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लाइफ स्टाइल
अचानक हार्ट अटैक आने पर घबराएं नहीं अपनाएं ये 3 जरूरी कदम
Ratna Netam
2 Oct 2026 7:03 PM IST

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लाइफ स्टाइल : हार्ट अटैक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें जितनी जल्दी इलाज शुरू हो, उतना बेहतर होता है। परेशानी उस समय और बढ़ सकती है, जब व्यक्ति घर, ऑफिस या किसी दूसरी जगह पर अकेला हो और अचानक सीने में तेज दर्द, दबाव या जकड़न महसूस होने लगे। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत मदद बुलाना और सुरक्षित तरीके से मेडिकल सहायता तक पहुंचना सबसे जरूरी है। हार्ट अटैक को घर पर खुद ठीक करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।हार्ट अटैक के लक्षण हर व्यक्ति में एक जैसे नहीं होते। आम तौर पर सीने के बीच या बाईं ओर दबाव, भारीपन, जकड़न, जलन या दर्द महसूस हो सकता है। दर्द बांह, कंधे, पीठ, गर्दन या जबड़े तक फैल सकता है। सांस फूलना, ठंडा पसीना, मतली, चक्कर, असामान्य कमजोरी और बेचैनी भी इसके संकेत हो सकते हैं। कुछ लोगों, खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और डायबिटीज वाले मरीजों में सीने का तेज दर्द न होकर सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक थकान, मतली या पीठ और जबड़े में दर्द जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं।अगर कोई व्यक्ति अकेला है और उसे हार्ट अटैक की आशंका हो रही है तो तीन कदम बेहद महत्वपूर्ण हैं।
1. तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सहायता बुलाएं
सबसे पहला काम एम्बुलेंस या स्थानीय आपातकालीन चिकित्सा सेवा को कॉल करना है। भारत में आपातकालीन सहायता के लिए 112 पर संपर्क किया जा सकता है। कॉल करते समय अपना सही पता, आसपास की पहचान और लक्षण स्पष्ट रूप से बताएं। संभव हो तो फोन को स्पीकर पर रखें, ताकि मदद आने तक ऑपरेटर के निर्देशों का पालन किया जा सके।इसके साथ किसी पड़ोसी, परिवार के सदस्य, सुरक्षा गार्ड या नजदीकी व्यक्ति को भी तुरंत सूचना दें। अगर दरवाजा अंदर से बंद है और व्यक्ति की हालत बिगड़ने की आशंका है तो सुरक्षित स्थिति में दरवाजा अनलॉक कर देना मददगार हो सकता है, ताकि आपातकालीन टीम आसानी से अंदर पहुंच सके।हार्ट अटैक की आशंका होने पर खुद कार या बाइक चलाकर अस्पताल जाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। रास्ते में अचानक बेहोशी, गंभीर अनियमित धड़कन या कार्डियक अरेस्ट हो सकता है। एम्बुलेंस में प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ रास्ते में जरूरी प्राथमिक उपचार शुरू कर सकता है।
2. बैठकर आराम करें और शारीरिक गतिविधि बंद करें
मदद बुलाने के बाद व्यक्ति को चलना-फिरना और अनावश्यक शारीरिक मेहनत तुरंत बंद कर देनी चाहिए। आरामदायक स्थिति में बैठें या ऐसी स्थिति अपनाएं जिसमें सांस लेने में आसानी हो। तंग कपड़े हों तो उन्हें ढीला किया जा सकता है।घबराहट में कमरे में घूमना, सीढ़ियां उतरना, अस्पताल तक पैदल जाना या लगातार शारीरिक गतिविधि करना ठीक नहीं है। शांत रहने की कोशिश करें और मेडिकल सहायता आने का इंतजार करें।अगर डॉक्टर ने पहले से हृदय रोग के लिए नाइट्रोग्लिसरीन जैसी कोई दवा निर्धारित की है तो उसे केवल डॉक्टर द्वारा पहले बताए गए तरीके से ही लें। किसी दूसरे व्यक्ति की दवा इस्तेमाल न करें और अपनी ओर से नई दवा लेना शुरू न करें।
3. एस्पिरिन केवल सही परिस्थिति और मेडिकल सलाह के अनुसार
हार्ट अटैक की आशंका में एस्पिरिन का उल्लेख अक्सर प्राथमिक सहायता के तौर पर किया जाता है, लेकिन यह हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित नहीं होती। एस्पिरिन से एलर्जी, सक्रिय रक्तस्राव या ऐसी दूसरी चिकित्सा स्थिति हो सकती है जिसमें इसे लेना नुकसानदायक हो। इसलिए इमरजेंसी सेवा या डॉक्टर से संपर्क होने पर उनके निर्देश का पालन करना बेहतर है।यदि इमरजेंसी मेडिकल प्रोफेशनल एस्पिरिन लेने की सलाह देता है और व्यक्ति को इससे एलर्जी या इसे न लेने की चिकित्सकीय वजह नहीं है, तो उनके बताए तरीके और मात्रा के अनुसार ही इसे लिया जाना चाहिए। इंटरनेट पर पढ़ी किसी तय मात्रा को हर व्यक्ति पर लागू नहीं करना चाहिए।
‘कफ CPR’ के वायरल दावे से रहें सावधान
सोशल मीडिया पर कई बार दावा किया जाता है कि अकेले हार्ट अटैक आने पर लगातार जोर-जोर से खांसने या गहरी सांस लेने से व्यक्ति खुद को बचा सकता है। इसे सामान्य लोगों के लिए भरोसेमंद घरेलू उपचार या CPR का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट भी अलग-अलग स्थितियां हैं।हार्ट अटैक में हृदय तक खून पहुंचाने वाली धमनी में रुकावट हो सकती है, जबकि कार्डियक अरेस्ट में हृदय अचानक प्रभावी तरीके से धड़कना बंद कर देता है। दोनों स्थितियों में तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है।अगर कोई व्यक्ति बेहोश हो जाता है और सामान्य रूप से सांस नहीं ले रहा है, तो वह खुद CPR नहीं कर सकता। ऐसी स्थिति में आसपास मौजूद व्यक्ति को आपातकालीन सेवा बुलानी चाहिए और प्रशिक्षित निर्देशों के अनुसार CPR शुरू करना चाहिए।
इन लक्षणों को गैस समझकर नजरअंदाज न करें
सीने में दर्द या जलन को कई लोग एसिडिटी या गैस मानकर इंतजार करने लगते हैं। समस्या यह है कि हार्ट अटैक के कुछ लक्षण पाचन संबंधी परेशानी जैसे महसूस हो सकते हैं। इसलिए नया, असामान्य या लगातार बना रहने वाला सीने का दबाव, खासकर सांस फूलने, पसीने, कमजोरी, मतली या बांह-जवड़े तक फैलने वाले दर्द के साथ हो, तो तत्काल मेडिकल सहायता लेना जरूरी है।लक्षण थोड़ी देर बाद कम हो जाएं तब भी गंभीर संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हार्ट अटैक की पुष्टि घर पर केवल लक्षण देखकर नहीं की जा सकती। अस्पताल में ECG, रक्त जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन के जरिए स्थिति का पता लगाया जाता है।अकेले होने पर सबसे महत्वपूर्ण बात किसी घरेलू नुस्खे पर समय गंवाना नहीं, बल्कि तुरंत इमरजेंसी सेवा को फोन करना है। मदद बुलाएं, शारीरिक गतिविधि रोककर सुरक्षित स्थिति में रहें और दवाओं के मामले में मेडिकल प्रोफेशनल के निर्देश का पालन करें। हार्ट अटैक में समय पर अस्पताल पहुंचना ही गंभीर जटिलताओं और जान के खतरे को कम करने का सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
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