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AC की ठंडी हवा और कम मूवमेंट फेफड़ों की सेहत पर पड़ सकता है असर

nidhi
24 Sept 2026 9:43 AM IST
AC की ठंडी हवा और कम मूवमेंट फेफड़ों की सेहत पर पड़ सकता है असर
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AC में रहना क्या फेफड़ों को पहुंचा रहा नुकसान
हेल्थ डेस्क: वर्क फ्रॉम होम और लंबे समय तक लैपटॉप-मोबाइल इस्तेमाल करने की वजह से कई लोगों की दिनचर्या काफी बदल गई है। सुबह उठने के बाद बिस्तर पर बैठकर काम करना, घंटों एक ही जगह बैठे रहना और दिनभर एयर कंडीशनर वाले बंद कमरे में रहना आम होता जा रहा है। ये आदतें सीधे तौर पर फेफड़ों को 'खराब' कर देती हैं, ऐसा कहना सही नहीं होगा, लेकिन लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि की कमी और खराब इनडोर एयर क्वालिटी सांस संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकती है।
बिस्तर पर बैठकर घंटों काम करने पर शरीर अक्सर सही मुद्रा में नहीं रहता। आगे झुककर लैपटॉप चलाने या लेटकर काम करने से छाती और डायाफ्राम की सामान्य गतिविधि प्रभावित हो सकती है। इससे कुछ लोगों को गहरी सांस लेने में असुविधा महसूस हो सकती है। इसके अलावा लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर की कुल शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है, जिसका असर हृदय और फेफड़ों की फिटनेस पर पड़ सकता है।
फेफड़ों और पूरे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि महत्वपूर्ण है। तेज चलना, साइकिल चलाना, तैराकी या दूसरी एरोबिक एक्सरसाइज के दौरान शरीर को अधिक ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इससे हृदय और सांस लेने वाली मांसपेशियों की कार्यक्षमता बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है। इसके उलट लगातार निष्क्रिय जीवनशैली से स्टैमिना कम हो सकता है और थोड़ी मेहनत में भी सांस फूलने जैसी समस्या महसूस हो सकती है।
दिनभर AC में रहने को लेकर भी कई गलत धारणाएं हैं। एयर कंडीशनर अपने आप फेफड़ों को कमजोर नहीं करता। लेकिन लंबे समय तक बंद कमरे में रहना, AC फिल्टर की नियमित सफाई न करना और खराब वेंटिलेशन परेशानी का कारण बन सकते हैं। फिल्टर और नमी वाली जगहों पर धूल, फफूंद या दूसरे एलर्जन जमा हो सकते हैं। संवेदनशील लोगों, अस्थमा या एलर्जी से परेशान व्यक्तियों में इनके संपर्क से खांसी, छींक या सांस लेने में तकलीफ बढ़ सकती है। बहुत ठंडी और शुष्क हवा भी कुछ लोगों के गले और सांस की नली में जलन पैदा कर सकती है। इसलिए AC इस्तेमाल करते समय कमरे में उचित तापमान रखने, फिल्टर की नियमित सफाई कराने और समय-समय पर ताजी हवा के लिए वेंटिलेशन सुनिश्चित करने की सलाह दी जाती है।
अगर आपका काम लंबे समय तक बैठकर करने वाला है तो हर 30 से 60 मिनट में कुछ देर उठकर चलना उपयोगी हो सकता है। काम के लिए बिस्तर की जगह उचित टेबल और कुर्सी का इस्तेमाल करें। पीठ सीधी रखने और स्क्रीन को सही ऊंचाई पर रखने से शरीर की मुद्रा बेहतर रहती है। रोजाना अपनी क्षमता के अनुसार शारीरिक गतिविधि भी दिनचर्या में शामिल की जा सकती है।
धूम्रपान और सेकेंड हैंड स्मोक से बचना फेफड़ों की सेहत के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है। घर में धूल, फफूंद और प्रदूषण कम रखना भी जरूरी है। यदि लगातार खांसी, सीने में दर्द, घरघराहट, सांस लेने में तकलीफ या सामान्य गतिविधि के दौरान असामान्य रूप से सांस फूलने की समस्या हो रही है तो इसे केवल AC या बैठने की आदत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
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