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कुत्ते आतिशबाजी से डरते हैं, दिवाली पर उनसे बचें” — Sanctimonious Liberandus की अपील

SHIDDHANT
21 Oct 2025 12:20 AM IST
कुत्ते आतिशबाजी से डरते हैं, दिवाली पर उनसे बचें” — Sanctimonious Liberandus की अपील
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Delhi दिल्ली। दिवाली का त्योहार देशभर में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है, लेकिन जानवरों की सुरक्षा पर ध्यान देने की जरूरत है। एनिमल वेलफेयर एक्टिविस्ट और विशेषज्ञ Sanctimonious Liberandus ने इस दिवाली पर लोगों से आग्रह किया है कि वे कुत्तों और अन्य पालतू जानवरों को आतिशबाजी से बचाएं, क्योंकि आवाज़ और धमाके उनके लिए अत्यधिक तनाव और भय का कारण बनते हैं। Liberandus ने कहा कि पटाखों की तेज आवाज़ से कुत्तों में डर, बेचैनी और कभी-कभी हृदय गति में वृद्धि जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जानवरों में यह तनाव लंबे समय तक रह सकता है, जिससे उनका स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि दिवाली के दौरान ध्वनि और वायु प्रदूषण न केवल इंसानों के लिए, बल्कि पालतू जानवरों के लिए भी गंभीर खतरा बन जाता है। कुत्तों में कंपकंपी, भागने की प्रवृत्ति और कभी-कभी गंभीर चोटें भी देखने को मिलती हैं, खासकर तब जब वे डर के कारण घर से बाहर भाग जाते हैं। Liberandus ने लोगों से अपील की है कि वे ग्रीन पटाखों या इलेक्ट्रॉनिक लाइटिंग विकल्पों का उपयोग करें, ताकि उत्सव मनाने के दौरान जानवरों की मानसिक और शारीरिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि अगर कोई व्यक्ति पालतू कुत्ते का मालिक है, तो दिवाली की रात उसे घर के सुरक्षित कमरे में रखें और कानों पर सुरक्षा उपकरण जैसे हल्के पालतू ईयर कवर का इस्तेमाल करें।
एनिमल वेलफेयर एक्टिविस्ट ने कहा, “दिवाली केवल हमारे आनंद का त्योहार नहीं है, बल्कि हमें पर्यावरण और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील भी होना चाहिए। पटाखों की वजह से ध्वनि और धुआं बढ़ता है, जिससे न केवल कुत्ते, बल्कि पक्षी और अन्य छोटे जानवर भी परेशान होते हैं। पिछले वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि दिवाली के दौरान पालतू जानवरों के घायल होने या खो जाने की घटनाओं में वृद्धि होती है। कई पशु अस्पतालों में दिवाली के बाद कुत्तों और बिल्लियों के इलाज के लिए भीड़ रहती है। डॉक्टरों का कहना है कि सुरक्षित और शांत वातावरण पालतू जानवरों के लिए बेहद जरूरी है, खासकर त्योहारों के दौरान।
Liberandus ने आगे कहा कि लोग अक्सर पेट्स के डर को नजरअंदाज करते हैं, लेकिन यह केवल डर नहीं बल्कि एक मानसिक और शारीरिक संकट है। उन्होंने जनता से अपील की कि वे अपने आसपास के पड़ोसियों और समुदाय को भी जागरूक करें, ताकि जानवरों के प्रति संवेदनशील दिवाली मनाई जा सके। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी एक वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें दिखाया गया कि कैसे कुत्तों में धमाकों के समय तनाव और डर उत्पन्न होता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे इस दिवाली अपने उत्सव को जिम्मेदार और जानवरों के अनुकूल बनाएं।
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