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आज रात चांद का करें दीदार, हंटर्स मून के पीछे है दिलचस्प कहानी
nidhi
26 Oct 2026 10:40 AM IST

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आज रात दिखेगा हंटर्स मून
नई दिल्ली: रात के आसमान में चांद देखने का शौक रखने वालों के लिए आज खास अवसर है। सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 की रात अक्टूबर की पूर्णिमा का चांद लगभग पूरा गोल दिखाई देगा। इसे पारंपरिक रूप से ‘हंटर्स मून’ कहा जाता है। मौसम साफ रहने पर भारत में भी लोग इसका दीदार कर सकेंगे। हालांकि, खगोलीय गणना के अनुसार पूर्णिमा का सटीक क्षण भारतीय समयानुसार आज सुबह लगभग 9 बजकर 41 मिनट पर था। शाम को चंद्रोदय के बाद भी चांद सामान्य नजर से लगभग पूर्ण दिखाई देगा। हंटर्स मून किसी अलग प्रकार के चंद्रमा या असामान्य खगोलीय बदलाव का नाम नहीं है। यह वर्ष के एक खास समय की पूर्णिमा के लिए इस्तेमाल होने वाला पारंपरिक नाम है। इसका संबंध उत्तरी गोलार्ध में बदलते मौसम, फसल कटने के बाद की परिस्थितियों और सर्दियों की तैयारी से जुड़ा है। इस नाम को समझने के लिए उस समय की जीवनशैली और मौसमी गतिविधियों को जानना जरूरी है।
क्यों पड़ा हंटर्स मून नाम?
अंग्रेजी के ‘हंटर’ शब्द का अर्थ शिकारी है। नासा के अनुसार, यह नाम उस मौसमी परंपरा से जुड़ा है, जब शिकारी शरद ऋतु में चांदनी की मदद से शिकार की तलाश करते थे। खेत खाली होने लगते थे और दिन की रोशनी की अवधि घट रही होती थी। ऐसे समय में चमकीली चांदनी शाम के बाद आसपास देखने में सहायता करती थी। परंपरागत जीवन में सर्दियां आने से पहले भोजन जुटाना महत्वपूर्ण होता था। फसल कटने के बाद खुले खेतों और चांद की रोशनी में जानवरों को देखना अपेक्षाकृत आसान हो सकता था। इसी मौसमी पृष्ठभूमि में पूर्णिमा को शिकार से जोड़कर नाम दिया गया। इसका अर्थ यह नहीं है कि इस रात चंद्रमा से कोई विशेष प्रकार की ऊर्जा निकलती है या उसका वैज्ञानिक स्वरूप बदल जाता है।
हार्वेस्ट मून से क्या है संबंध?
हंटर्स मून को समझने के लिए हार्वेस्ट मून का अंतर जानना भी उपयोगी है। उत्तरी गोलार्ध में शरद विषुव के सबसे करीब पड़ने वाली पूर्णिमा को हार्वेस्ट मून कहते हैं। इसके बाद आने वाली पूर्णिमा को सामान्यतः हंटर्स मून कहा जाता है। इसी कारण इनका संबंध केवल महीने के नाम से नहीं, बल्कि मौसमी क्रम से भी है। हार्वेस्ट मून अधिकतर सितंबर में पड़ता है, लेकिन कुछ वर्षों में अक्टूबर में भी हो सकता है। यही वजह है कि पूर्णिमा के इन पारंपरिक नामों को हर वर्ष एक निश्चित तारीख से जोड़ना सही नहीं होगा। वर्ष 2026 में अक्टूबर की पूर्णिमा को हंटर्स मून के रूप में बताया गया है। अलग-अलग संस्कृतियों में इसी पूर्णिमा के अन्य नाम और परंपराएं भी हो सकती हैं।
भारत में कब देख सकेंगे चांद?
आज शाम चंद्रोदय के बाद खुले आसमान में चांद देखा जा सकेगा। नई दिल्ली की खगोलीय समय-सारणी के अनुसार, 26 अक्टूबर को चंद्रोदय लगभग शाम 5 बजकर 34 मिनट पर है। दूसरे शहरों में यह समय अलग होगा। इसलिए दिल्ली का समय पूरे देश के लिए लागू नहीं माना जाना चाहिए। चांद देखने के लिए ऐसी जगह चुनें, जहां पूर्वी दिशा का क्षितिज खुला हो। ऊंची इमारतें, पेड़ या पहाड़ शुरुआती चंद्रोदय को ढक सकते हैं। बादल, धुंध और स्थानीय मौसम भी दृश्यता प्रभावित करेंगे। चांद क्षितिज से ऊपर आने के बाद आसपास की बाधाओं से निकलकर अधिक स्पष्ट दिखाई दे सकता है।
उगते समय बड़ा क्यों लगता है चांद?
चंद्रोदय के आसपास चांद कई बार असामान्य रूप से बड़ा नजर आता है। नासा इसे ‘मून इल्यूजन’ यानी चंद्रमा से जुड़ा दृष्टिभ्रम बताता है। क्षितिज के पास बड़ा दिखना इस बात का प्रमाण नहीं है कि चंद्रमा का वास्तविक आकार अचानक बढ़ गया है। यह अनुभव अन्य पूर्णिमा की रातों में भी हो सकता है। इसी तरह क्षितिज के करीब चांद पीला या नारंगी नजर आ सकता है। वहां से उसकी रोशनी को वायुमंडल के अधिक लंबे रास्ते से गुजरना पड़ता है। अलग-अलग रंगों की रोशनी के बिखरने के कारण ऐसा रंग दिखाई दे सकता है। ऊपर चढ़ने पर चांद अपेक्षाकृत सफेद दिख सकता है। हालांकि, हर जगह और हर बार एक जैसा रंग दिखाई देना जरूरी नहीं है।
नंगी आंखों से भी देख सकेंगे नजारा
पूर्णिमा का चांद देखने के लिए दूरबीन खरीदने की जरूरत नहीं है। नंगी आंखों से भी इसका गोल आकार और सतह के गहरे-हल्के हिस्से देखे जा सकते हैं। उपलब्ध हो तो साधारण दूरबीन से सतह का अधिक विवरण देखने का प्रयास किया जा सकता है। अवलोकन के लिए आरामदायक और सुरक्षित स्थान चुनना पर्याप्त है। मोबाइल से तस्वीर लेते समय फोन स्थिर रखें और स्क्रीन पर चांद वाले हिस्से को छूकर फोकस करें। तस्वीर अधिक चमकीली बन रही हो तो एक्सपोजर थोड़ा घटाकर देखें। बहुत ज्यादा डिजिटल जूम करने से तस्वीर धुंधली हो सकती है। आज रात आसमान साफ रहा तो हंटर्स मून को देखने का यह सहज अवसर होगा।
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