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लाइफ स्टाइल
Fit दिखने के बावजूद अंदर ही अंदर बीमार कर रहा है ‘साइलेंट बीपी’, सालों तक नहीं चलता पता
Harrison
14 Dec 2025 6:47 PM IST

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Lifestyle, लाइफस्टाइल : अक्सर लोग मानते हैं कि अगर शरीर फिट दिख रहा है, वजन कंट्रोल में है और कोई तकलीफ महसूस नहीं हो रही, तो सेहत भी पूरी तरह ठीक होगी। लेकिन हकीकत इससे अलग है। हाई ब्लड प्रेशर, जिसे आम भाषा में बीपी कहा जाता है, कई बार बिना किसी लक्षण के शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचाता रहता है। इसी वजह से इसे “साइलेंट किलर” या “साइलेंट बीपी” कहा जाता है, क्योंकि यह सालों तक बिना चेतावनी दिए इंसान को बीमार बनाता रहता है।
क्या है साइलेंट बीपी
हाई ब्लड प्रेशर वह स्थिति है, जब धमनियों में खून का दबाव लगातार सामान्य से ज्यादा रहता है। सामान्य तौर पर 120/80 mmHg को सही माना जाता है। जब यह स्तर लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो दिल को खून पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। समस्या यह है कि अधिकतर मामलों में हाई बीपी के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, इसलिए व्यक्ति को इसका अंदाजा ही नहीं होता।
फिट दिखने वाले लोग भी क्यों होते हैं शिकार
यह एक आम गलतफहमी है कि हाई बीपी सिर्फ मोटे या बुजुर्ग लोगों को होता है। आजकल युवा, फिट और एक्टिव दिखने वाले लोग भी साइलेंट बीपी का शिकार हो रहे हैं। तनाव, अनियमित दिनचर्या, नींद की कमी, ज्यादा नमक का सेवन, धूम्रपान, शराब और स्क्रीन टाइम बढ़ने जैसे कारण इसके पीछे बड़ी वजह बन रहे हैं। कई बार पारिवारिक इतिहास भी हाई बीपी के खतरे को बढ़ा देता है।
शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाता है हाई बीपी
अगर लंबे समय तक हाई बीपी को कंट्रोल न किया जाए, तो यह दिल, दिमाग, किडनी और आंखों पर गंभीर असर डालता है। दिल की धमनियां सख्त हो सकती हैं, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। दिमाग की नसों पर दबाव बढ़ने से स्ट्रोक का जोखिम रहता है। किडनी धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है और आंखों की रोशनी पर भी असर पड़ सकता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि ये नुकसान तब सामने आते हैं, जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है।
कभी-कभी दिखने वाले हल्के संकेत
हालांकि इसे साइलेंट बीमारी कहा जाता है, लेकिन कुछ मामलों में हल्के संकेत दिख सकते हैं। जैसे बार-बार सिरदर्द, चक्कर आना, थकान, सीने में भारीपन, नाक से खून आना या धुंधला दिखना। इन लक्षणों को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं या सामान्य कमजोरी समझ लेते हैं, जो आगे चलकर भारी पड़ सकता है।
समय पर जांच क्यों है जरूरी
हाई बीपी का सबसे बड़ा खतरा यही है कि बिना जांच के इसका पता नहीं चलता। इसलिए भले ही आप खुद को पूरी तरह स्वस्थ महसूस करें, फिर भी नियमित रूप से ब्लड प्रेशर चेक कराना बेहद जरूरी है। 30 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को कम से कम 6 महीने में एक बार बीपी जरूर चेक कराना चाहिए। जिन लोगों के परिवार में हाई बीपी की समस्या रही है, उन्हें और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है।
कैसे रखें साइलेंट बीपी को कंट्रोल में
हाई बीपी से बचाव और कंट्रोल के लिए जीवनशैली में बदलाव सबसे अहम है। नमक का सेवन सीमित रखें, तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड कम करें। रोजाना कम से कम 30 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी, जैसे वॉक, योग या एक्सरसाइज को दिनचर्या में शामिल करें। तनाव कम करने के लिए ध्यान और प्राणायाम फायदेमंद हो सकते हैं। पर्याप्त नींद लेना और धूम्रपान व शराब से दूरी बनाना भी जरूरी है।
साइलेंट बीपी बाहर से भले ही दिखाई न दे, लेकिन अंदर ही अंदर शरीर को खोखला करता रहता है। फिट दिखना हमेशा सेहत की गारंटी नहीं होता। समय पर जांच, सही खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस खामोश बीमारी से खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है। आज लिया गया छोटा सा कदम, भविष्य में बड़ी परेशानी से बचा सकता है।
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