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विटिलिगो को लेकर गलतफहमी दूर

Kanchan Paikara
22 Jun 2026 7:13 PM IST
विटिलिगो को लेकर गलतफहमी दूर
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इलाज शुरू करने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

Lifestyle लाइफ स्टाइल : विटिलिगो (Vitiligo) एक त्वचा संबंधी स्थिति है, जिसमें शरीर के कुछ हिस्सों पर सफेद दाग दिखाई देने लगते हैं। यह समस्या तब होती है जब शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) गलती से अपने ही स्वस्थ सेल्स पर हमला करने लगती है।

डॉक्टरों के अनुसार, इस बीमारी में शरीर की इम्यून सिस्टम मेलानोसाइट्स नामक कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। मेलानोसाइट्स वही कोशिकाएं होती हैं, जो त्वचा, बालों और आंखों के रंग के लिए जिम्मेदार मेलेनिन (Melanin) बनाती हैं। जब ये कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं या काम करना बंद कर देती हैं, तो त्वचा पर सफेद धब्बे बनने लगते हैं।

यह सफेद दाग शरीर के किसी भी हिस्से पर हो सकते हैं, लेकिन अक्सर चेहरे, हाथों, पैरों और होंठों के आसपास ज्यादा देखने को मिलते हैं। कई मामलों में यह धीरे-धीरे फैलता है, जबकि कुछ लोगों में यह लंबे समय तक स्थिर भी रह सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि विटिलिगो कोई संक्रामक बीमारी नहीं है। यानी यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में छूने, साथ रहने या खाने-पीने से नहीं फैलता। यह पूरी तरह शरीर की आंतरिक प्रक्रिया और इम्यून सिस्टम से जुड़ी स्थिति है।

हालांकि इसके सही कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन माना जाता है कि आनुवंशिक (genetic) कारण, ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया, तनाव और कुछ बाहरी ट्रिगर्स इसमें भूमिका निभा सकते हैं।

विटिलिगो के मरीजों को अक्सर सामाजिक और मानसिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है, क्योंकि त्वचा पर सफेद दाग दिखाई देने लगते हैं। हालांकि मेडिकल साइंस में अब इसके इलाज और मैनेजमेंट के कई विकल्प मौजूद हैं, जिनसे स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

डॉक्टर सलाह देते हैं कि अगर शरीर पर ऐसे सफेद दाग दिखाई दें, तो बिना देरी किए त्वचा विशेषज्ञ (dermatologist) से संपर्क करना चाहिए। शुरुआती चरण में इलाज शुरू करने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

इसके अलावा, मरीजों को धूप से बचाव, संतुलित आहार और तनाव कम करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि ये कारक बीमारी की स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।

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