लाइफ स्टाइल

पलकों पर पपड़ी जमना न करें नजरअंदाज, जानें वजह

Rajeshwari Nishad
26 Oct 2026 3:16 PM IST
पलकों पर पपड़ी जमना न करें नजरअंदाज, जानें वजह
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लाइफ स्टाइल। आंखों में बार-बार खुजली होना, लालिमा दिखाई देना और पलकों के किनारों पर पपड़ी जमना सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार लोग इसे धूल, प्रदूषण, मौसम में बदलाव या नींद की कमी का असर मानकर घरेलू उपाय करने लगते हैं। लेकिन आंखों से जुड़े ये लक्षण ब्लेफेराइटिस, एलर्जी, ड्राई आई या किसी संक्रमण का संकेत भी हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आंखों की समस्या का सही कारण समय रहते पता लगाना जरूरी है, क्योंकि अलग-अलग बीमारियों के उपचार भी अलग होते हैं। गलत दवा या बिना सलाह के आई ड्रॉप का इस्तेमाल परेशानी बढ़ा सकता है।
पलकों पर पपड़ी जमना किस बीमारी का संकेत?
आंखों की पलकों के किनारों पर पपड़ी जमने और खुजली होने का एक संभावित कारण ब्लेफेराइटिस (Blepharitis) है। यह पलकों के किनारों पर होने वाली सूजन की समस्या है।इस स्थिति में पलकें लाल हो सकती हैं और उनकी जड़ों के आसपास पपड़ी या चिकनाई जैसी परत दिखाई दे सकती है। कुछ लोगों को सुबह उठने पर पलकें चिपकी हुई महसूस होती हैं।ब्लेफेराइटिस का संबंध पलकों पर मौजूद बैक्टीरिया, त्वचा संबंधी समस्याओं या पलकों की तेल बनाने वाली ग्रंथियों के ठीक से काम नहीं करने से हो सकता है।यह समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है या बार-बार लौट सकती है। हालांकि, उचित देखभाल और उपचार से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।
एलर्जी और कंजंक्टिवाइटिस भी हो सकते हैं कारण
आंखों में लालिमा और खुजली हमेशा ब्लेफेराइटिस के कारण नहीं होती। धूल, परागकण, सौंदर्य प्रसाधन या अन्य एलर्जी पैदा करने वाले पदार्थ भी आंखों में परेशानी पैदा कर सकते हैं।एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस में आंखों में खुजली, पानी आना और लालिमा दिखाई दे सकती है। वहीं, वायरल या बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस में आंखों से स्राव निकलने और पलकों के चिपकने की समस्या भी हो सकती है।इन स्थितियों के उपचार अलग होते हैं। इसलिए केवल लक्षण देखकर यह तय करना सही नहीं है कि समस्या एलर्जी की है या संक्रमण की।
ड्राई आई की समस्या को भी समझें
आंखों में सूखापन होने पर जलन, चुभन, लालिमा और रेत जैसा महसूस होने की शिकायत हो सकती है।ड्राई आई तब होती है जब आंखों में पर्याप्त आंसू नहीं बनते या आंसुओं की गुणवत्ता ठीक नहीं होती।लंबे समय तक स्क्रीन देखने, वातानुकूलित वातावरण और कुछ स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों के कारण यह परेशानी बढ़ सकती है।ब्लेफेराइटिस और ड्राई आई एक साथ भी मौजूद हो सकते हैं। ऐसे में सही कारण जानने के लिए आंखों की जांच जरूरी होती है।
समय पर जांच क्यों जरूरी है?
विशेषज्ञों के अनुसार, आंखों की खुजली और लालिमा के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें से कुछ सामान्य होते हैं, जबकि कुछ स्थितियों में तत्काल उपचार की जरूरत पड़ सकती है।ब्लेफेराइटिस के गंभीर मामलों में पलकों की सूजन के साथ कॉर्निया यानी आंख की पारदर्शी बाहरी सतह भी प्रभावित हो सकती है।इसके कारण धुंधला दिखाई देना या आंखों में अधिक परेशानी होने की आशंका रहती है।अमेरिका के नेशनल आई इंस्टीट्यूट के अनुसार, ब्लेफेराइटिस आमतौर पर स्थायी दृष्टि क्षति नहीं पहुंचाता, लेकिन इसके लक्षणों को नियंत्रित करना और संभावित जटिलताओं की पहचान करना जरूरी है।
डॉक्टर कैसे करते हैं बीमारी की पहचान?
आंखों के विशेषज्ञ मरीज से लक्षणों की अवधि, एलर्जी, पहले हुए संक्रमण और इस्तेमाल की जा रही दवाओं के बारे में जानकारी लेते हैं।इसके बाद पलकों के किनारों, बरौनियों की जड़ों और आंख की सतह की जांच की जाती है।जरूरत पड़ने पर विशेष उपकरण से पलकों की तेल ग्रंथियों और आंसुओं की स्थिति भी देखी जा सकती है।इस जांच से यह समझने में मदद मिलती है कि परेशानी ब्लेफेराइटिस, ड्राई आई, एलर्जी या किसी अन्य कारण से हो रही है।सही निदान होने के बाद डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार निर्धारित करते हैं।
घर पर किन बातों का रखें ध्यान?
पलकों पर पपड़ी जमने की समस्या में साफ-सफाई महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।ब्लेफेराइटिस में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार साफ कपड़े से बंद पलकों पर हल्की गर्म सिकाई की जा सकती है। इससे जमी हुई पपड़ी नरम होने और तेल ग्रंथियों की रुकावट कम होने में मदद मिल सकती है।सिकाई के लिए पानी अधिक गर्म नहीं होना चाहिए। पलकों की सफाई भी बहुत हल्के हाथों से करनी चाहिए।जब तक आंखों में लालिमा या सूजन बनी हो, तब तक आई मेकअप और कॉन्टैक्ट लेंस से बचना बेहतर है।
बिना सलाह के आई ड्रॉप इस्तेमाल करना खतरनाक
आंखों में खुजली या लालिमा होने पर कई लोग मेडिकल स्टोर से आई ड्रॉप खरीदकर इस्तेमाल करने लगते हैं।लेकिन सभी आई ड्रॉप एक जैसी नहीं होतीं। कुछ दवाओं में स्टेरॉयड या अन्य सक्रिय औषधीय तत्व होते हैं, जिनका गलत इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है।विशेषज्ञ की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या स्टेरॉयड युक्त आई ड्रॉप नहीं डालनी चाहिए।आंखों में नींबू, गुलाबजल या अन्य घरेलू पदार्थ डालने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इनसे जलन और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
इन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
यदि आंखों में तेज दर्द हो, अचानक धुंधला दिखाई देने लगे, रोशनी से परेशानी हो या आंख अत्यधिक लाल हो जाए, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले व्यक्ति की आंख लाल और दर्दनाक हो तो भी तत्काल जांच जरूरी है।इसके अलावा पलकों में बहुत अधिक सूजन, बुखार या आंख खोलने में कठिनाई होने पर देरी नहीं करनी चाहिए।ये लक्षण सामान्य खुजली से अधिक गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं।
आंखों की देखभाल को बनाएं आदत
आंखों को स्वस्थ रखने के लिए नियमित सफाई और अच्छी व्यक्तिगत स्वच्छता जरूरी है।गंदे हाथों से आंखें छूने या बार-बार रगड़ने से बचना चाहिए। तौलिया और आंखों के सौंदर्य प्रसाधन दूसरों के साथ साझा नहीं करने चाहिए।जिन लोगों को बार-बार पलकों पर पपड़ी जमने की समस्या होती है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार पलकों की सफाई जारी रखनी पड़ सकती है।
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