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लाइफ स्टाइल
दूसरों की चमकदार दिवाली देखकर न हों उदास, जानें ये खास बातें
nidhi
8 Nov 2026 10:20 AM IST

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दिवाली पर सोशल मीडिया का FOMO बिगाड़ रहा मूड?
नई दिल्ली: दिवाली का त्योहार खुशियों, रोशनी, मिठाइयों और अपनों के साथ यादगार पल बिताने का अवसर होता है। लेकिन सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच त्योहार मनाने का तरीका भी बदलता दिखाई दे रहा है। इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर दिवाली से जुड़ी खूबसूरत तस्वीरें, महंगे कपड़े, शानदार सजावट, बड़े-बड़े उपहार और लग्जरी पार्टियों की रील्स लगातार दिखाई देती हैं। इन्हें देखकर कई लोगों के मन में अपनी दिवाली को लेकर असंतोष या उदासी पैदा हो सकती है। मनोविज्ञान में इस तरह के अनुभव को FOMO यानी फियर ऑफ मिसिंग आउट से जोड़कर देखा जाता है।
अवसर या खुशी से वंचित रह जाने का डर। जब कोई व्यक्ति सोशल मीडिया पर दूसरों को त्योहार मनाते देखता है, तो उसे महसूस हो सकता है कि बाकी सभी लोग उससे ज्यादा खुश हैं। कई बार यही सोच अनावश्यक तुलना, तनाव और बेचैनी का कारण बन जाती है।
दिवाली के अवसर पर सोशल मीडिया पर आकर्षक तस्वीरों और वीडियो की भरमार रहती है। कोई महंगे कपड़ों में फोटोशूट कराता दिखाई देता है, तो कोई आलीशान घर की सजावट और शानदार पार्टी की झलक साझा करता है। ऐसे में सामान्य तरीके से त्योहार मनाने वाले लोगों को लग सकता है कि उनकी दिवाली दूसरों के मुकाबले कम खास है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली तस्वीरें किसी व्यक्ति के जीवन की पूरी सच्चाई नहीं होतीं। लोग अक्सर अपने जीवन के सबसे अच्छे और खूबसूरत पलों को ही ऑनलाइन साझा करते हैं। इसके पीछे की परेशानियां, थकान या सामान्य दिनचर्या तस्वीरों में दिखाई नहीं देती।
1. दूसरों की दिवाली से अपनी खुशी की तुलना न करें
दिवाली का आनंद इस बात पर निर्भर नहीं करता कि आपने कितने महंगे कपड़े पहने हैं या घर को कितनी शानदार तरीके से सजाया है। त्योहार की असली खूबसूरती परिवार के साथ बिताए समय, रिश्तों की मिठास और मन की शांति में होती है।
यदि आप दूसरों की तस्वीरें देखकर अपनी परिस्थितियों की तुलना करने लगते हैं, तो अपनी छोटी-छोटी खुशियों को नजरअंदाज कर सकते हैं। इसलिए त्योहार को अपनी पसंद और सुविधा के अनुसार मनाना बेहतर है।
2. सोशल मीडिया से कुछ समय का ब्रेक लें
यदि इंस्टाग्राम की रील्स लगातार देखने से मन में बेचैनी या उदासी बढ़ रही है, तो कुछ समय के लिए मोबाइल से दूरी बनाना उपयोगी हो सकता है।
दिवाली पर परिवार के साथ बैठकर बातचीत करें, घर की सजावट में हिस्सा लें या अपने पसंदीदा पकवान बनाएं। मोबाइल स्क्रीन पर दूसरों की खुशियां देखने के बजाय अपने आसपास मौजूद अच्छे पलों का आनंद लेने की कोशिश करें।
सोशल मीडिया का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं है, लेकिन उसके उपयोग की सीमा तय करना मानसिक सुकून बनाए रखने में मदद कर सकता है।
3. महंगे उपहार नहीं, रिश्तों को दें प्राथमिकता
त्योहारों के दौरान सोशल मीडिया पर महंगे गिफ्ट, डिजाइनर कपड़े और लग्जरी सामान का प्रदर्शन देखने को मिलता है। कई बार लोग दूसरों की बराबरी करने के लिए अपनी क्षमता से अधिक खर्च करने लगते हैं।
लेकिन दिवाली का अर्थ केवल महंगे उपहार देना नहीं है। अपने हाथों से बनाई मिठाई, एक प्यारा संदेश या परिवार के साथ बिताया समय भी किसी महंगे तोहफे से अधिक यादगार हो सकता है।
त्योहार मनाने के लिए अनावश्यक आर्थिक दबाव लेना जरूरी नहीं है। अपनी जरूरतों और बजट के अनुसार उत्सव मनाना अधिक संतोषजनक हो सकता है।
4. छोटी-छोटी खुशियों को पहचानना सीखें
कई बार हम बड़ी खुशियों की तलाश में जीवन के साधारण लेकिन खूबसूरत पलों को भूल जाते हैं। दिवाली पर घर में जलता एक छोटा सा दीपक, परिवार के साथ भोजन करना, बच्चों की मुस्कान या पुराने दोस्तों से बातचीत भी खुशी दे सकती है।
ऐसे अनुभवों को महसूस करने के लिए हर पल की तस्वीर लेना या उसे सोशल मीडिया पर साझा करना आवश्यक नहीं है।
अपनी पसंद का संगीत सुनना, रंगोली बनाना, पूजा में शामिल होना या किसी जरूरतमंद की सहायता करना भी त्योहार को अर्थपूर्ण बना सकता है।
5. अपनी दिवाली को परफेक्ट बनाने का दबाव छोड़ें
सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली दिवाली अक्सर बेहद खूबसूरत और व्यवस्थित नजर आती है। लेकिन वास्तविक जीवन में त्योहार की तैयारियों के दौरान थकान, भागदौड़ और छोटी-मोटी परेशानियां होना सामान्य बात है।
जरूरी नहीं कि हर तस्वीर अच्छी आए, घर की सजावट बिल्कुल परफेक्ट हो या सभी योजनाएं समय पर पूरी हों। त्योहार का उद्देश्य किसी प्रतियोगिता में जीतना नहीं, बल्कि खुशियों का अनुभव करना है।
यदि आपकी दिवाली सादगी से बीत रही है, तो इसका अर्थ यह नहीं कि उसमें खुशी की कमी है। अपनी परिस्थितियों को स्वीकार करके भी त्योहार का आनंद लिया जा सकता है।
6. अपनों के साथ बिताएं यादगार पल
दिवाली के अवसर पर परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना रिश्तों को मजबूत बनाने का अवसर देता है। लंबे समय से जिन लोगों से बातचीत नहीं हुई है, उन्हें फोन करके शुभकामनाएं दें।
घर के बुजुर्गों के साथ बैठकर पुरानी दिवाली की यादें सुनें। बच्चों के साथ रंगोली बनाएं या परिवार के सभी सदस्यों के साथ भोजन करें। ऐसे पल भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
7. सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर खुशी को सच न मानें
इंस्टाग्राम पर किसी की मुस्कुराती तस्वीर देखकर यह मान लेना सही नहीं है कि उसका जीवन पूरी तरह खुशहाल है। हर व्यक्ति की अपनी परिस्थितियां, चुनौतियां और जिम्मेदारियां होती हैं।
इसलिए सोशल मीडिया को मनोरंजन और संपर्क का माध्यम समझें, अपनी खुशी मापने का पैमाना नहीं।
दिवाली की असली खूबसूरती महंगी सजावट, हजारों लाइक्स या वायरल रील्स में नहीं, बल्कि मन की शांति और अपनों के साथ बिताए पलों में है। इस बार दूसरों की परफेक्ट दिवाली देखने के बजाय अपनी खुशियों को महत्व दें।
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