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लाइफ स्टाइल
चेहरे पर रूखापन और जलन को न करें नजरअंदाज, प्रदूषण के बीच ऐसे करें देखभाल
nidhi
24 Oct 2026 2:20 PM IST

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धूल-धुएं से फीका पड़ सकता है चेहरे का निखार
नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में धूल और धुएं के संपर्क से बचाव की चर्चा अक्सर सांस और आंखों की सेहत तक सीमित रहती है, लेकिन त्वचा पर भी इसका असर पड़ सकता है। प्रदूषण के संपर्क का संबंध त्वचा में सूजन, उसकी सुरक्षात्मक परत में बदलाव और एक्जिमा जैसी समस्याओं के बढ़ने से पाया गया है। हालांकि, हर व्यक्ति की त्वचा एक जैसी प्रतिक्रिया नहीं देती। चेहरे पर होने वाले हर बदलाव के लिए केवल प्रदूषण को जिम्मेदार मानना भी सही नहीं है। त्वचा की देखभाल के लिए महंगे उत्पादों की लंबी सूची जरूरी नहीं है। हल्की सफाई, जरूरत के अनुसार मॉइस्चराइजर और धूप से सुरक्षा वाला नियमित रूटीन उपयोगी होता है। एक साथ कई नए उत्पाद लगाने से जलन बढ़ सकती है और यह समझना मुश्किल हो जाता है कि परेशानी किस चीज से हुई। प्रदूषण के बीच स्किनकेयर का उद्देश्य त्वचा को लगातार रगड़कर साफ करना नहीं, बल्कि उसकी देखभाल में संतुलन बनाए रखना होना चाहिए।
चेहरा साफ करें, लेकिन बार-बार धोने से बचें
बाहर से लौटने पर चेहरे की सफाई जरूरी लग सकती है, लेकिन दिनभर बार-बार फेसवॉश इस्तेमाल करना सही तरीका नहीं है। सामान्य तौर पर सुबह और रात में, तथा ज्यादा पसीना आने के बाद चेहरा धोना पर्याप्त होता है। गुनगुना पानी और हल्का, त्वचा को न सुखाने वाला क्लेंजर चुनें। उंगलियों से धीरे-धीरे सफाई करें और साफ तौलिए से थपथपाकर सुखाएं। तेज रगड़, खुरदरे स्पंज और गर्म पानी से त्वचा में जलन बढ़ सकती है। यदि बाहर जाने का समय शाम का है, तो घर लौटने के बाद की सफाई को रात के रूटीन का हिस्सा बनाया जा सकता है। केवल धूल लगने की आशंका में हर कुछ घंटों पर चेहरा धोने की आदत से बचें। सफाई के बाद त्वचा में खिंचाव, चुभन या अत्यधिक रूखापन महसूस हो, तो इस्तेमाल किए जा रहे उत्पाद की उपयुक्तता पर ध्यान दें। ज्यादा झाग बनना किसी क्लेंजर के बेहतर होने की गारंटी नहीं है।
मॉइस्चराइजर को रूटीन में जगह दें
चेहरे की सफाई के बाद त्वचा के प्रकार के अनुसार मॉइस्चराइजर लगाएं। रूखी त्वचा के लिए क्रीम और तैलीय त्वचा के लिए हल्का उत्पाद सुविधाजनक हो सकता है। संवेदनशील त्वचा वाले लोग बिना खुशबू वाले उत्पादों को प्राथमिकता दें। मुंहासों की प्रवृत्ति हो, तो रोमछिद्र बंद न करने वाले यानी नॉन-कॉमेडोजेनिक उत्पाद देखें। मॉइस्चराइजर का काम त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद करना है; इसे प्रदूषण रोकने वाली अभेद्य ढाल समझना उचित नहीं होगा। त्वचा तैलीय होने पर भी जरूरत के अनुसार मॉइस्चराइजर इस्तेमाल किया जा सकता है। उत्पाद लगाने के बाद लगातार जलन या दाने निकलें, तो उसे जबरन इस्तेमाल करते न रहें। मौसम बदलने पर पहले से इस्तेमाल हो रहा उत्पाद भी अलग महसूस हो सकता है। ऐसे में पूरे रूटीन को अचानक बदलने के बजाय त्वचा की प्रतिक्रिया देखकर सीमित बदलाव करना बेहतर है।
धुंध में भी धूप से सुरक्षा जरूरी
आसमान धुंधला दिखाई देने का मतलब यह नहीं कि धूप से बचाव की जरूरत खत्म हो गई। बाहर जाते समय कम से कम एसपीएफ 30 वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन इस्तेमाल करें। बाहर रहने के दौरान लगभग हर दो घंटे में और पसीना आने या तैराकी के बाद दोबारा लगाएं। चेहरे के साथ गर्दन और कान जैसे खुले हिस्सों का भी ध्यान रखें। छाया और उपयुक्त कपड़े अतिरिक्त बचाव देते हैं। सनस्क्रीन पराबैंगनी किरणों से सुरक्षा के लिए है; यह हवा को फिल्टर नहीं करता।
स्क्रब और नए उत्पादों की जल्दबाजी से बचें
धूल हटाने के लिए चेहरे को जोर से रगड़ना या हर दिन स्क्रब करना नुकसान पहुंचा सकता है। पहले से जलन हो, तो एक्सफोलिएटिंग उत्पाद और कई सक्रिय तत्वों वाले सीरम एक साथ जोड़ना परेशानी बढ़ा सकता है। चेहरे पर चुभन को उत्पाद के असर करने का संकेत न मानें। त्वचा को साफ रखने के लिए सामान्य हल्की सफाई अधिक व्यावहारिक है। किसी विज्ञापन में किया गया ‘एंटी-पॉल्यूशन’ दावा सभी तरह के प्रदूषकों से पूर्ण सुरक्षा का प्रमाण नहीं होता। त्वचा की रंगत या चमक में तुरंत बदलाव की उम्मीद भी न रखें। देखभाल का असर व्यक्ति, मौसम और पहले से मौजूद समस्या के अनुसार अलग होता है। केवल ज्यादा उत्पाद लगाने से बेहतर परिणाम मिलना तय नहीं है। रोजमर्रा का ऐसा रूटीन चुनें जिसे नियमित रूप से अपनाया जा सके और जिससे त्वचा में परेशानी न हो।
लगातार परेशानी हो तो चिकित्सकीय सलाह लें
चेहरे पर लगातार खुजली, लालिमा, पपड़ी, दर्द या सूजन हो, तो केवल कॉस्मेटिक उत्पाद बदलते रहना पर्याप्त नहीं है। एक्जिमा या दूसरी त्वचा समस्या वाले लोगों को अपने उपचार में बदलाव चिकित्सक की सलाह से करना चाहिए। प्रदूषण से बचाव के लिए स्किनकेयर सहायक कदम है, लेकिन यह खराब हवा के संपर्क को सुरक्षित नहीं बना देता। त्वचा की सेहत को केवल चेहरे के निखार तक सीमित रखने के बजाय उसके आराम और सामान्य स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है।
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