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सिर्फ फिल्मी गाना नहीं, लोक परंपरा से जुड़ा है दीपिका का हिट सॉन्ग

नई दिल्ली। संजय लीला भंसाली की फिल्म गोलियों की रासलीला राम-लीला का सुपरहिट गरबा सॉन्ग 'नगाड़ा संग ढोल बाजे' आज भी लोगों की पसंदीदा लिस्ट में शामिल है। इस गाने में दीपिका पादुकोण का शानदार गरबा प्रदर्शन और भव्य सेट दर्शकों को खूब पसंद आया था। हालांकि, इस गाने से जुड़ी एक खास बात शायद बहुत कम लोगों ने नोटिस की होगी। दरअसल, इस मशहूर बॉलीवुड गाने में गुजरात के एक पुराने लोकगीत की झलक छिपी हुई है, जिसे सालों से नवरात्रि के दौरान गरबा करते हुए गाया जाता रहा है।
गाने के एक हिस्से में आने वाले बोल 'लीली लेमडी रे, लीलो नागरवेल नो छोड़ से' असल में गुजरात का पारंपरिक लोकगीत है। यह लोकगीत गुजराती लोक संस्कृति का हिस्सा रहा है और पीढ़ियों से महिलाएं नवरात्रि के दौरान गरबा करते समय इसे गाती आई हैं। संजय लीला भंसाली ने इस लोकधुन को अपने संगीत में शामिल कर इसे देशभर में लोकप्रिय बना दिया।
'लीली लेमडी रे' गुजरात का एक बेहद पुराना लोकगीत है, जिसकी कहानी भी काफी दिलचस्प है। यह गीत भक्त और भगवान के बीच होने वाले संवाद के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। लोकगीत में एक भक्त भगवान को अपने घर आने का निमंत्रण देता है। वह अपने घर की खुशहाली और सुविधाओं का वर्णन करते हुए भगवान से कहता है कि उसके घर में हरे-भरे नींबू और पान के बगीचे हैं। वह भगवान से आग्रह करता है कि वे उसके घर रुकें, स्नान करें, दातन करें और भोजन ग्रहण करें।
लोकगीत में आगे भगवान और भक्त के बीच बेहद सुंदर संवाद देखने को मिलता है। भगवान भक्त के प्रेम और आग्रह को समझते हैं, लेकिन उसके घर रुकने से मना कर देते हैं। भगवान कहते हैं कि उनकी कुटिया में माता सीता अकेली हैं और वह राम व लक्ष्मण का इंतजार कर रही हैं। इसी संवाद के जरिए इस लोकगीत में भक्ति, प्रेम और समर्पण की भावना को खूबसूरती से दिखाया गया है।
यह लोकगीत खासतौर पर त्रण ताली गरबा शैली में गाया जाता है। गुजरात की इस पारंपरिक गरबा शैली में महिलाएं गोलाकार घूमते हुए तीन तालियों की थाप पर नृत्य करती हैं। इसकी शुरुआत धीमी गति से होती है और धीरे-धीरे इसकी लय तेज होती जाती है। नवरात्रि के दौरान गुजरात के कई इलाकों में यह गीत गरबा आयोजनों की खास पहचान रहा है।
संजय लीला भंसाली ने फिल्म राम-लीला के गाने 'नगाड़ा संग ढोल बाजे' में इस लोकगीत को आधुनिक संगीत के साथ जोड़ा। फिल्म के पहले अंतरे में 'लीली लेमडी रे' की धुन को शामिल किया गया, जिस पर दीपिका पादुकोण ने शानदार गरबा किया। पारंपरिक लोकधुन और बॉलीवुड संगीत के मेल ने इस गाने को और भी खास बना दिया।
'नगाड़ा संग ढोल बाजे' रिलीज होने के बाद सिर्फ एक फिल्मी गाना नहीं रहा, बल्कि यह नवरात्रि और गरबा आयोजनों का अहम हिस्सा बन गया। देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग इस गाने पर गरबा करते नजर आते हैं। इसकी लोकप्रियता की बड़ी वजह इसकी धुन के साथ जुड़ी गुजराती संस्कृति और लोक परंपरा भी है।
भारतीय सिनेमा में कई बार ऐसा हुआ है जब पुराने लोकगीतों और पारंपरिक धुनों को नए अंदाज में पेश किया गया और उन्हें नई पहचान मिली। 'नगाड़ा संग ढोल बाजे' भी इसका बेहतरीन उदाहरण है। दीपिका पादुकोण के शानदार डांस और भंसाली के संगीत निर्देशन ने गुजरात के इस पुराने लोकगीत को देश-दुनिया तक पहुंचा दिया। आज भी जब यह गाना बजता है तो लोगों के कदम अपने आप गरबा की ताल पर थिरकने लगते हैं।





