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लाइफ स्टाइल
छोटी सी जगह में बनाएं फ्रूट गार्डन गमले में उगेंगे ये पौधे
Ratna Netam
10 Sept 2026 5:21 PM IST

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लाइफ स्टाइल : शहरों में घर छोटे होते जा रहे हैं और बहुत से लोगों के पास पेड़-पौधे लगाने के लिए बड़ा आंगन या खाली जमीन नहीं है। ऐसे में अगर आपको लगता है कि घर में फल उगाने के लिए बड़ी बाड़ी या खेत जरूरी है तो यह पूरी तरह सही नहीं है। सही किस्म के पौधे, पर्याप्त धूप और उचित आकार के गमले के साथ बालकनी और छत को भी छोटी सी फल-बाड़ी में बदला जा सकता है।
कंटेनर गार्डनिंग में सबसे जरूरी बात सामान्य बड़े पेड़ के बजाय बौनी, ग्राफ्टेड या स्वाभाविक रूप से छोटे आकार में रखी जा सकने वाली किस्म चुनना है। फलदार पौधों को पर्याप्त धूप, अच्छी जल निकासी और समय-समय पर पोषण भी चाहिए। भारतीय परिस्थितियों में नींबू, अमरूद, अनार, अंजीर और स्ट्रॉबेरी जैसे फल कंटेनर गार्डनिंग के लिए उपयोगी माने जाते हैं।
1. नींबू
गमले में फलदार पौधा लगाने की शुरुआत करनी हो तो नींबू सबसे अच्छे विकल्पों में से एक है। भारतीय मौसम में इसकी कई किस्में अच्छी तरह विकसित हो सकती हैं।
नींबू के लिए ऐसा बड़ा गमला चुनें जिसके नीचे पर्याप्त ड्रेनेज होल हों। लगभग 16 से 18 इंच या उससे बड़े गमले से शुरुआत की जा सकती है और पौधे के बढ़ने पर जरूरत के मुताबिक बड़ा कंटेनर दिया जा सकता है।
पौधे को ऐसी जगह रखें जहां रोज करीब 6 से 8 घंटे अच्छी धूप मिले। मिट्टी में पानी जमा नहीं होना चाहिए। बगीचे की मिट्टी के साथ अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद और जल निकासी बेहतर करने वाली सामग्री मिलाई जा सकती है।
नींबू को जरूरत से ज्यादा पानी देने से जड़ों को नुकसान हो सकता है। इसलिए ऊपर की मिट्टी की नमी देखकर सिंचाई करना बेहतर रहता है।
2. अमरूद
अमरूद भी गमले में उगाए जाने वाले सबसे उपयोगी फलदार पौधों में शामिल है। इसके लिए बौनी या उपयुक्त ग्राफ्टेड किस्म चुनना ज्यादा बेहतर रहता है।
ICAR-CISH के 2017 से 2019 के बीच किए गए अध्ययन में अमरूद की ललित और श्वेता किस्मों को अलग-अलग आकार के कंटेनरों में उगाया गया था। अध्ययन में बड़े कंटेनरों में ललित अमरूद से अच्छी संख्या में फल और बेहतर उपज दर्ज की गई। इससे वैज्ञानिक स्तर पर भी यह स्पष्ट होता है कि उचित प्रबंधन के साथ अमरूद कंटेनर में फल दे सकता है।
अमरूद के लिए बड़े गमले की जरूरत होती है। पौधे को भरपूर धूप दें और मिट्टी को नम रखें, लेकिन पानी जमा न होने दें। नियमित हल्की छंटाई से पौधे का आकार नियंत्रित रखने और नई शाखाओं को बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
3. अनार
लाल-लाल अनार अगर अपने घर की बालकनी या छत से मिले तो इसका आनंद अलग ही होता है। अच्छी बात यह है कि अनार को भी बड़े कंटेनर में उगाया जा सकता है।
अनार गर्म और धूप वाले वातावरण को पसंद करता है। इसलिए इसे ऐसी जगह रखें जहां अधिकांश दिन सीधी धूप मिले।
इसके लिए लगभग 18 से 24 इंच का गमला उपयोगी हो सकता है। पौधे की उम्र और किस्म के हिसाब से बाद में बड़े कंटेनर की जरूरत पड़ सकती है।
अनार में सुंदर फूल भी आते हैं, इसलिए फल मिलने से पहले पौधा बालकनी या छत की खूबसूरती बढ़ा सकता है। गमले में पौधे की शाखाओं को नियंत्रित रखने के लिए समय-समय पर छंटाई की जा सकती है।
4. अंजीर
अंजीर उन फलदार पौधों में शामिल है जिन्हें कंटेनर में उगाना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है। इसका पौधा पर्याप्त धूप मिलने पर अच्छी वृद्धि कर सकता है।
अंजीर के लिए चौड़ा और अच्छी जल निकासी वाला गमला चुनें। लगभग 18 से 24 इंच का कंटेनर उपयोगी हो सकता है।
गमले की मिट्टी लगातार पानी में डूबी नहीं रहनी चाहिए। पौधे को धूप और समय-समय पर खाद की जरूरत होगी। अगर पौधा तेजी से बड़ा होने लगे तो उसकी छंटाई करके आकार नियंत्रित किया जा सकता है।
कंटेनर में सीमित जगह होने की वजह से पोषक तत्व जमीन के मुकाबले जल्दी कम हो सकते हैं, इसलिए जैविक खाद या उपयुक्त पौध पोषण समय-समय पर देना महत्वपूर्ण है।
5. स्ट्रॉबेरी
अगर बालकनी बहुत छोटी है तो स्ट्रॉबेरी शानदार विकल्प हो सकती है। दूसरे फलदार पौधों की तरह इसके लिए बहुत बड़ा ड्रम या भारी गमला जरूरी नहीं होता।
स्ट्रॉबेरी को छोटे गमलों और हैंगिंग बास्केट में भी उगाया जा सकता है। लगभग 10 से 12 इंच के अच्छे ड्रेनेज वाले कंटेनर में स्वस्थ पौध लगाई जा सकती है। इसे रोज लगभग 6 घंटे सीधी धूप देने की सलाह दी जाती है।
मिट्टी में पर्याप्त जैविक खाद होनी चाहिए। पानी इतना दें कि मिट्टी नम रहे लेकिन गमले में पानी भरकर न खड़ा रहे।
स्ट्रॉबेरी का पौधा आकार में छोटा होने के कारण अपार्टमेंट में रहने वालों के लिए भी उपयोगी विकल्प हो सकता है।
6. ड्रैगन फ्रूट
पिछले कुछ वर्षों में ड्रैगन फ्रूट की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। इसकी खासियत है कि इसे भी सीमित जगह में कंटेनर के सहारे उगाया जा सकता है।
ड्रैगन फ्रूट एक चढ़ने वाला कैक्टस है, इसलिए केवल गमला रखना पर्याप्त नहीं होगा। पौधे को ऊपर चढ़ने के लिए मजबूत खंभे या सपोर्ट की जरूरत पड़ती है।
लगभग 20 से 24 इंच के मजबूत कंटेनर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
पानी की निकासी यहां बेहद महत्वपूर्ण है। ड्रैगन फ्रूट को ऐसे गमले में नहीं लगाना चाहिए जिसमें लंबे समय तक पानी भरा रहे।
ICAR की बागवानी सामग्री में भी ड्रैगन फ्रूट को भारतीय परिस्थितियों में उगाए जाने वाले फल विकल्पों में शामिल किया गया है।
7. बौना केला
केले का नाम सुनते ही बड़े-बड़े पौधों की तस्वीर सामने आती है, लेकिन इसकी कुछ बौनी किस्मों को बड़े कंटेनरों में रखा जा सकता है।
बौने केले के पौधे को गर्म वातावरण, अच्छी धूप, पर्याप्त नमी और नियमित पोषण चाहिए। कंटेनर छोटा नहीं होना चाहिए क्योंकि केले का पौधा तेजी से बढ़ता है और इसकी पानी तथा पोषण की जरूरत भी अधिक होती है।
हाल की कंटेनर गार्डनिंग गाइड में dwarf banana को उन फलों में शामिल किया गया है जिन्हें पर्याप्त बड़े गमले, धूप, पानी और नियमित खाद के साथ सीमित जगह में उगाया जा सकता है।
बालकनी बहुत छोटी हो तो केला व्यावहारिक नहीं होगा, लेकिन खुली छत या बड़ी बालकनी में पर्याप्त मजबूत कंटेनर के साथ इसे आजमाया जा सकता है।
8. शहतूत
शहतूत तेजी से बढ़ने वाला पौधा है। सामान्य स्थिति में इसका पेड़ बड़ा हो सकता है, लेकिन नियमित छंटाई करके इसे कंटेनर के अनुकूल आकार में रखा जा सकता है।
इसके लिए लगभग 20 से 24 इंच या उससे बड़ा कंटेनर उपयोगी हो सकता है।
शहतूत को अच्छी धूप दें और इसकी बढ़ती शाखाओं की नियमित छंटाई करें। कंटेनर में इसकी जड़ों को सीमित जगह मिलने के कारण पानी और पोषण का खास ध्यान रखना जरूरी होगा।
हाल की बागवानी सामग्री में शहतूत को कम देखभाल में कंटेनर के अनुकूल बनाए जा सकने वाले फलदार पौधों में शामिल किया गया है।
गमला चुनते समय न करें ये गलती
फलदार पौधा खरीदने के बाद सबसे बड़ी गलती उसे किसी भी खाली गमले में लगा देना है।
पौधे की जड़ों को फैलने के लिए पर्याप्त जगह चाहिए। नींबू, अमरूद, अनार, अंजीर और शहतूत जैसे पौधों को लंबे समय तक छोटे गमले में रखने से उनकी वृद्धि और फल उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
गमले के नीचे कई ड्रेनेज होल जरूर होने चाहिए। बारिश के दिनों में यह और महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि जड़ों के आसपास लंबे समय तक पानी जमा रहने से समस्या हो सकती है।
ICAR-CISH के कंटेनर अध्ययन में अमरूद और साइट्रस के लिए 45×60 सेमी और 45×45 सेमी आकार के कंटेनरों में बेहतर परिणाम मिले थे।
धूप है सबसे जरूरी
फलदार पौधों को सिर्फ सजावटी इनडोर पौधे समझकर कमरे के अंदर रखना सही नहीं है।
नींबू जैसे पौधों को करीब 6 से 8 घंटे धूप की जरूरत हो सकती है, जबकि स्ट्रॉबेरी के लिए भी लगभग 6 घंटे सीधी धूप उपयोगी मानी गई है।
इसलिए गमले खरीदने से पहले अपनी बालकनी या छत में आने वाली धूप देखें।
अगर पूरे दिन छाया रहती है तो फलदार पौधों से अच्छी पैदावार की उम्मीद करना मुश्किल हो सकता है।
मिट्टी और पानी का रखें ध्यान
फलदार पौधों के लिए मिट्टी ऐसी होनी चाहिए जिसमें पोषण भी हो और अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर भी निकल जाए।
बगीचे की मिट्टी के साथ अच्छी तरह तैयार कम्पोस्ट या वर्मी कम्पोस्ट और मिट्टी को हल्का रखने वाली सामग्री मिलाई जा सकती है।
सबसे महत्वपूर्ण नियम है—गमले को पानी से भरकर न रखें।
पानी देने का निश्चित कैलेंडर बनाने के बजाय मौसम और मिट्टी की नमी देखना ज्यादा उपयोगी है। गर्मी में गमले जल्दी सूख सकते हैं, जबकि बारिश और सर्दी में पानी की जरूरत कम हो सकती है।
ICAR-CISH के अध्ययन में भी सिंचाई की आवृत्ति मौसम के अनुसार काफी अलग रही।
बीज की जगह सही पौधा चुनना फायदेमंद
अगर उद्देश्य केवल पौधा उगाना नहीं बल्कि भविष्य में फल लेना भी है तो नर्सरी से उपयुक्त बौनी, ग्राफ्टेड या एयर-लेयर्ड किस्म लेना बेहतर विकल्प हो सकता है।
हर फल को बीज से उगाने पर मूल पौधे जैसे फल मिलें, यह जरूरी नहीं। बीज से तैयार कुछ पेड़ों को फल देने में ज्यादा समय भी लग सकता है।
इसलिए पौधा खरीदते समय नर्सरी से उसकी किस्म, संभावित आकार, स्थानीय मौसम में अनुकूलता और फल आने की अनुमानित अवधि जरूर पूछें।
छत पर रखते समय वजन का भी रखें ध्यान
टेरेस गार्डन तैयार करते समय सिर्फ पौधे की जरूरत नहीं बल्कि भवन की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है।
बड़े गमले में मिट्टी भरने और पानी देने के बाद उसका वजन काफी बढ़ जाता है। एक साथ बहुत सारे बड़े ड्रम छत पर रखने से पहले छत की भार क्षमता, वाटरप्रूफिंग और ड्रेनेज का ध्यान रखना जरूरी है।
गमलों का पानी सीधे छत पर लगातार जमा न होने दें।
थोड़ी जगह में बन सकती है अपनी मिनी फल-बाड़ी
फल उगाने के लिए हर बार बड़ा खेत या विशाल आंगन जरूरी नहीं है। आपके पास धूप वाली बालकनी, खुली छत या घर के सामने कुछ वर्गफुट जगह है तो सही पौधों से शुरुआत की जा सकती है।
नींबू, अमरूद, अनार, अंजीर, स्ट्रॉबेरी, ड्रैगन फ्रूट, बौना केला और शहतूत ऐसे विकल्प हैं जिन्हें सही किस्म और पर्याप्त आकार के कंटेनर में उगाया जा सकता है। हालांकि फल कब और कितना मिलेगा, यह पौधे की किस्म, स्थानीय जलवायु, उम्र, धूप, परागण और देखभाल पर निर्भर करेगा।
शुरुआत में दो या तीन पौधे लगाना बेहतर है। अनुभव बढ़ने पर धीरे-धीरे दूसरे फल जोड़े जा सकते हैं।
इस तरह थोड़ी सी मेहनत से खाली बालकनी या छत को सिर्फ हरा-भरा ही नहीं बल्कि फल देने वाली छोटी घरेलू बगिया में बदला जा सकता है।
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