लाइफ स्टाइल

हड्डियों की बीमारी पुरुषों के लिए भी खतरा, रहें सावधान

Rajeshwari Nishad
20 Oct 2026 1:00 PM IST
हड्डियों की बीमारी पुरुषों के लिए भी खतरा, रहें सावधान
x
Osteoporosis in Men: जब भी ऑस्टियोपोरोसिस की बात होती है, तो ज्यादातर लोगों के मन में यह धारणा आती है कि यह बीमारी मुख्य रूप से महिलाओं को होती है, खासकर मेनोपॉज के बाद। लेकिन हकीकत यह है कि ऑस्टियोपोरोसिस पुरुषों को भी प्रभावित कर सकता है। इस बीमारी में हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर और भुरभुरी होने लगती हैं, जिससे मामूली चोट या गिरने पर भी फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है। खास बात यह है कि शुरुआती दौर में इसके लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते, इसलिए कई लोगों को इसका पता तब चलता है, जब हड्डी में फ्रैक्चर हो जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों का घनत्व कम हो सकता है। पुरुषों में भी उम्र, हार्मोन में बदलाव, पोषण की कमी और कुछ बीमारियां ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम बढ़ा सकती हैं। ऐसे में केवल महिलाओं को ही नहीं, बल्कि पुरुषों को भी हड्डियों की सेहत पर ध्यान देना चाहिए।
क्या है ऑस्टियोपोरोसिस की बीमारी?
ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों से जुड़ी एक ऐसी स्थिति है, जिसमें हड्डियों का घनत्व और उनकी मजबूती कम होने लगती है। सामान्य रूप से हड्डियां लगातार पुरानी हड्डी के ऊतकों को हटाने और नए ऊतक बनाने की प्रक्रिया से गुजरती हैं। जब यह संतुलन बिगड़ जाता है और हड्डियों का नुकसान उनकी भरपाई से अधिक होने लगता है, तो हड्डियां कमजोर हो सकती हैं।
इस स्थिति में रीढ़ की हड्डी, कूल्हे और कलाई में फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। कई बार रीढ़ की हड्डी में छोटे फ्रैक्चर बिना किसी बड़े हादसे के भी हो सकते हैं। इससे पीठ में दर्द, शरीर की लंबाई कम होना या झुककर चलने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
ऑस्टियोपोरोसिस को केवल महिलाओं की बीमारी मानना सही नहीं है। पुरुषों में भी यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है, खासकर अधिक उम्र में या जब हड्डियों को कमजोर करने वाले दूसरे जोखिम मौजूद हों।
पुरुषों में ऑस्टियोपोरोसिस होने के प्रमुख कारण
पुरुषों में हड्डियों के कमजोर होने के कई कारण हो सकते हैं। इनमें सबसे प्रमुख हैं:
बढ़ती उम्र: उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का घनत्व कम हो सकता है और फ्रैक्चर का जोखिम बढ़ जाता है।
टेस्टोस्टेरोन का कम स्तर: यह हार्मोन पुरुषों की हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका स्तर कम होने पर हड्डियों पर असर पड़ सकता है।
कैल्शियम और विटामिन डी की कमी: ये पोषक तत्व हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं। इनकी कमी से हड्डियों की मजबूती प्रभावित हो सकती है।
शारीरिक गतिविधि की कमी: लंबे समय तक निष्क्रिय रहने और वजन उठाने वाले व्यायाम न करने से हड्डियों को पर्याप्त मजबूती नहीं मिल पाती।
धूम्रपान और अत्यधिक शराब: ये आदतें हड्डियों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।
कुछ बीमारियां और दवाएं: थायरॉयड संबंधी समस्याएं, कुछ पाचन संबंधी रोग और लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का इस्तेमाल ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
इन जोखिमों का मतलब यह नहीं है कि हर ऐसे व्यक्ति को ऑस्टियोपोरोसिस होगा। सही आकलन के लिए डॉक्टर की सलाह और जरूरत के अनुसार जांच जरूरी है।
पुरुषों में दिख सकते हैं ये लक्षण
ऑस्टियोपोरोसिस को अक्सर साइलेंट बीमारी कहा जाता है, क्योंकि हड्डियों के कमजोर होने पर शुरुआती चरण में दर्द या दूसरे स्पष्ट लक्षण नहीं भी हो सकते हैं। हालांकि, बीमारी बढ़ने पर कुछ संकेत सामने आ सकते हैं।
पीठ में लगातार दर्द: रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर या दबाव के कारण दर्द हो सकता है।
लंबाई कम होना: समय के साथ रीढ़ की हड्डी में बदलाव के कारण व्यक्ति की लंबाई घट सकती है।
शरीर का झुकना: रीढ़ की हड्डियों के कमजोर होने से पीठ आगे की ओर झुक सकती है।
मामूली चोट पर फ्रैक्चर: हल्की गिरावट या सामान्य गतिविधि के दौरान भी हड्डी टूट सकती है।
बार-बार फ्रैक्चर होना: कम चोट में बार-बार हड्डी टूटना हड्डियों की कमजोरी का संकेत हो सकता है।
इन लक्षणों के दूसरे कारण भी हो सकते हैं, इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर ऑस्टियोपोरोसिस का निदान नहीं किया जा सकता।
हड्डियों की मजबूती के लिए क्या खाएं?
हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी है। भोजन में कैल्शियम से भरपूर चीजें शामिल करनी चाहिए। दूध, दही, पनीर, रागी, तिल और कुछ हरी पत्तेदार सब्जियां कैल्शियम के अच्छे स्रोत हो सकते हैं।
विटामिन डी भी कैल्शियम के अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार सुरक्षित धूप, संतुलित आहार और जरूरत पड़ने पर सप्लीमेंट का सहारा लिया जा सकता है। विटामिन डी या कैल्शियम की गोलियां बिना जरूरत और सलाह के अधिक मात्रा में नहीं लेनी चाहिए।
इसके अलावा, पर्याप्त प्रोटीन लेना भी मांसपेशियों और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। दालें, दूध, दही, अंडे और अन्य प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ संतुलित आहार का हिस्सा बनाए जा सकते हैं।
नियमित व्यायाम और जांच भी जरूरी
हड्डियों की मजबूती बनाए रखने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि फायदेमंद हो सकती है। पैदल चलना, सीढ़ियां चढ़ना और अपनी क्षमता के अनुसार वजन उठाने वाले व्यायाम हड्डियों तथा मांसपेशियों को मजबूत रखने में मदद कर सकते हैं। संतुलन सुधारने वाले व्यायाम गिरने का खतरा कम करने में भी उपयोगी होते हैं।
यदि किसी पुरुष की उम्र अधिक है, पहले मामूली चोट से फ्रैक्चर हो चुका है, लंबे समय से स्टेरॉयड दवाएं ले रहा है या उसमें ऑस्टियोपोरोसिस के अन्य जोखिम हैं, तो डॉक्टर हड्डियों के घनत्व की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। इसके लिए डेक्सा (DXA) स्कैन का इस्तेमाल किया जाता है।
ऑस्टियोपोरोसिस का इलाज जोखिम और जांच के परिणामों के अनुसार किया जाता है। कुछ लोगों को जीवनशैली में बदलाव पर्याप्त हो सकते हैं, जबकि अधिक जोखिम वाले मरीजों को डॉक्टर दवाएं भी दे सकते हैं।
Next Story