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खाने की मेज पर सिखाएं बच्चों को जिंदगी की अच्छी आदतें
लाइफस्टाइल: बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए माता-पिता कई तरह के प्रयास करते हैं। पढ़ाई, खेल और दूसरी गतिविधियों के बीच रोजमर्रा की कुछ छोटी आदतें भी सीखने का महत्वपूर्ण अवसर देती हैं। परिवार के साथ बैठकर भोजन करना ऐसी ही एक आदत है। इस दौरान बच्चे केवल खाना नहीं खाते, बल्कि बड़ों का व्यवहार देखते हैं, अपनी बातें साझा करते हैं और दूसरों की जरूरतों को समझने का अभ्यास करते हैं।
व्यस्त दिनचर्या में कभी बच्चे पहले खाना खा लेते हैं, तो कभी माता-पिता मोबाइल देखते हुए भोजन करते हैं। हर दिन सभी का एक समय पर जुटना आसान नहीं होता। फिर भी जब संभव हो, साथ बैठकर नाश्ता, दोपहर या रात का खाना खाने के लिए थोड़ा समय निकाला जा सकता है। परिवार के साथ भोजन बच्चों को अपनी बात रखने, सुने जाने और ध्यान से दूसरों को सुनने का अवसर देता है।
यह आदत अपने आप किसी बच्चे का व्यक्तित्व नहीं बदल देती। फर्क इस बात से पड़ता है कि भोजन के दौरान माहौल कैसा है और बड़े किस तरह पेश आते हैं। सहज बातचीत और सम्मान वाला वातावरण बच्चों को इन तीन सीखों का अभ्यास करने का मौका दे सकता है।
पहली सीख: अपनी बात कहना और दूसरों को सुनना
खाने के समय दिनभर की छोटी घटनाओं पर बातचीत हो सकती है। बच्चे से केवल यह पूछने के बजाय कि स्कूल में कितने नंबर मिले, पूछा जा सकता है कि आज उसे किस बात पर हंसी आई या कौन-सा काम मुश्किल लगा। ऐसे सवाल बातचीत को परीक्षा बनने से बचाते हैं और बच्चे को अपने अनुभव बताने की जगह देते हैं।
जब बच्चा बोले, तो उसकी बात पूरी होने दें। तुरंत फैसला सुनाने या हर अनुभव पर सलाह देने से पहले यह समझें कि वह क्या कहना चाहता है। यदि वह किसी दोस्त से हुए विवाद की बात बताए, तो पहले उसकी भावना सुनें। इसके बाद जरूरत हो तो समाधान पर साथ विचार करें।
माता-पिता भी अपनी कोई छोटी घटना साझा कर सकते हैं। इससे बातचीत केवल बच्चे से सवाल पूछने तक सीमित नहीं रहती। बच्चा देखता है कि परिवार में सभी अपनी बात रखते हैं और सभी को सुनने का मौका मिलता है। आगे चलकर स्कूल, दोस्ती और कामकाज में भी संवाद की यही जरूरत पड़ती है।
इस दौरान मोबाइल और टीवी अलग रखना मददगार हो सकता है। यह नियम बड़ों पर भी लागू होना चाहिए। भोजन के समय स्क्रीन का इस्तेमाल पारिवारिक बातचीत में बाधा बन सकता है।
दूसरी सीख: सम्मान, सहयोग और जिम्मेदारी निभाना
साथ भोजन करने से पहले और बाद के छोटे काम बच्चों को परिवार में भागीदारी का अवसर देते हैं। उम्र और क्षमता के अनुसार बच्चा नैपकिन रख सकता है, अपनी खाली प्लेट तय जगह तक पहुंचा सकता है या भोजन लगाने में मदद कर सकता है। छोटे बच्चों को गर्म बर्तन, तेज चाकू या भारी सामान देने की जरूरत नहीं है।
इन कामों को सजा की तरह देने के बजाय परिवार के साझा काम के रूप में समझाएं। जब बड़े भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, तो बच्चे को दिखता है कि घर का काम किसी एक व्यक्ति का दायित्व नहीं है। भोजन तैयार करने से लेकर जगह साफ करने तक कई लोगों की मेहनत लगती है।
सम्मान का अभ्यास बातचीत में भी होता है। किसी चीज की जरूरत हो तो विनम्रता से मांगना, मदद मिलने पर धन्यवाद कहना और दूसरे की पसंद का मजाक नहीं उड़ाना छोटे उदाहरण हैं। बच्चा कोई चीज गिरा दे तो उसे अपमानित करने के बजाय साफ करने में मदद करने को कहा जा सकता है। खाने की मेज को लगातार गलतियां गिनाने की जगह न बनाएं। उम्र के अनुसार धीरे-धीरे व्यवहार सिखाएं। परिवार के साथ नियमित भोजन की आदत बच्चों को भोजन संबंधी शिष्टाचार सीखने का अवसर दे सकती है।
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