे भारत में खूब खाया जाता है
जनता से रिश्ता वेबडेस्क। विटामिन और मिनरल से भरपूर चावल पूरे भारत में खूब खाया जाता है. कार्बोहाइड्रेट युक्त चावल घंटों तक भूख को शांत रख सकता है. तेजी से पकने के चलते चावल उन लोगों का फेवरेट है, जो डेली रूटीन में बहुत ज्यादा व्यस्त रहते हैं. लेकिन चावल पर हुआ एक हालिया शोध आपकी चिंता बढ़ा सकता है.
एक नई स्टडी के मुताबिक, पूरी तरह से बॉइल ना हुए यानी अधपके चावल खाने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. दरअसल मौजूदा दौर के ज्यादातर फूड कैमिकल के बिना तैयार नहीं होते हैं और हम इन्हें बड़ी लापरवाही के साथ खा रहे हैं. ये भविष्य में हेल्थ से जुड़ी कई प्रकार की समस्याओं को बढ़ावा दे सकते हैं.
इंग्लैंड में क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट द्वारा की गई इस स्टडी के अनुसार, फसल को कीड़ों से बचाने और अच्छा पैदावार के लिए जिन कैमिकल्स और कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है, वो चावल को बेहद खतरनाक बना देते हैं. ये कई मामलों में अर्सेनिक पॉइजनिंग का कारण भी बन सकता है.
इस पर एक नहीं बल्कि कई स्टडीज मौजूद हैं जो दावा करती हैं कि चावल एक कार्सिनोजेन है जो कैंसर को बढ़ावा देता है. 90 के दशक में महिलाओं पर हुई कैलिफॉर्निया टीचर्स स्टडी में ब्रेस्ट कैंसर समेत कई अन्य प्रकार के कैंसर के संभावित खतरों की पहचान की गई थी. इसके फॉलोअप के दौरान कुल 9,400 वॉलंटियर्स कैंसर पीड़ित पाए गए थे, जिसमें ब्रेस्ट और लंग कैंसर के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा थी.
अर्सेनिक एक कैमिकल होता है जो कई प्रकार के मिनरल्स में पाया जाता है. इसका प्रयोग इंडस्ट्रियल इंसेक्टिसाइड्स और पेस्टिसाइड्स में किया जाता है. कई ऐसे भी देश हैं जहां जमीन के भीतर मौजूद पानी का अर्सेनिकल लेवल बहुत ज्यादा है. इससे अर्सेनिक पॉइजनिंग की दिक्कत बढ़ सकती है जो उल्टी, पेट दर्द, डायरिया और यहां तक कैंसर को भी ट्रिगर कर सकता है.
स्टडी के मुताबिक, चावल में अर्सेनिक लेवल बहुत ज्यादा होता है और यदि इसे ठीक से ना पकाया जाए तो ये बेहद जानलेवा साबित हो सकता है. स्टडी में चावल से होने वाले कैंसर से बचने का तरीका भी बताया गया है. शोधकर्ताओं के मुताबिक, चावल को पकाने से पहले उसे रातभर पानी में भीगने के लिए छोड़ दें. ऐसा करने से इसका टॉक्सिन लेवल 80 प्रतिशत तक कम हो सकता है.
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