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लाइफ स्टाइल
घर से बाहर निकलते ही बच्चों को याद होने चाहिए ये 5 सुरक्षा नियम
Ratna Netam
31 Oct 2026 2:27 PM IST

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नई दिल्ली। बच्चों की सुरक्षा हर माता-पिता के लिए सबसे बड़ी चिंता है। स्कूल जाना, ट्यूशन से घर लौटना, पार्क में खेलना या दोस्तों के साथ बाहर घूमना बच्चों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। लेकिन कई बार अनजान लोगों की चालाकी, बहला-फुसलाकर ले जाने की कोशिश और गलत इरादे रखने वाले व्यक्तियों के कारण बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता बच्चों को छोटी उम्र से ही अपनी सुरक्षा के बारे में जागरूक करें।बच्चों के अपहरण की घटनाओं में अपराधी कई बार कुछ ही समय में वारदात को अंजाम देने की कोशिश करते हैं। हालांकि, 45 सेकेंड में अपहरण होने का कोई सार्वभौमिक आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि किसी अनजान व्यक्ति की छोटी-सी चालाकी भी बच्चे को मुश्किल में डाल सकती है। इसलिए बच्चों को डराने के बजाय उन्हें ऐसी आदतें सिखानी चाहिए, जिनसे वे खतरे को पहचान सकें और जरूरत पड़ने पर अपनी सुरक्षा कर सकें।राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM) की बाल सुरक्षा संबंधी सलाह में भी बच्चों को अनजान लोगों से सावधान रहने, विश्वसनीय वयस्कों की पहचान करने और खतरे की स्थिति में जोर से मदद मांगने की सीख देने पर जोर दिया गया है। आइए जानते हैं ऐसे 5 जरूरी सेफ्टी रूल्स, जो हर बच्चे को सिखाने चाहिए।
1. अनजान व्यक्ति से कुछ भी लेने से करें मना
माता-पिता को बच्चों को सबसे पहले यह समझाना चाहिए कि किसी अनजान व्यक्ति से चॉकलेट, खिलौना, खाने-पीने की चीज या पैसे नहीं लेने चाहिए। कई बार गलत इरादे रखने वाले लोग बच्चों को पसंदीदा चीजों का लालच देकर अपने पास बुलाने की कोशिश करते हैं।बच्चों को यह भी बताएं कि अगर कोई व्यक्ति कहता है कि तुम्हारे माता-पिता ने मुझे तुम्हें लेने भेजा है, तो बिना पुष्टि किए उसके साथ बिल्कुल न जाएं। चाहे वह व्यक्ति माता-पिता का परिचित होने का दावा करे, बच्चे को पहले माता-पिता या निर्धारित अभिभावक से बात करनी चाहिए।बच्चों को सिखाएं कि किसी भी परिस्थिति में अनजान व्यक्ति के वाहन में नहीं बैठना है और उसके साथ सुनसान जगह पर नहीं जाना है।
2. खतरा महसूस हो तो जोर से चिल्लाएं और दूर भागें
बच्चों को यह समझना बहुत जरूरी है कि अगर कोई व्यक्ति उन्हें जबरदस्ती पकड़ने, खींचने या अपने साथ ले जाने की कोशिश करता है, तो उन्हें चुप नहीं रहना चाहिएउन्हें जोर से चिल्लाकर 'नहीं', 'मुझे बचाओ', 'यह मेरे मम्मी-पापा नहीं हैं' जैसे शब्द बोलने चाहिए। आसपास मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए लगातार आवाज लगानी चाहिए।बच्चों को यह भी बताएं कि ऐसी स्थिति में अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें और मौका मिलते ही भीड़भाड़ वाली दुकान, स्कूल, पुलिस चौकी या किसी सुरक्षित सार्वजनिक स्थान की तरफ भागें।माता-पिता घर पर बच्चों के साथ ऐसी परिस्थितियों का अभ्यास भी कर सकते हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर वे घबराने के बजाय सही कदम उठा सकें।
3. स्कूल से आने-जाने का रास्ता और सुरक्षा व्यवस्था तय रखें
बच्चों को कभी भी बिना बताए रास्ता बदलने, किसी दोस्त के साथ दूसरी जगह जाने या अकेले सुनसान रास्ते से गुजरने की आदत नहीं डालनी चाहिए।माता-पिता को बच्चे के स्कूल आने-जाने का समय, वाहन और उसके साथ रहने वाले व्यक्ति की जानकारी होनी चाहिए। छोटे बच्चों को स्कूल छोड़ने और लेने के लिए पहले से तय विश्वसनीय व्यक्ति ही जिम्मेदार होना चाहिए।अगर स्कूल बस या वैन से बच्चा आता-जाता है, तो वाहन का नंबर, चालक और परिचालक की जानकारी रखें। स्कूल से छुट्टी के बाद बच्चा किसके साथ निकला है, इसकी पुष्टि करना भी जरूरी है।बच्चों को अपने घर का पता, माता-पिता का मोबाइल नंबर और जरूरत पड़ने पर संपर्क करने वाले दो-तीन विश्वसनीय लोगों के नाम याद करवाएं।
4. परिवार का सीक्रेट कोड वर्ड बनाएं
यह सुरक्षा का एक उपयोगी तरीका हो सकता है। माता-पिता अपने बच्चों के साथ एक ऐसा पारिवारिक कोड वर्ड तय कर सकते हैं, जिसे केवल परिवार के सदस्य और बच्चे को लेने आने वाले विश्वसनीय लोग जानते हों।उदाहरण के लिए, अगर किसी दिन माता-पिता की जगह कोई दूसरा व्यक्ति बच्चे को लेने आता है, तो बच्चा उससे तय कोड वर्ड पूछ सकता है।अगर वह सही कोड नहीं बता पाता है, तो बच्चे को उसके साथ नहीं जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में बच्चे को तुरंत अपने माता-पिता या शिक्षक से संपर्क करना चाहिए।हालांकि, सिर्फ कोड वर्ड पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। बच्चों को यह भी सिखाएं कि किसी परिचित व्यक्ति के साथ भी असहज महसूस होने पर वे उसके साथ जाने से मना कर सकते हैं।
5. घर से बाहर और इंटरनेट पर भी रहें सतर्क
बच्चों की सुरक्षा केवल घर और स्कूल तक सीमित नहीं है। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर भी अनजान लोगों से संपर्क खतरनाक हो सकता है। कई बार अपराधी फर्जी पहचान बनाकर बच्चों से दोस्ती करते हैं और धीरे-धीरे उनका भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं।बच्चों को सिखाएं कि वे अनजान व्यक्ति को अपना घर का पता, स्कूल का नाम, मोबाइल नंबर, लाइव लोकेशन या निजी तस्वीरें साझा न करें। ऑनलाइन दोस्त से मिलने के लिए कभी अकेले न जाएं।इसके साथ ही बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि कोई व्यक्ति उनसे कोई बात माता-पिता से छिपाने के लिए कहता है, तो इसकी जानकारी तुरंत परिवार या शिक्षक को दें।माता-पिता को बच्चों के मोबाइल और सोशल मीडिया इस्तेमाल पर उम्र के अनुसार निगरानी रखनी चाहिए। बच्चों के साथ ऐसा भरोसेमंद रिश्ता बनाएं कि वे किसी भी परेशानी या गलत अनुभव को बिना डर बताए सकें।
बच्चे लापता हो जाएं तो तुरंत क्या करें?
कई बार बच्चा अचानक बाजार, मॉल, पार्क या किसी सार्वजनिक स्थान पर परिवार से बिछड़ जाता है। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय बच्चे को कुछ जरूरी बातें पहले से सिखानी चाहिए।उसे बताएं कि वह किसी सुरक्षित दुकान, सुरक्षा गार्ड, पुलिसकर्मी या परिवारों के साथ मौजूद विश्वसनीय वयस्क से मदद मांगे। किसी अनजान व्यक्ति के साथ दूसरी जगह जाने से बचें।माता-पिता को भी बच्चे की हालिया तस्वीर, पहचान संबंधी जानकारी और जरूरी संपर्क नंबर सुरक्षित रखने चाहिए। बच्चा लापता होने पर तुरंत पुलिस को सूचना दें। शिकायत दर्ज कराने के लिए 24 घंटे इंतजार करने की जरूरत नहीं है।भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 संचालित है। यह बच्चों की सहायता के लिए 24 घंटे उपलब्ध है और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली 112 से जुड़ी हुई है। तत्काल पुलिस या अन्य आपातकालीन सहायता के लिए 112 पर संपर्क किया जा सकता है।
बच्चों को डराएं नहीं, जागरूक बनाएं
बच्चों को सुरक्षा के नियम सिखाने का मतलब उन्हें हर अनजान व्यक्ति से डराना नहीं है। उन्हें यह समझाना जरूरी है कि मदद मांगना गलत नहीं है और अपनी असहजता को खुलकर बताना उनका अधिकार है।माता-पिता सप्ताह में कुछ मिनट निकालकर बच्चों के साथ सुरक्षा से जुड़े छोटे-छोटे अभ्यास कर सकते हैं। उन्हें बताएं कि कोई भी व्यक्ति कितना भी परिचित क्यों न हो, अगर उसका व्यवहार गलत लगे तो वे साफ मना कर सकते हैं।याद रखें, बच्चों की सुरक्षा के लिए केवल सीसीटीवी कैमरे और स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था काफी नहीं है। उन्हें सही समय पर सही फैसला लेने की समझ देना भी उतना ही जरूरी है।
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