लाइफ स्टाइल

शादीशुदा कपल्स में बढ़ा 'फूड डिवोर्स' का क्रेज, जानिए क्या है नया ट्रेंड

nidhi
7 Oct 2026 8:55 AM IST
शादीशुदा कपल्स में बढ़ा फूड डिवोर्स का क्रेज, जानिए क्या है नया ट्रेंड
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स्लीप डिवोर्स के बाद आया फूड डिवोर्स
लाइफस्टाइल: आजकल रिश्तों में कई नए ट्रेंड देखने को मिल रहे हैं। कुछ समय पहले शादीशुदा कपल्स के बीच 'स्लीप डिवोर्स' काफी चर्चा में था, जिसमें पति-पत्नी बेहतर नींद के लिए अलग-अलग बिस्तर या कमरों में सोने का फैसला करते हैं। अब इसी तरह का एक नया ट्रेंड सामने आया है, जिसे 'फूड डिवोर्स' कहा जा रहा है। इसका नाम सुनकर पहली बार में ऐसा लग सकता है कि कपल्स के बीच तलाक की बात हो रही है, लेकिन वास्तव में इसका शादी टूटने या रिश्ते खत्म होने से कोई संबंध नहीं है।
दरअसल, फूड डिवोर्स का मतलब है कि पति-पत्नी एक ही घर में रहते हुए अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार अलग-अलग भोजन करते हैं। इसमें दोनों पार्टनर अपनी डाइट, खाने के समय और भोजन की पसंद को लेकर स्वतंत्र रहते हैं। यह तरीका उन कपल्स के बीच चर्चा में है जिनकी खानपान की आदतें एक-दूसरे से काफी अलग हैं।
कई बार शादीशुदा जिंदगी में खाने को लेकर छोटी-छोटी बहस होने लगती है। एक पार्टनर को मसालेदार खाना पसंद होता है तो दूसरे को हल्का भोजन अच्छा लगता है। किसी को घर का बना खाना पसंद होता है, जबकि दूसरा बाहर का खाना खाना चाहता है। ऐसी स्थिति में रोजाना एक ही तरह का भोजन तैयार करना दोनों के लिए परेशानी बन सकता है। फूड डिवोर्स इसी समस्या का एक व्यावहारिक समाधान माना जा रहा है। इसमें दोनों पार्टनर आपसी सहमति से अलग-अलग खाना तैयार कर सकते हैं या अपनी पसंद के अनुसार भोजन चुन सकते हैं। इससे किसी एक व्यक्ति को अपनी पसंद से समझौता नहीं करना पड़ता।
आजकल फिटनेस और स्वास्थ्य को लेकर भी लोगों की सोच बदल रही है। कोई व्यक्ति वजन कम करने के लिए कम कैलोरी वाला भोजन करता है, तो कोई मांसपेशियां मजबूत बनाने के लिए प्रोटीन युक्त डाइट लेता है। वहीं, कुछ लोग शाकाहारी भोजन पसंद करते हैं और कुछ मांसाहारी। इन अलग-अलग जरूरतों के कारण एक जैसा भोजन करना हमेशा संभव नहीं होता। इसके अलावा नौकरी और व्यस्त जीवनशैली भी इस बदलाव की बड़ी वजह है। कई कपल्स अलग-अलग शिफ्ट में काम करते हैं। एक पार्टनर शाम को जल्दी खाना खा लेता है, जबकि दूसरे को देर रात भोजन करने का समय मिलता है। ऐसे में दोनों अपनी सुविधा के अनुसार खाने का समय तय कर सकते हैं।
हालांकि फूड डिवोर्स का मतलब यह नहीं है कि पति-पत्नी कभी साथ बैठकर भोजन नहीं करेंगे। वे अपनी सुविधा के अनुसार एक ही टेबल पर अलग-अलग व्यंजन खा सकते हैं। छुट्टियों, त्योहारों और खास मौकों पर साथ खाना बनाना और खाना भी जारी रख सकते हैं। रिश्तों के जानकारों के अनुसार, अलग-अलग खाना खाना अपने आप में किसी रिश्ते के कमजोर होने का संकेत नहीं है। लेकिन यदि कपल्स भोजन के साथ-साथ बातचीत करना और एक-दूसरे के साथ समय बिताना भी बंद कर दें, तो भावनात्मक दूरी बढ़ सकती है।
काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट अथुल राज के अनुसार, खाने को लेकर बार-बार होने वाले विवाद के पीछे केवल भोजन की पसंद नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता, ध्यान और भावनात्मक जरूरतों से जुड़े मुद्दे भी हो सकते हैं। इसलिए समस्या को समझना और बातचीत करना जरूरी है। भारतीय परिवारों में एक साथ बैठकर खाना खाने की परंपरा को रिश्तों की मजबूती से जोड़कर देखा जाता है। भोजन के दौरान परिवार के सदस्य दिनभर की बातें साझा करते हैं। इसलिए फूड डिवोर्स अपनाने वाले कपल्स के लिए जरूरी है कि वे अपने रिश्ते में बातचीत और साथ बिताए जाने वाले समय को महत्व देते रहें।
फूड डिवोर्स हर कपल के लिए जरूरी या फायदेमंद हो, ऐसा नहीं है। कुछ लोगों के लिए अलग-अलग भोजन करना सुविधा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का माध्यम हो सकता है, जबकि दूसरे कपल्स साथ खाना खाने में अधिक खुशी महसूस कर सकते हैं। इस ट्रेंड से एक बात स्पष्ट होती है कि आधुनिक रिश्तों में पार्टनर की व्यक्तिगत पसंद और जरूरतों को महत्व दिया जा रहा है। रिश्ते को मजबूत बनाए रखने के लिए हर काम साथ करना जरूरी नहीं, लेकिन एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान, आपसी विश्वास और संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी है।
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