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Lifestyle लाइफस्टाइल : वजन बढ़ने या घटने को लेकर अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि रोटी खाने से वजन बढ़ता है या चावल खाने से। कई लोग वजन कम करने के लिए चावल पूरी तरह छोड़ देते हैं, जबकि कुछ लोग रोटी को भी मोटापा बढ़ाने वाला भोजन मानते हैं। लेकिन पोषण विशेषज्ञों के अनुसार केवल रोटी या चावल को वजन बढ़ने का जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। असल में वजन पर सबसे ज्यादा असर पूरे दिन में ली जाने वाली कुल कैलोरी, भोजन की मात्रा, उसकी गुणवत्ता और शारीरिक गतिविधि का पड़ता है।
रोटी और चावल दोनों कार्बोहाइड्रेट के स्रोत
रोटी और चावल दोनों ही मुख्य रूप से स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थ हैं और शरीर को ऊर्जा उपलब्ध कराते हैं। स्वस्थ और संतुलित आहार में ऐसे खाद्य पदार्थों को पूरी तरह हटाने की जरूरत नहीं होती। NHS के अनुसार स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थों को संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है और जहां संभव हो, ज्यादा फाइबर वाले साबुत अनाज का चुनाव करना बेहतर होता है।
इसलिए यह कहना कि केवल चावल खाने से मोटापा बढ़ता है या केवल रोटी खाने से वजन बढ़ता है, वैज्ञानिक रूप से सही निष्कर्ष नहीं है। भोजन की मात्रा और उसके साथ खाई जाने वाली दूसरी चीजें भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।
ज्यादा मात्रा में खाने पर दोनों बढ़ा सकते हैं वजन
अगर कोई व्यक्ति अपनी जरूरत से ज्यादा कैलोरी रोजाना लेता है और शारीरिक गतिविधि कम है, तो समय के साथ वजन बढ़ सकता है। इसका मतलब यह है कि चाहे अतिरिक्त कैलोरी रोटी से आए या चावल से, दोनों ही स्थिति में वजन बढ़ सकता है।
कई बार समस्या मुख्य भोजन से ज्यादा उसकी मात्रा और साथ में इस्तेमाल होने वाली चीजों से पैदा होती है। उदाहरण के लिए चावल की बड़ी प्लेट के साथ तली हुई चीजें, ज्यादा तेल वाली दाल या करी और मीठे पेय लेने से भोजन की कुल कैलोरी काफी बढ़ सकती है। इसी तरह रोटी के साथ घी, मक्खन, तला हुआ भोजन या ज्यादा कैलोरी वाली ग्रेवी लेने पर भी कुल कैलोरी बढ़ सकती है।
NHS भी बताता है कि स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थ अपने आप में सबसे बड़ा मोटापा बढ़ाने वाला कारण नहीं हैं, लेकिन इन्हें जरूरत से ज्यादा खाना आसान हो सकता है और खाना पकाने या परोसने में अतिरिक्त वसा मिलाने से कैलोरी बढ़ जाती है।
वजन कम करने वालों के लिए कौन बेहतर?
अगर लक्ष्य वजन नियंत्रित करना है तो रोटी और चावल में से किसी एक को हमेशा के लिए छोड़ना जरूरी नहीं है। बेहतर विकल्प यह है कि मात्रा पर ध्यान दिया जाए और ज्यादा फाइबर वाले विकल्प चुने जाएं।
गेहूं की साबुत या होल-व्हीट रोटी में फाइबर की मात्रा अधिक हो सकती है। इसी तरह सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस या अन्य साबुत अनाज वाले विकल्प लिए जा सकते हैं। साबुत अनाज अधिक फाइबर उपलब्ध कराते हैं और फाइबर पेट को ज्यादा देर तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है।
Harvard की Healthy Eating Plate भी भोजन में साबुत अनाज को प्राथमिकता देने और रिफाइंड अनाज की मात्रा सीमित रखने की सलाह देती है।
सफेद चावल से क्यों सावधान रहने की सलाह दी जाती है?
सफेद चावल रिफाइंड अनाज का उदाहरण है। प्रसंस्करण के दौरान अनाज की बाहरी परत हटने से फाइबर और कुछ पोषक तत्व कम हो जाते हैं। Harvard के अनुसार सफेद चावल जैसे रिफाइंड अनाज रक्त शर्करा और इंसुलिन पर साबुत अनाज की तुलना में अधिक तेज प्रभाव डाल सकते हैं।
इसका मतलब यह नहीं कि सफेद चावल पूरी तरह खराब है या इसे हर व्यक्ति को बंद कर देना चाहिए। स्वस्थ व्यक्ति संतुलित मात्रा में चावल खा सकता है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति वजन नियंत्रित करना चाहता है तो हिस्से की मात्रा, चावल की किस्म और पूरी प्लेट में सब्जियों तथा प्रोटीन की मात्रा पर ध्यान देना ज्यादा उपयोगी होगा।
रोटी खाते समय भी इन बातों का रखें ध्यान
वजन कम करने के लिए रोटी को स्वस्थ विकल्प मानकर उसकी संख्या बहुत ज्यादा बढ़ा देना भी सही नहीं है। रोटी कितनी खानी है, यह व्यक्ति की उम्र, शरीर, शारीरिक गतिविधि और पूरे दिन के भोजन पर निर्भर करता है।
साथ ही रोटी बनाते समय बहुत ज्यादा तेल या घी का इस्तेमाल करने से उसकी कुल कैलोरी बढ़ सकती है। इसलिए सामान्य तौर पर कम अतिरिक्त वसा के साथ बनी होल-व्हीट रोटी एक अच्छा विकल्प हो सकती है।
प्लेट में क्या होना चाहिए?
वजन नियंत्रित करने के लिए केवल रोटी और चावल की तुलना करने के बजाय पूरी प्लेट पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है। भोजन में पर्याप्त सब्जियां, दाल या अन्य प्रोटीन स्रोत और उचित मात्रा में अनाज शामिल करना उपयोगी हो सकता है। Harvard की स्वस्थ भोजन की प्लेट में सब्जियों और फलों के साथ साबुत अनाज तथा स्वस्थ प्रोटीन को प्रमुख स्थान दिया गया है।
उदाहरण के तौर पर किसी भोजन में सीमित मात्रा में रोटी या चावल के साथ दाल, सब्जी, सलाद और दही शामिल किया जा सकता है। इससे केवल कार्बोहाइड्रेट पर निर्भर रहने के बजाय भोजन अधिक संतुलित बनता है।
तो आखिर रोटी या चावल में से क्या खाएं?
सही जवाब है—दोनों खाए जा सकते हैं, लेकिन मात्रा और गुणवत्ता महत्वपूर्ण है। अगर किसी व्यक्ति को रोटी पसंद है तो साबुत गेहूं की रोटी को प्राथमिकता दी जा सकती है। अगर चावल पसंद है तो उचित मात्रा में चावल, खासकर कम रिफाइंड या साबुत अनाज वाले विकल्प, भोजन का हिस्सा हो सकते हैं।
वजन बढ़ाने के लिए केवल चावल को और वजन घटाने के लिए केवल रोटी को जिम्मेदार मानना सही तरीका नहीं है। वजन प्रबंधन पूरे खान-पान और जीवनशैली पर निर्भर करता है। नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त प्रोटीन, सब्जियां, फल, साबुत अनाज और उचित मात्रा में भोजन लेना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष: रोटी हो या चावल, दोनों अपने आप में “मोटापा बढ़ाने वाले” खाद्य पदार्थ नहीं हैं। समस्या मुख्यतः तब होती है जब कुल कैलोरी जरूरत से ज्यादा हो जाती है। इसलिए पसंद के अनुसार रोटी या चावल खाएं, लेकिन मात्रा नियंत्रित रखें, ज्यादा फाइबर वाले विकल्प चुनें और भोजन में सब्जियों व प्रोटीन को पर्याप्त जगह दें। यदि किसी व्यक्ति का वजन अचानक बढ़ या घट रहा है, तो व्यक्तिगत सलाह के लिए डॉक्टर या योग्य आहार विशेषज्ञ से संपर्क करना बेहतर है।





