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लाइफ स्टाइल : सिरदर्द आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बेहद आम समस्या बन चुका है। लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करना, नींद पूरी न होना, तनाव, ज्यादा सोच-विचार, पानी कम पीना और अनियमित खानपान कई लोगों में सिरदर्द की वजह बन सकता है। लेकिन हर सिरदर्द एक जैसा नहीं होता। कई बार साधारण टेंशन हेडेक को लोग माइग्रेन समझ लेते हैं, जबकि माइग्रेन को सामान्य सिरदर्द मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में दोनों के बीच फर्क समझना जरूरी है।
टेंशन हेडेक यानी तनाव से होने वाला सिरदर्द सबसे आम प्रकार के सिरदर्द में गिना जाता है। इसमें आमतौर पर सिर के दोनों तरफ दर्द या दबाव जैसा महसूस होता है। कई लोगों को ऐसा लगता है जैसे सिर पर कोई पट्टा कस दिया गया हो। यह दर्द हल्का से मध्यम हो सकता है और अक्सर माथे, कनपटी, गर्दन या सिर के पीछे महसूस होता है।
टेंशन हेडेक में दर्द धीरे-धीरे शुरू हो सकता है और कई घंटों तक बना रह सकता है। तनाव, मानसिक थकान, लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठना, गर्दन और कंधों की मांसपेशियों में खिंचाव, नींद की कमी और आंखों पर जोर इसके सामान्य कारणों में शामिल हो सकते हैं।
इसके विपरीत माइग्रेन सिर्फ सामान्य सिरदर्द नहीं होता। माइग्रेन में दर्द अक्सर धड़कने या धक-धक करने जैसा महसूस होता है। कई लोगों में यह सिर के एक तरफ ज्यादा होता है, हालांकि कुछ लोगों को दोनों तरफ भी दर्द हो सकता है। माइग्रेन का दर्द मध्यम से गंभीर हो सकता है और कई घंटे से लेकर एक-दो दिन तक भी परेशान कर सकता है।
माइग्रेन के साथ कई अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। इसमें मतली, उल्टी, तेज रोशनी से परेशानी, तेज आवाज से चिढ़ और कुछ गंधों से असहजता शामिल हो सकती है। कई मरीज माइग्रेन के दौरान शांत और अंधेरे कमरे में आराम करना पसंद करते हैं, क्योंकि रोशनी और शोर दर्द को और बढ़ा सकते हैं।
कुछ लोगों को माइग्रेन शुरू होने से पहले ‘ऑरा’ नाम की स्थिति भी महसूस हो सकती है। इसमें आंखों के सामने चमकती रोशनी, टेढ़ी-मेढ़ी लाइनें, धुंधला दिखना या किसी हिस्से में झुनझुनी जैसी समस्या हो सकती है। हालांकि हर माइग्रेन मरीज को ऑरा नहीं होता।
टेंशन हेडेक और माइग्रेन में सबसे बड़ा फर्क दर्द की प्रकृति और उसके साथ होने वाले अन्य लक्षणों से समझा जा सकता है। टेंशन हेडेक में दर्द आमतौर पर दबाव या कसाव जैसा होता है और अक्सर रोजमर्रा का काम जारी रखा जा सकता है। वहीं माइग्रेन में दर्द धड़कता हुआ और ज्यादा तेज हो सकता है। चलने, सीढ़ियां चढ़ने या सामान्य शारीरिक गतिविधि से भी माइग्रेन का दर्द बढ़ सकता है।
टेंशन हेडेक में सामान्यतः मतली या उल्टी नहीं होती और तेज रोशनी या आवाज से बहुत ज्यादा परेशानी भी कम देखने को मिलती है। जबकि माइग्रेन में ये लक्षण काफी सामान्य हो सकते हैं।
तनाव दोनों ही प्रकार के सिरदर्द को प्रभावित कर सकता है। फर्क इतना है कि तनाव टेंशन हेडेक का सीधा ट्रिगर हो सकता है, जबकि माइग्रेन में भी तनाव एक ट्रिगर की भूमिका निभा सकता है। इसके अलावा नींद की कमी, ज्यादा कैफीन, लंबे समय तक भूखे रहना, तेज रोशनी, हार्मोनल बदलाव, कुछ खास खाद्य पदार्थ और मौसम में बदलाव भी कुछ लोगों में माइग्रेन को ट्रिगर कर सकते हैं।
अगर सिरदर्द हल्का है और तनाव या थकान के कारण महसूस हो रहा है, तो पर्याप्त आराम, पानी पीना, नींद पूरी करना और स्क्रीन से कुछ समय दूरी बनाना राहत दे सकता है। गर्दन और कंधों की हल्की स्ट्रेचिंग और शांत वातावरण भी मददगार हो सकता है।
माइग्रेन में भी आराम और ट्रिगर से बचना जरूरी है। तेज रोशनी और शोर से दूरी बनाकर अंधेरे और शांत कमरे में आराम करने से कुछ लोगों को राहत मिल सकती है। हालांकि बार-बार होने वाले माइग्रेन के लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी होती है। डॉक्टर मरीज के लक्षणों और सिरदर्द की आवृत्ति के आधार पर उपचार तय कर सकते हैं।
दर्द की दवा बार-बार अपने मन से लेना भी सही नहीं है। जरूरत से ज्यादा दर्द निवारक दवाओं का इस्तेमाल उल्टा सिरदर्द को बार-बार होने की समस्या पैदा कर सकता है। इसलिए यदि आपको लगातार या बार-बार सिरदर्द हो रहा है, तो उसका कारण समझना बेहतर है।
कुछ स्थितियों में सिरदर्द को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि अचानक जीवन का सबसे तेज सिरदर्द शुरू हो, सिर पर चोट लगने के बाद दर्द हो, सिरदर्द के साथ बेहोशी, बोलने में दिक्कत, कमजोरी, चेहरे का एक हिस्सा सुन्न पड़ना, तेज बुखार, गर्दन में अकड़न, लगातार उल्टी या नजर में अचानक बदलाव हो तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।
अगर सिरदर्द लगातार बढ़ रहा हो, सप्ताह में कई बार हो रहा हो या रोजमर्रा की जिंदगी और काम को प्रभावित कर रहा हो, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। लंबे समय तक बार-बार होने वाले सिरदर्द को सिर्फ तनाव मानकर छोड़ना सही नहीं है।
कुल मिलाकर टेंशन हेडेक और माइग्रेन दोनों में सिरदर्द होता है, लेकिन दोनों के लक्षण और दर्द की प्रकृति अलग हो सकती है। टेंशन हेडेक अक्सर कसाव या दबाव जैसा होता है, जबकि माइग्रेन में धड़कता हुआ तेज दर्द, मतली और रोशनी या आवाज से परेशानी जैसे लक्षण ज्यादा देखने को मिलते हैं। सही पहचान और समय पर इलाज से दोनों स्थितियों को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।
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