लाइफ स्टाइल

चबूतरा: पुराने जमाने की दिलचस्प परंपरा

Saba Naaz
4 July 2026 2:55 PM IST
चबूतरा: पुराने जमाने की दिलचस्प परंपरा
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लाइफ स्टाइल: पुराने भारतीय घरों के बाहर बना चबूतरा केवल एक साधारण निर्माण नहीं था, बल्कि यह उस समय की जीवनशैली, सामाजिक व्यवस्था और जरूरतों से जुड़ा एक अहम हिस्सा हुआ करता था। गांवों और पुराने शहरों में आज भी कई घरों के बाहर यह ऊंचा चबूतरा देखा जा सकता है, जो उस दौर की परंपराओं की याद दिलाता है। पहले के समय में मनोरंजन और मिलने-जुलने के साधन सीमित होते थे, इसलिए शाम के समय लोग घरों के बाहर बने चबूतरे पर इकट्ठा होकर बातचीत करते थे। यहां पड़ोसी एक-दूसरे से हालचाल पूछते, दिनभर की बातें साझा करते और सामाजिक संबंध मजबूत करते थे। इस तरह चबूतरा सामाजिक मेल-जोल का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया था।

चबूतरे का एक बड़ा उपयोग घर की निजता बनाए रखने के लिए भी होता था। जब कोई मेहमान आता था, तो उसे सीधे घर के अंदर ले जाने के बजाय बाहर चबूतरे पर बैठाया जाता था। इससे घर के अंदर रहने वाले लोगों, खासकर महिलाओं की निजी जिंदगी सुरक्षित रहती थी और घरेलू काम भी बिना बाधा के चलता रहता था। इसके अलावा, चबूतरा रोजमर्रा के कामों के लिए भी काफी उपयोगी था। महिलाएं यहां बैठकर अनाज साफ करना, सब्जियां काटना, पापड़ और अचार सुखाना जैसे काम करती थीं। सर्दियों में यह धूप सेंकने और आराम करने की पसंदीदा जगह भी होती थी।

चबूतरे का एक व्यावहारिक लाभ यह भी था कि यह घर को बारिश, कीचड़ और धूल-मिट्टी से बचाता था। जमीन से ऊंचाई होने के कारण पानी और गंदगी सीधे घर के अंदर नहीं जाती थी और छोटे कीड़े-मकोड़ों से भी कुछ हद तक सुरक्षा मिलती थी। इस तरह पुराने समय का चबूतरा केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन, पारिवारिक सुविधा और सुरक्षा का एक अहम हिस्सा था। यही वजह है कि आज भी जब पुराने घरों की बात होती है, तो चबूतरे का जिक्र जरूर होता है और उसे एक खास पहचान के रूप में याद किया जाता है।

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